नींद पूरी न होने से पड़ सकता दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा, जानिए

कम सोने के कारण इंसुलिन को लेकर शरीर की संवेदनशीलता कम हो जाती है और रक्त में शर्करा को नियंत्रित करने की इसकी क्षमता भी प्रभावित होती है।

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स्लीप एप्निया और गठिया में संबंध सिद्ध हो चुका है (Photo-File)

आजकल के समय में लोगों को नींद नहीं आना एक बड़ी समस्या बन गयी है। ऐसे में अपर्याप्त नींद से मोटापा, मेटाबोलिक सिंड्रोम, मनोवस्था संबंधी विकार आदि होने का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एक व्यक्ति को कम से कम 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। सही नींद नहीं लेने से कई तरह की शारीरिक दिक्कतें आती हैं।

एक शोध के मुताबिक अगर कोई छह घंटे से कम की नींद लेता है, तो उसके साथ सेहत पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में व्यक्ति को पर्याप्त नींद लें चाहिए। आपको बता दें कि कम सोने के कारण इंसुलिन को लेकर शरीर की संवेदनशीलता भी कम हो जाती है जिसके कारण ब्लड शुगर को नियंत्रित करने क्षमता प्रभावित होती है और व्यक्ति में डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।

एक रिसर्च के मुताबिक पर्याप्त नींद न लेने के कारण शरीर का इम्यून सिस्टम भी कमजोर होने लगता है। कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए इम्यून सिस्टम का सही होना बेहद जरुरी है। इसलिए आपको अपर्याप्त नींद से बचना चाहिए।

डायबिटीज का खतरा: पर्याप्त नींद न लेने के कारण शरीर की पाचन क्रिया बिगड़ती है यानी आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म बिगड़ता है। ठीक पत्रकार से पैंक्रियाज के काम न करने के कारण व्यक्ति के मोटा होने की भी आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में आपका शरीर इंसुलिन कम खिलाफ काम करने लगता है। फलस्वरूप व्यक्ति को टाइप-2 डायबिटीज होने की आंशका बढ़ जाती है। डायबिटीज और हाइपरटेंशन एक साथ हो गए तो आपकी मुसीबत और बढ़ जाएगी।

हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा: व्यक्ति अगर अपनी नींद पूरी नहीं करता है तो उसे ऐसी स्थिति में हाई ब्लड प्रेशर होने का खतरा बढ़ जाता है। यदि किसी व्यक्ति को यह स्थिति ज्यादा दिनों तक रहती है तो उसके ऊपर स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में उसे कभी भी हार्टअटैक हो सकता हो। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त नींद लेने वालों में दिल संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।

अल्जाइमर्स का खतरा: पर्याप्त नींद न लेने वालों में तनाव का स्तर तेजी से बढ़ता है जिसके कारण व्यक्ति डिमेंशिया या अल्जाइमर्स (Alzheimer’s) का भी शिकार हो सकता है। कम सोने की वजह से व्यक्ति के सोचने समझने और फैसला लेने पर भी असर पड़ता है। ऐसे में सड़क हादसा या फिर काम में गलतियां होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

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