अगर आप भी पनीर खाने के शौकीन हैं तो उसे खरीदते समय कई बार मन में यह विचार आता तो होगा ही यह पनीर असली और शुद्ध है या नहीं। अगर आप से कहा जाए बाजार में ऐसा पनीर भी आ रहा है जो दिखने में यह बिल्कुल असली पनीर जैसा लगता है, लेकिन इसे दूध से नहीं बनाया जाता। इसकी जगह इसमें अक्सर वेजिटेबल ऑयल, स्टार्च और दूसरे एडिटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है।

यही वजह है कि महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए ऐसे नॉन-डेयरी (एनालॉग) पनीर के निर्माण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। आखिर यह पनीर क्या होता है, इसे लेकर एक्सपर्ट्स क्यों सावधान रहने की सलाह दे रहे हैं और बाहर से पनीर खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, आइए जानते हैं।

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं और खाद्य सुरक्षा नियमों के बड़े पैमाने पर उल्लंघन को देखते हुए ‘एनालॉग’ यानी नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, आदेश में कहा गया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को आजीवन कारावास और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह का कदम उठाने वाला महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के बाद दूसरा राज्य बन गया है।

एक्सपर्ट से जानें नॉन-डेयरी पनीर पर बैन क्यों है सही?

जब इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस की टीम ने मुंबई के ग्लेनईगल्स हॉस्पिटल, परेल की चीफ डाइटिशियन जमुर्रुद पटेल से बात की तो उन्होंने बताया कि एनालॉग पनीर पर रोक को स्वास्थ्य के लिहाज से सकारात्मक कदम हो सकता है। उनके मुताबिक, एनालॉग पनीर अक्सर ताजे दूध की जगह कम गुणवत्ता वाले विकल्पों जैसे वेजिटेबल ऑयल, स्टार्च और अलग-अलग एडिटिव्स का इस्तेमाल करके बनाया जाता है।

यह देखने में भले ही बिल्कुल असली पनीर जैसा लग सकता है, लेकिन इसकी पोषण गुणवत्ता काफी कम होती है। अगर इसे साफ-सफाई के मानकों के बिना तैयार किया जाए तो इससे पाचन संबंधी दिक्कतें, संक्रमण और मिलावट की वजह से लंबे समय में स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।

अब जानें ताजा पनीर क्यों है बेहतर विकल्प?

जमुर्रुद पटेल बताती हैं कि ताजा पनीर सीधे दूध से बनाया जाने वाला एक पौष्टिक डेयरी उत्पाद है। इसमें अच्छी गुणवत्ता वाला प्रोटीन, कैल्शियम और कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने, मांसपेशियों की मरम्मत और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है।

दूध वाला पनीर और नॉन-डेयरी पनीर में क्या अंतर है?

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में किम्स हॉस्पिटल, ठाणे की चीफ डाइटिशियन डीटी अमरीन शेख ने बताया कि असली पनीर दूध में नींबू का रस या सिरके जैसे फूड-ग्रेड एसिड मिलाकर तैयार किया जाता है। उन्होंने बताया कि इसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, कैल्शियम और कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसलिए यह संतुलित आहार का अहम हिस्सा माना जाता है।

अमरीन शेख के मुताबिक, दूध से बने पनीर का प्रोटीन ‘कम्प्लीट प्रोटीन’ होता है, यानी इसमें शरीर के लिए जरूरी सभी आवश्यक अमीनो एसिड पाए जाते हैं। वहीं, पौधों से बने विकल्पों में प्रोटीन की मात्रा कम हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ प्रोसेस्ड विकल्पों में स्वाद और बनावट बेहतर बनाने के लिए सोडियम, सैचुरेटेड फैट, स्टेबलाइजर्स और अन्य एडिटिव्स अधिक मात्रा में मिलाए जा सकते हैं।

बाहर का पनीर खाते समय रखें सावधानी

अमरीन शेख ने लोगों को बाहर से खरीदे गए पनीर को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी। उनका कहना है कि नकली या एनालॉग पनीर का रंग, स्वाद और बनावट पारंपरिक पनीर से काफी मिलती-जुलती हो सकती है, इसलिए बिना सही लेबलिंग के दोनों में अंतर करना आसान नहीं होता।

उन्होंने सलाह दी कि पनीर हमेशा भरोसेमंद ब्रांड या विश्वसनीय दुकानों और प्रतिष्ठित फूड आउटलेट्स से ही खरीदें, ताकि कम गुणवत्ता या भ्रामक उत्पाद मिलने का जोखिम कम हो सके।

डिस्क्लेमर: यह खबर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और संबंधित एक्सपर्ट्स से हुई बातचीत पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।