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प्रेग्नेंसी में तनाव मुक्त रहने के लिए ट्राय कर सकती हैं ये एक्सरसाइज

योग करने से महिलाओं को प्रेग्नेंसी के लिए तैयार होने में मदद मिलती है। योग से शरीर और दिमाग दोनों को काफी फाया पहुंचता है और इससे तनाव से उबरने में मदद मिलती है।

प्रतीकात्मक चित्र

प्रेग्नेंसी के दौरान स्ट्रेस फ्री रहना बेहद जरूरी होता है। इससे मां और शिशु दोनों को फायदा है। प्रेग्नेंट महिला को स्ट्रेस फ्री रहने के लिए अच्छी डाइट फॉलो करनी चाहिए। इसके अलावा कुछ खास एक्सरसाइज के जरिए भी स्ट्रेस फ्री रहने में मदद मिलती है। योग के माध्यम से प्रजनन क्षमता को भी बेहतर बनाया जा सकता है। ऐसा एक्सपर्ट्स का मानना है। योग करने से महिलाओं को प्रेग्नेंसी के लिए तैयार होने में मदद मिलती है। योग से शरीर और दिमाग दोनों को काफी फाया पहुंचता है और इससे तनाव से उबरने में मदद मिलती है। आज हम आपको सांस संबंधी ऐसी एक्सरसाइज के बारे में बता रहे हैं जिनके इस्तेमाल से प्रेग्नेंट महिला को फायदा होगा और स्ट्रेस फ्री रहने में मदद मिलेगी।

भ्रामरी प्राणायाम : इस आसान को सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों समय करना अच्छा होता है। इस आसन को करने के लिए पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। अब अपने दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़कर अपने कानो के पास लाएं और दोनों हाथों के अंगूठों से अपने दोनों कानो को बंद करें। अब दोनों हाथो की तर्जनी उंगली को माथे पर और मध्यमा, अनामिका और कनिष्का उंगली को आंखों के ऊपर रखें। भ्रामरी प्राणायाम के दौरान ध्यान रखें की मुंह बंद रहे और नाक से सांस लें। अब नाक से मधुमक्खी की तरह गुनगुनाएं और सांस बाहर छोड़ें। सांस छोड़ते हुए ओउम का उच्चारण करें। सांस अंदर लेने में करीब 3-5 सेकंड और भ्रमर ध्वनी के साथ बाहर छोड़ने में करीब 15-20 सेकंड का समय लगता है। करीब तीन मिनट में 5-7 बार भ्रामरी प्राणायाम किया जा सकता है।

नाड़ी शोधन प्राणायाम: कमर को सीधा करके बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें। दाएं हाथ के अंगूठे से दायीं नासिका बंद कर पूरी श्वास बाहर निकालें। अब बायीं नासिका से श्वास को भरें, तीसरी अंगुली से बायीं नासिका को भी बंद कर आंतरिक कुंभक करें। जितनी देर स्वाभाविक स्थिति में रोक सकते हैं, रोकें। अब दायां अंगूठा हटाकर श्वास को धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। इसी तरह दूसरी ओर दोहराएं। इस प्राणायम को सुबह के समय 5 से 7 बार करें। इससे सभी प्रकार की नाड़ियों को स्वस्थ लाभ मिलता है साथ ही नेत्र ज्योति बढ़ती है और रक्त संचालन सही रहता है। अनिद्रा रोग में लाभ मिलता है। यह तनाव घटाकर मस्तिष्क को शांत रखता है  और व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का विकास करता है।

 

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