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प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए खतरनाक है वायु प्रदूषण, ऐसे बरतें सावधानियां

पत्रिका एनवायरमेंटल हेल्थ पर्सपेक्टिव्स में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि जन्म से पहले दूषित हवा में सांस लेने वाली माताओं के छह माह के शिशुओं में हृदय गति पर असर पड़ सकता है।

Pollution, Pollution effect on pregnant women, Pollution updates, Pollution news, Pollution impact on pregnant femals, pregnant women effects from pollution, sperm quality, premature delivery, Pregnant women, Pollution Effectक अध्ययन के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान जो माताएं वायु प्रदूषण की चपेट में आती हैं उनके छह माह की आयु के शिशुओं में तनाव की स्थिति में हृदय गति कम हो जाती है।

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण के बढ़े स्तर से गर्भवती महिलाओं को तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एनसीआर की आबोहवा इस वक्त सभी के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। वायु प्रदूषण के सूक्ष्म कण जब हवा के जरिए हमारे फेफड़ों में प्रवेश करते हैं तो यह न केवल हमारी सेहत पर असर डालते हैं बल्कि इस दुनिया में आंखें खोलने से पहले ही गर्भ में पल रहे शिशुओं के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। एक अध्ययन के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान जो माताएं वायु प्रदूषण की चपेट में आती हैं उनके छह माह की आयु के शिशुओं में तनाव की स्थिति में हृदय गति कम हो जाती है।

पत्रिका एनवायरमेंटल हेल्थ पर्सपेक्टिव्स में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि जन्म से पहले दूषित हवा में सांस लेने वाली माताओं के छह माह के शिशुओं में हृदय गति पर असर पड़ सकता है। अमेरिका में माउंट सिनाई में इकान स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने 237 माताओं और उनके शिशुओं का अध्ययन किया और उनकी गर्भावस्था के दौरान वायु प्रदूषण के स्तर का पता लगाने के लिए उपग्रह से मिले डेटा और वायु प्रदूषण निगरानी तंत्र का इस्तेमाल किया।

उन्होंने बताया कि हृदय तथा रक्तवाहिका संबंधी, श्वसन तंत्र और पाचन तंत्रों के उचित तरीके से काम करने को सुनिश्चित करने के लिए तनावपूर्ण स्थितियों में हृदय गति को बरकरार रखना अनिवार्य है। अध्ययन में कहा गया है कि हृदय गति में परिवर्तन होते रहना बाद के जीवन में मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए खतरे की बात है। वहीं पर्यावरण थिंक टैंक सीएसई के स्टेट ऑफ इंडियाज इन्वायरन्मेंट (एसओई) रिपोर्ट जारी कर कहा कि प्रदूषित हवा के कारण भारत में 10,000 बच्चों में से औसतन 8.5 बच्चे पांच साल का होने से पहले मर जाते हैं।

ऐसे बरतें सावधानियां
अगर आपके घर में कोई प्रेग्नेंट हैं तो सभी खिड़की-दरवाजे बंद रखें और वैक्यूम क्लीनर का छिड़काव करें।

टहलना सेहत के लिए अच्छा है लेकिन कुछ समय के लिए बाहर जाना अवॉइड करें। क्योंकि इस समय सुबह-शाम ज्यादा स्मॉग है जिसका असर आपके शिशु पर भी पड़ सकता है।

अगर कहीं बाहर जाते भी हैं तो मास्क लगाना न भूलें। दूषित हवा आंखों को जला रही है इसलिए चश्मा एक बेहतर विकल्प है। याद रहे चश्मे प्रोटेक्शन वाला ही पहनें बजाए किसी लोकल ब्रांड के वरना आपकी आखों में और भी जलन बढ़ जाएगी।

अगर आपको लगता है कि आंखों में जलन हो रही है तो बजाए रगड़ने के पानी से धुलें.

अलमारी से आप विंटर क्लोद्स निकाल रहे हैं तो पहले उन्हें धूप में सुखाएं।

कुछ वक्त के लिए सांस-दमा रोगी दवाएं समय से लेना न भूलें।

 

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