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प्यार के बारे में अपने ग्रैंडपैरेंट्स से सीख सकते हैं ये बातें

बच्चों की परवरिश की शुरूआत घर के बुजुर्गों से ही होती है। वे परिवार और संस्कारों की नींव तैयार करते हैं और अपने अनुभव बच्चों के साथ सांझा करते हैं।

Author September 18, 2018 10:37 AM
अभिषेक बच्चन, एश्वर्या, बेटी श्वेता बच्चन नंदा के बच्चों संग अमिताभ बच्चन और जया बच्चन।(प्रतिकात्मक तस्वीर)

परिवार में बड़े- बुजुर्गों की एक अलग अहमियत, सम्मान और प्रतिष्ठा होती है। बच्चों की परवरिश की शुरूआत घर के बुजुर्गों से ही होती है। वे परिवार और संस्कारों की नींव तैयार करते हैं और अपने अनुभव बच्चों के साथ सांझा करते हैं। कहना गलत नहीं होगा घर के बुजुर्ग यानी दादा-दादी या नाना-नानी के बिना भी बचपन अधूरा सा लगता है। क्योंकि इनका अनुभव पाकर आप बहुत कुछ सीखते हैं। आइए आज हम आपको प्यार के बारे में ऐसी बताते हैं, जिससे आप भी बहुत कुछ सीख सकते हैं।

क्षमा करना: अकसर सभी के परिवार में नटखट बच्चा या कोई बड़ा गलतियां करने वाला शख्स जरूर होता है। गलतियां सभी से होती हैं, ये कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन कई बार उन गलतियों को कई नजरअंदाज करना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही बात आपको अपने ग्रैंडपैरेंट्स से सीखनी चाहिए जिनके अंदर अपके लिए इतना प्यार और स्नेह होता है, जो बड़ी गलतियों पर भी पलभर में क्षमा कर देते हैं।

सब्र या धैर्य रखना: गुस्सा ऐसी चीज है, जो छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्गों तक सभी को आता है। जाहिर सी बात है ग्रैंडपैरेंट्स को भी आता होगा। लेकिन उनका धैर्य कई बार उस गुस्से को रोक लेता है। इसलिए इंसान में धैर्य या सब्र का होना बेहद जरूरी होता है। यह परिवार को जोड़े रखता है।

कम्युनिकेशन: कम्युनिकेशन यानी किसी भी तरह एक-दूसरे के साथ जुड़े रहना, बातचीत करना। किसी भी रिश्ते में कम्यूनिकेशन बेहद जरूरी होता है। लंबे समय तक बातचीत न करना चिड़चिड़ाहट और रिश्ते टूटने की वजह बन सकता है। इसलिए हमेश एक-दूसरे के टच में रहना ग्रैंडपैरेंट्स से सीखें।

कमिटमेंट होना: शायद ही आपके दादा-दादी के पास ऐसी कोई वजह होगी कि वो एक-दूसरे से अलग हों। उन्होंने एक-दूसरे को लेकर जो वादे, वचन और कमिटमेंट किए उसे हर हालत में निभाते हैं, तभी उनका रिश्ता यहां तक पहुंचा है। आप भी उनसे यह बात बहुत अच्छे से सीख सकते हैं।

दोस्त बनने की कला: अपने भी इस बात पर कई बार गौर किया होगा कि परिवार के बुजुर्ग बहुत जल्द ही बच्चों के साथ बच्चों की तरह पेश आते हैं, दोस्त बनने की अच्छी कला होती है। दरअसल, उन्हें सामने वाले शख्स को समझने का अच्छा-खासा तजूरबा है। वह हर किसी की खुशी के बारे में जानते हैं और पलभर में दोस्त बनकर उसे सोल्व भी कर देते हैं।

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