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जानिए किस उम्र में पैरेंट्स को बच्चों के साथ सोना कर देना चाहिए बंद

पैरेंट्स 2 से 3 वर्ष की आयु में बच्चों को अलग सोने की आदत डालनी शुरू करनी चाहिए। क्योंकि इस उम्र में बच्चे अलग सोने की आदत आसानी से सीख सकते हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर। (फोटो सोर्स- dreamstime)

ऐसे बहुत से पैरेंट्स है जो बच्चों को अपने साथ सुलाना पसंद करते हैं और बच्चे भी मां-बाप के साथ सोते हैं। इससे बच्चे और पैरेंट्स दोनों को फायदा होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 3 से 4 साल तक के बच्चों को अपने साथ सुलाने से बच्चों का मनोबल बढ़ता है, आत्मविश्वास में इजाफा होता है और मनोवैज्ञानिक समस्याएं कम होती है। बच्चे पैरेट्स के साथ ओपन माइंडेड हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पैरेंट्स को बच्चों को किस उम्र में अलग बैड पर सुलाना शुरू कर देना चाहिए और क्यों।

दरअसल, एक उम्र तक बच्चों का मां-बाप के साथ एक बैड पर सोना ठीक माना जाता है लेकिन कुछ समय बाद पैरेंट्स बच्चों को अलग बैड दे देना चाहिए। इससे दोनों को फायदा होगा। क्योंकि रिपोर्ट के मुताबिक एक उम्र के बाद पैरेंट्स के साथ सोने से बच्चों को कई तरह की समस्या घेर सकती हैं। जिसमें मोटापे, थकान, कम ऊर्जा, अवसाद, और याददाश्त का कमजोर होने जैसी समस्याएं शामिल हैं। वहीं जो बच्चे अधिक उम्र तक मां-बाप के साथ सोते हैं उनके पैरेट्स में लड़ाई-झगड़े, तनाव और डिवोर्स रेट में इजाफा देखा गया है।

किस उम्र में शुरू करनी चाहिए बच्चों को अलग सुलाने की आदत: पैरेंट्स 2 से 3 वर्ष की आयु में बच्चों को अलग सोने की आदत डालनी शुरू करनी चाहिए। क्योंकि इस उम्र में बच्चे अलग सोने की आदत आसानी से सीख सकते हैं। हालांकि ऐसी बहुत से पैरेंट्स है जो 7 से 8 वर्ष तक के बच्चों अपने साथ सुलाना ही पसंद करते हैं।

किस उम्र में बच्चों के साथ सोना बंद कर दें पैरेंट्स: एक सर्वे के मुताबिक 45 प्रतिशत पैरेंट्स ने 8 से 12 वर्ष से पहले बच्चों को अलग सुलाना शुरू कर दिया। वहीं 13 प्रतिशत पैरेंट्स ने 12 वर्ष तक के बच्चों को सोने के लिए अलग बैड दिया।

 

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