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प्लेन में ड्राईफ्रूट खा रहे थे लालू यादव, रिपोर्टर को देख करने लगे एयरहोस्टेस से शिकायत

लालू यादव चारा घोटाले में सरेंडर करने के लिए पटना से रांची आ रहे थे। वह हवाई जहाज में थे और उनके साथ कुछ पत्रकार भी मौजूद थे। लालू इस दौरान काजू-बादाम खा रहे थे, लेकिन पत्रकारों के बार-बार सवाल पूछने से वह परेशान हो गए थे।

लालू ने यहां तक कहा था कि जनवर की हड्डी हो या दानव की हड्डी, अगर इसे खाने से अमरत्व मिलता है तो क्या दिक्कत हैं।( मोदी जीवित रहें, लेकिन गंगा कब बुलाती हैं? जब लालू प्रसाद यादव ने पीएम की उड़ाई थी खिल्ली )

लालू प्रसाद यादव साल 1990 में पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। लालू ने इससे पहले इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ लंबा संघर्ष किया था। इमरजेंसी के दौरान उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया था। लालू को करीब से जानने वाले पत्रकारों ने बताया था कि वह सीएम बनने के बाद काफी बदल गए थे। एक ऐसी ही घटना का जिक्र एबीपी न्यूज़ के पत्रकार ने अपनी रिपोर्ट में किया है।

चारा घोटले में सरेंडर करने के लिए लालू यादव साल 2018 में पटना से रांची के लिए रवाना हुए थे। हवाई जहाज से जाने के लिए लालू यादव निकले तो कुछ पत्रकार उनसे सवाल पूछने लगे। लालू ने अपने अंदाज में सबको जवाब दिया और हवाई जहाज में चढ़ गए। इस दौरान लालू के साथ उनके सहयोगी भोला यादव भी थे। हवाई जहाज में एयर होस्टेस ने लालू यादव को कुछ काजू और बादाम दिए। इस दौरान वह बैठे हुए काजू-बादाम खा रहे थे।

लालू के साथ हवाई जहाज में कुछ पत्रकार भी मौजूद थे। इस दौरान लालू सबको जवान दे रहे थे, लेकिन वह काजू-बादाम खाना चाहते थे। लालू ने कई रिपोर्टर्स के सवालों को जवाब अपने अंदाज में दिया। जब अन्य चैनल के रिपोर्टर ने फिर से उनके आगे माइक किया तो वह थोड़ा परेशान हो गए और मजाकिया अंदाज में एयर होस्टेस से शिकायत करने लगे। लालू बोलते हैं- ‘मेरा पैसा बर्बाद हो गया, ए सिस्टर ई बादाम खाने नहीं दे रहा।’

जब बीजेपी प्रवक्ता ने लालू यादव की बातों को बताया कॉमेडी नाइट: 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी प्रवक्ता दीपिका शर्मा लालू यादव की बातें सुनने के बाद कहती हैं, ‘आपकी बातें कॉमेडी नाइट से भी बेहतर हैं। सरकार चलाना बेहद गंभीर विषय है न कि ये कॉमेडी नाइट।

इसके जवाब में लालू यादव कहते हैं, ‘आप जैसे अभिजात्य वर्ग के लोगों से यही अपेक्षा थी। आपने जो मुझे कॉम्प्लीमेंट दिया..इसके लिए थैंक्यू। लेकिन इसके लिए भी परिश्रम करना पड़ेगा। लालू यादव के इतना कहते ही वहां मौजूद सभी लोग तालियां बजाने लगे और हंसने लगे। आपको मैं टीवी पर डिबेट करते हुए देखता हूं.. आपको साधु संतों के बीच में देखता हूं। यथार्थ और सच्चाई पर बहस होना चाहिए।’

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