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शोध: आधे घंटे का योग दूर करेगा फेफड़ों का रोग

शोध को इंडियन कॉलेज आॅफ एलर्जी अस्थमा एंड इम्यूनोलॉजी द्वारा मार्च 2018 में चार्ल्स रिचर्ट प्राइज से सम्मानित किया जा चुका है। डॉ श्रुति का कहना है कि इस शोध में 120 मरीजों को शामिल किया गया था, जिन पर छह महीने तक निगरानी रखी गई।

Author May 2, 2018 5:42 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

गजेंद्र सिंह

लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में किए गए एक शोध में सामने आया है कि अगर रोजाना 30 मिनट योगाभ्यास किया जाए तो इससे अस्थमा जैसी जटिल बीमारी भी हार मान जाएगी। यह शोध केजीएमयू के श्वसन विभाग की डॉ श्रुति अग्निहोत्री ने विभागाध्यक्ष डॉ सूर्यकांत के निर्देशन में किया। विभाग की ओर से अस्थमा के मरीजों के लिए रोजाना एक घंटे की योग कक्षाएं भी चलाई जा रही हैं। इस शोध को इंडियन कॉलेज आॅफ एलर्जी अस्थमा एंड इम्यूनोलॉजी द्वारा मार्च 2018 में चार्ल्स रिचर्ट प्राइज से सम्मानित किया जा चुका है। डॉ श्रुति का कहना है कि इस शोध में 120 मरीजों को शामिल किया गया था, जिन पर छह महीने तक निगरानी रखी गई। इसमें लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजकार्य और बायोकेमिस्ट्री विभाग की भी मदद ली गई। योग के दौरान प्राणायाम में नाड़ी शोधन, भ्रामरी और भस्त्रिका कराया गया। इसके अलावा आसन और ध्यान भी इनमें शामिल रहा। उनका कहना है कि शोध कार्य में सबसे ज्यादा समस्या तब आई जब मरीज लगातार कक्षाएं नहीं ले पाए। कुछ मरीज बीच में ही कक्षा छोड़कर चले गए जिसका प्रभाव निष्कर्ष के समय पर पड़ा।

डॉ श्रुति बताती हैं कि शोध के बाद निष्कर्ष मिला कि रोजाना 30 मिनट तक योग करने वाले अस्थमा के मरीजों का जीवन स्तर न केवल सुधरा बल्कि उनमें एंटिआॅक्सीडेंट का स्तर भी बढ़ा। लगातार कमजोर हो रहे फेफड़ों की कार्य क्षमता में वृद्धि भी देखी गई। उनका कहना है कि शोध के दौरान मरीजों के इनहेलर की खुराक में भी करीब 55 फीसद की कमी देखी गई। हालांकि दवाएं चलती रहीं। डॉ श्रुति बताती हैं कि नियमित रूप से प्राणायाम करने से ही एक तिहाई बंद नलिकाएं खुल जाती हैं, फेफड़ों की शक्ति बढ़ती है और प्रदूषित वायु बाहर निकलती है। शरीर को रोगों से लड़ने के लिए शक्ति मिलती है।
हालांकि डॉक्टर का यह भी कहना है कि योग को सहचिकित्सा पद्धति के रूप में अपनाने से अस्थमा पर नियंत्रण संभव है। प्रदूषण और ठंडे पेय पदार्थ बढ़ा रहे बीमारी

केजीएमयू श्वसन विभागाध्यक्ष और नेशनल कॉलेज आॅफ चेस्ट फिजीशियन इंडिया के उपाध्यक्ष डॉक्टर सूर्यकांत का कहना है कि भारत में अस्थमा के कारक तत्व के रूप में 49 फीसद प्रदूषण, 29 फीसद ठंडे पेय पदार्थ, 24 फीसद रसायन और 11 फीसद तनाव प्रमुख भूमिका निभाते हैं। ग्लोबल इनिशिएटिव आॅफ अस्थमा (जिना) के मुताबिक, 40 फीसद लोगों में अस्थमा अनियंत्रित और 60 फीसद लोगों में आंशिक रूप से नियंत्रित है। वे बताते हैं कि ग्लोबल बर्डन आॅफ अस्थमा के मुताबिक, दुनियाभर में लगभग 30 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं और दस फीसद यानी तीन करोड़ सिर्फ भारत में ही हैं। अस्थमा से पीड़ित मरीजों की सांस की नलिकाओं की भीतरी दीवार में सूजन आ जाती है। इस स्थिति में फेफड़ों में हवा की मात्रा कम हो जाती है।

अस्थमा के दौरे को ऐसे रोकें
– दवा हमेशा पास रखे और कंट्रोलर इनहेलर समय से लें।
– सिगरेट, सिगार के धुएं और एलर्जी से बचें।
– फेफड़े के लिए सांस संबंधी व्यायाम करें।
– ठंड से अपने आप को बचाकर रखें।
– बदलते मौसम के प्रति सजग रहें।
– रुई युक्त तकिया या बिस्तर का प्रयोग न करें।
– व्यायाम और मेहनत का काम करने से पहले इनहेलर का प्रयोग करें।

– घर हवादार हो और इसमें धूप आनी चाहिए।
– रोगी के कमरे में असली व नकली पौधे न हों।

क्या न करें
– घर में जानवरों को न पालें।
– घर में धूल को न जमने दें व गंदगी न रखें।
– कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम व फास्ट फूड न लें।

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