International Labour Day 2026 Date, History, Theme: पूरी दुनिया में अनगिनत मजदूर अपने श्रम से समाज के साथ-साथ अर्थव्यवस्था की नींव को मजबूत करते हैं। इनके परिश्रम को समर्पित होता है एक दिन जिसका नाम है अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस। इस दिन के अंग्रेज़ी में लेबर डे, मे डे और वर्कर्स डे के नाम भी हैं। हर साल यह दिन मनाया जाता है इस उम्मीद के साथ मजदूरों के उनके हक की सभी चीजें मिल सकें। यह दिन कब और क्यों मनाया जाता है और इसके पीछे का इतिहास क्या है, आइए जानें।

मजदूर दिवस का इतिहास

19वीं सदी में औद्योगिक क्रांति के दौरान मजदूरों से बहुत लंबे समय तक काम कराया जाता था। मजदूर अक्सर 8 से 16 घंटे रोजाना काम करते थे। इससे परेशान होकर मजदूरों ने “8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे व्यक्तिगत समय” की मांग शुरू की। मजदूरों ने 1 मई 1886 को अमेरिका के शिकागो में हजारों मजदूरों ने 8 घंटे काम की मांग को लेकर हड़ताल की। Encyclopaedia Britannica के अनुसार 1880 के दशक से, 1 मई को श्रमिक दिवस के रूप में निर्धारित किया गया है। 1886 में इसी दिन, अमेरिकी श्रमिकों ने आठ घंटे के कार्यदिवस के समर्थन में मार्च किया गया। इसके साथ ही शिकागो, इलिनोइस में प्रदर्शन जारी रहे। वहीं 4 मई, 1886 को हेमार्केट स्क्वायर में एक बम विस्फोट हुआ। हेमार्केट दंगे के नाम से जाना जाने वाला यह हिंसक विरोध प्रदर्शन श्रमिकों के अधिकारों के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष का प्रतीक बन गया।

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस बनने की कहानी

Britannica के अनुसार 1889 में समाजवादी दलों और श्रमिक संघों की एक अंतरराष्ट्रीय बैठक में 1 मई को श्रमिकों के समर्थन दिवस के रूप में चुना। संयुक्त राज्य अमेरिका, चिली, पेरू, क्यूबा और अधिकांश यूरोपीय देशों में पहली बार 1 मई, 1890 को श्रमिक दिवस मनाया गया। समान अधिकारों, उच्च वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर प्रदर्शन किए गए। 1 मई को रूस, ब्राजील और आयरलैंड में 1891 में अवकाश घोषित किया गया। चीन ने 1920 में श्रमिक दिवस मनाना शुरू किया। भारत ने पहली बार 1927 में इसे मनाया। इसकी शुरुआत लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान के नेता सिंगारवेलु चेटियार ने की थी। यह दिन आज भी मजूदरों को बेहतर वेतन, काम के घंटे और कार्य स्थितियों के लिए संघर्ष की याद दिलाता है।