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टूटने के कगार पर थी सोनू निगम की शादी, सिंगर के प्रयासों से हम भी ले सकते हैं सीख

नाम कमाने के बाद एक वक्त ऐसा भी आया जब सोनू निगम के पारिवारिक जीवन में कलह इतना बढ़ गया कि उनकी शादी टूटने तक के कगार पर पहुंच गई। उस वक्त अपने पारिवारिक रिश्ते को बचाने के लिए सोनू निगम ने जो कुछ भी किया वो काबिल-ए-तारीफ है।

गायक सोनू निगम और उनकी पत्नी मधुरिमा फोटो सोर्स – फेसबुक

बॉलवुड के मशहूर गायक सोनू निगम 45 साल के हो गए हैं। अपनी गायकी से बॉलीवुड में नाम कमाने वाले सोनू निगम का जन्म हरियाणा के फरीदाबाद में हुआ था। एक सफल सिंगर बनने से पहले सोनू निगम ने कड़ा संघर्ष किया है। नाम कमाने के बाद एक वक्त ऐसा भी आया जब सोनू निगम के पारिवारिक जीवन में कलह इतना बढ़ गया कि उनकी शादी टूटने तक के कगार पर पहुंच गई। उस वक्त अपने पारिवारिक रिश्ते को बचाने के लिए सोनू निगम ने जो कुछ भी किया वो काबिल-ए-तारीफ है। विवाह को खत्म होने से बचाने के लिए सोनू निगम ने जो कुछ भी किया वो हमारे लिए प्रेरणा स्त्रोत से कम नहीं।

सोनू निगम ने खुद इसके बारे में प्रतिष्ठित अखबार ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ से बातचीत करते हुए बतलाया था। सोनू निगम ने कहा था कि जब पारिवारिक जीवन में उनकी पत्नी के साथ उनके रिश्तों में थोड़ी कड़वाहट होनी लगी तब उस वक्त वो अध्यात्म की तरफ मुड़ गए। अध्यात्म ने उनके जीवन में काफी बदलाव लाया। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी पत्नी के साथ रिश्तों में आई सभी समस्याओं को भी खत्म कर लिया। सोनू निगम ने कहा था कि उनका परिवार एक साथ रहता है और परिवार के सभी सदस्य एक दूसरे का काफी सम्मान भी करते हैं। आपको बता दें कि सोनू निगम ने साल 2002 में मधुरिमा से शादी की थी।

इन 5 तरीकों से अध्यात्म के जरिए बदल सकते हैं अपनी जिंदगी :

-कहा जाता है कि अगर दो इंसान एक समान रुप से अध्यात्म से जुड़े हों तो इनके बीच रिश्ते काफी मजबूत हो सकते हैं। एक ही धर्म और अध्यात्म से लगाव रिश्तों में जहां मजबूती ला सकती है, वहीं अध्यात्म की वजह से लंबे समय तक ऐसे रिश्तों के बने रहने की संभावना भी काफी ज्यादा मानी जाती है।

-कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने अपने एख अध्धयन में कहा है कि मानसिक अवसाद रिश्तों में कड़वाहट या फिर तलाक की प्रमुख वजह होती है। लेकिन अध्यात्म लिए समपर्ति इंसान का दिमाग बायोलॉजिकली काफी मजबूत हो सकता है। अध्यात्म इंसान को मानसिक अवसाद से बाहर निकालन में भी काफी मददगार साबित हो सकता है।

-प्रार्थना करने से भी रिश्तों में आपसी समन्वय बैठाने में मदद मिल सकती है। अगर कोई एक शख्स दूसरे के लिए प्रार्थना करे तो इससे इन दोनों के बीच विश्वास का रिश्ता काफी बढ़ सकता है।

-कहा गया है कि धर्म औऱ अध्यात्म से जुड़े लोग ज्यादा दयालु प्रकृति के होते हैं। इससे उन्हें एक-दूसरे साथ दयालुता पूर्ण व्यवहार करने में मदद मिल सकती है। दयालु ह्रद्य के लोगों का स्वभाव बेहतर माना जाता है।

-अध्यात्म स्ट्रेस को खत्म करने भी सहायक माना जाता है। मानसिक रुप से ज्यादा तनाव में रहने वाले इंसान का स्वास्थ्य अक्सर खराब होता है, लेकिन अध्यात्म पर केंद्रित होकर इस स्ट्रेस को कम किया जा सकता है।

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