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Mahalaya Amavasya 2018 Date and Time: क्यों मनाई जाती है महालया अमावस्या, जानिए

Mahalaya Amavasya 2018 Date and Time in India, Pitru Paksha 2018 Date and Time: महालया के दिन मुख्यतः सभी लोग अपने पितरों को याद करते हैं। उन्हें भोजन अर्पित करते हैं और उनकी पुनः विदाई करते हैं।

Mahalaya Amavasya 2018: महालया बंगालियों के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे दुर्गा पूजा की शुरुआत के तौर पर मनाया जाता है।

Mahalaya Amavasya 2018 Date and Time in India, Durga Puja 2018, Pitru Paksha 2018 Date and Time in India: नवरात्र से ठीक पहले आने वाली अमावस्या को महालया अमावस्या कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन से दुर्गा पूजा की शुरुआत होती है। यूं तो यह एक बंगाली त्योहार है लेकिन इसे पूरे देश में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। बंगाली लोगों में इस पर्व की तैयारी 1 महीने पहले से ही शुरू हो जाती है। इस साल महालया अमावस्या 8 अक्टूबर को मनाई जाएगी। महालया को देश के अधिकांश हिस्से में पितृपक्ष के आखिरी दिन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन पितरों का श्राद्ध कर उन्हें दोबारा विदाई दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि अगर पितरों को ठीक से विदाई न दी जाए तो वे नाराज हो जाते हैं और श्राप दे देते हैं। लेकिन, अगर पितर खुशी-खुशी विदा होते हैं तो वह अपने साथ परिवार की सारी परेशानियां लेकर चले जाते हैं।

क्या है महालया पर्व – महालया बंगालियों के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे दुर्गा पूजा की शुरुआत के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन मां दुर्गा को धरती पर महिषासुर से रक्षा करने के उद्देश्य से बुलाते हैं। आश्विन माह की अमावस्या को श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा करके उनका आह्वान करते हैं। इसके बाद जब दुर्गा का आगमन हो जाता है तब बहुत बड़ा उत्सव मनाया जाता है। छठी के दिन पंडाल बनाए जाते हैं और दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। महालया पितृपक्ष का आखिरी दिन भी होता है। इस दिन वे लोग अपने पितरों का श्राद्ध करते हैं जिन्हें अपने पूर्वज के देहावसान की तिथि मालूम नहीं होती है।

कैसे मनाया जाता है महालया – महालया के दिन मुख्यतः सभी लोग अपने पितरों को याद करते हैं। उन्हें भोजन अर्पित करते हैं और उनकी पुनः विदाई करते हैं। इस दिन लोग सुबह स्नान करके मां दुर्गा की प्रतिमा की पूजा करते हैं। खाना और कपड़े दान करते हैं। पितरों के लिए चांदी या तांबे के बर्तन में पकाए जाते हैं। इसके बाद केले के पत्तों और सूखी पत्तियों से बने कटोरे में यह भोजन खिलाया जाता है। इस भोजन में खीर, पूड़ी, चावल, दाल और सीताफल शामिल होता है। महालया के दिन ब्राह्मणों को भोजन करा उन्हें श्रद्धास्वरूप दक्षिणा प्रदान किया जाता है। इसके बाद भोजन कर पितरों को विदाई दी जाती है।

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