Madhumalti ki Dekhbhal ke Tarike: बालकनी की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए हम तरह-तरह के सजावटी पौधे, फूल और बेलों वाले पौधे लगाना पसंद करते हैं। जिसमें मधुमालती का पौधा भी शामिल है, इसमें रंग-बिरंगे और खूबसूरत फूल खिलते हैं। इनकी खासियत है कि यह अपना रंग बदलते रहते हैं। पहले सफेद फिर गुलाबी और अंत में गहरे लाल रंग के हो जाते हैं। यह घर की बालकनी की सुंदरता में चार चांद लगा सकता है। बाजार में इसकी दो वैरायटी मिल जाएंगी, पहला हाइब्रिड और दूसरा देसी। हाइब्रिड वाली बेल ज्यादा ऊपर तक नहीं जाती लेकिन देसी बेल को आप जमीन पर लगाकर टेरेस तक बांध सकते हैं।
अगर आपके घर में मधुमालती की बेल लगी है, तो उसकी देखभाल के लिए कुछ बातों का ध्यान रख सकते हैं। इससे पौधा लंबे समय तक स्वस्थ और हरा-भरा रह सकता है। आइए जानते हैं उन तरीकों के बारे में, जो पौधे की देखभाल में मदद कर सकते हैं।
गमले का साइज और पर्याप्त धूप
मधुमालती के पौधे को करीब 16 से 18 इंच के गमले में लगाना बेहतर हो सकता है। इससे पौधे की जड़ें अच्छी तरह फैलने की जगह मिल पाती है और पौधा तेजी से बढ़ सकता है। इसके अलावा पौधे को बालकनी में ऐसी जगह रखें जहां पर उसे कम से कम 6 से 8 घंटे की धूप मिल सके। हल्की धूप में भी पौधा बढ़ सकता है लेकिन अच्छी धूप मिलने पर फूलों की संख्या बढ़ सकती है।

बेल के लिए सहारा
मधुमालती एक बेल वाला पौधा जिसे सहारे की जरूरत होती है। इससे पौधा अच्छी तरह से विकसित हो पाती है और दिखने में भी सुंदर लगते हैं। बालकनी की रेलिंग, जाली या दीवारों के पास इसे लगा सकते हैं। बेल को सहारा मिलने से यह ऊपर और आसपास आसानी से फैल सकती है, जिससे पौधा व्यवस्थित दिखता है और बालकनी भी सुंदर लग सकती है। अगर इसकी टहनियां ज्यादा फैल रही हैं, तो इसे आप रस्सी की मदद से बांध सकते हैं।
फर्टीलाइजर का इस्तेमाल
मधुमालती के पौधे को अच्छी तरह बढ़ने के लिए समय-समय पर पोषण की आवश्यकता होती है। इसके लिए आप वर्मीकंपोस्ट या लिक्विड फर्टीलाइजर का इस्तेमाल कर सकते हैं। हर 15 से 20 दिन के अंतराल में नीम खली का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह फंगल संक्रमण से बचाव में मदद कर सकती हैं। इसके लिए जरूरत के अनुसार मिट्टी में खाद मिलाएं और बाद में पानी दें। पौधे को स्वस्थ रखने के लिए जरूरत से ज्यादा फर्टीलाइजर का इस्तेमाल करने से बचें।
