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तो इसलिए प्रेग्नेंट महिलाओं को दी जाती है मछली खाने की सलाह

कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रेग्नेंसी के एक हफ्ते में 12 औंस तक मछली खाना मां और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होता है। इससे महिला और शिशु दोनों को जरूरी प्रोटीन और आयरन मिलते हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस दौरान उन्हें अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। प्रे्ग्नेंसी में संतुलित और पोषणयुक्त आहार का सेवन मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। क्योंकि इस दौरान कैलोरी की खपत बढ़ जाती है इसलिए पौष्टिक और संतुलित आहार लेना भ्रूण और मां दोनों के लिए जरूरी हो जाता है। पर्याप्त पोषक तत्व भ्रूण के शारीरिक विकास को सुनिश्चित करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं प्रेग्नेंसी के दौरान मछली खाने की सलाह क्यों दी जाती है? आइए जानते हैं क्या है वजह।

दरअसल, प्रेग्नेंसी में महिलाओं को साल्मन, ट्राउट, ट्यूना मछलियों के सेवन की सलाह दी जाती हैं, क्योंकि ये शिशु को सांस से जुड़ी समस्याएं होने के खतरे को कम करता है। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला द्वारा मछली के सेवन से अस्थमा होने का खतरा भी कम हो जाता है। एक शोध के मुताबिक, मछली के ऊतकों और पेट के आसपास यानी फिलेट्स में 30 प्रतिशत तक तेल होता है। हालांकि ये आंकड़े मछली की प्रजाति पर निर्भर करते हैं। शोध के मुताबिक साल्मन मछली खाने वाली महिलाओं और नहीं खाने वाली महिलाओं के बच्चों में कुछ सालों के बाद अंतर नजर आने लगता है। मछली खाने वाली महिलाओं की संतानों में मछली नहीं खाने वाली महिलाओं की तुलना में अस्थमा की आशंका भी कम नजर आई।

वहीं कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रेग्नेंसी के एक हफ्ते में 12 औंस तक मछली खाना मां और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होता है। इससे महिला और शिशु दोनों को जरूरी प्रोटीन और आयरन मिलते हैं। प्रेगनेंट महिला को दिन में 27 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती है जो उसे एनिमिया से बचाता है। 71 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है जो शिशु को बढ़ने और महिला की शारीरिक बदलावों को पूरा करने में मदद करता है।

इन बातों का रखें ध्यान: प्रेग्नेंसी के दौरान उन मछलियों और बाकी सीफूड का सेवन नहीं करना चाहिए जिनमें मिथाइल मर्करी रसायन पाया जाता हो। क्योंकि मिथाइल मर्करी शिशु के दिमाग, नर्वस सिस्टम और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। इसकी जगह अंडे, ड्राइ फ्रूट्स, दाल और अनाज को डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा सोयाबीन, उबले चने, पनीर और जूसी फलों के सेवन से शरीर में प्रोटीन की आपूर्ति होती है।

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