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40 रानियों के साथ खास तालाब में स्नान करते थे यह महाराज, जानिए और क्या थे शाही शौक

महाराज किशन सिंह तैराकी के शौकीन थे। अपने जुनून को पूरा करने के लिए वह कुछ भी...

Author Published on: September 19, 2017 3:45 PM

राजस्थान के महाराजा और उनके राजसी ठाठ दुनिया भर में आज भी मशहूर हैं। ऐसे ही एक राजा थे, जो अपने रंगीन मिजाज और शाही शौकों के लिए जाने जाते थे। वह एक-दो या पांच-दस नहीं बल्कि 40 रानियों के साथ नहाते थे। उन्होंने इसके लिए खास किस्म के तालाब का निर्माण भी कराया था। रानियां यहां उनका बगैर कपड़ों के स्वागत करती थीं।

दीवान जरमनी दास ने किबात लिखी थी ‘महाराजा’। उसमें इस रसिक मिजाज के महाराज का जिक्र था। किताब के मुताबिक, भरतपुर के महाराज किशन सिंह तैराकी के शौकीन थे। अपने जुनून को पूरा करने के लिए वह कुछ भी कर जाते थे। गुलाबी पत्थरों से उन्होने एक बड़ा तालाब तैयार कराया था। उसमें आने-जाने के लिए चंदन की लकड़ी से सीढ़ियां बनवाई थीं। 20 चंदन की लकड़ियां का इसमें इस्तेमाल किया गया था। एक लकड़ी पर दो रानियां आसानी से खड़ी हो जाती थीं।

राजा उन सभी से इस दौरान नेकेड रहने के लिए कहते थे। जब वह तालाब में प्रवेश करते थे, तब रानियां बगैर कपड़ों के खड़े होकर उनका स्वागत करती थीं। राजा अपनी बांहों में लेते हुए भर लेते। आखिरी सीढ़ी तक वह ऐसे ही आनंद उठाते थे। सभी रानियों के हाथ में तब मोमबत्तियां भी होती थीं। शाही स्नान के वक्त महल की सारी बत्तियां बुझा दी जाती थीं।

पूरे किस्से की सबसे खास बात- महाराज नहाते तो 40 रानियों के साथ थे। लेकिन रात सिर्फ उनमें से एक के साथ ही गुजारते थे। ऐसे में तालाब में नृत्य के दौरान तय होता था कि उस रात उनके साथ कौन गुजारेगा। दरअसल, रानियों के नृत्य करने के दौरान उन्हें मोमबत्तियां जलाए रखनी होती थीं। आखिर तक जिस रानी की मोमबत्ती जलती रहती थी, वही उस रात राजा के साथ सोती थी।

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