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प्रेग्नेंसी में आयरन की कमी से हो सकता है खतरा, इन उपायों से करें बचाव

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को सामान्य से अधिक आयरन की आवश्यकता होती है ताकि शिशु स्वस्थ रहें। आयरन की कमी के चलते जैस्टेशनल यानी शिशु का उम्र के हिसाब से छोटा होना, समय से पहले शिशु का जन्म होना और कम वजन का शिशु पैदा होना जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को कई चीजों का ध्यान रखना जरूरी होता है। अच्छी डाइट के साथ-साथ रूटीन चेकअप करना होता है। क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में हॉर्मोन्स बदलते हैं। जिससे शारीरिक और मानसिक बदलाव होता है। इन दिनों में प्रेग्नेंट महिलाओं को पौष्टिक आहार के साथ दवाओं की भी जरूरत होती है। इन सभी में आयरन का खास ध्यान रखा जाता है। आइए जानते हैं प्रेग्नेंसी में अधिक आयरन की जरूरत क्यों होती हैं।

आयरन की आवश्यकता क्यों: प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को सामान्य से अधिक आयरन की आवश्यकता होती है ताकि शिशु स्वस्थ रहें। आयरन की कमी के चलते जैस्टेशनल यानी शिशु का उम्र के हिसाब से छोटा होना, समय से पहले शिशु का जन्म होना और कम वजन का शिशु पैदा होना जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।

हीमोग्लोबिन: प्रेग्नेंट महिला को दूसरी और तीसरी तिमाही में आयरन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। क्योंकि इस दौरान आयरन की आवश्यकता हीमोग्लोबिन बनाने के लिए होती है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला प्रोटीन है, जो शरीर के विभिन्न अंगों और ऊतकों में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। डब्ल्यू एच ओ की रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में 35-75 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को हीमोग्लोबिन की कमी होती है। कुछ महिलाओं में गर्भावस्था के शुरुआती दौर में आयरन की अच्छी मात्रा होती है इसलिए उन्हें दूसरी और तीसरी तिमाही में ही डॉक्टर्स आयरन सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं।

एनीमिया: एनीमिया की समस्या से बचने के लिए भी प्रेग्नेसी के दौरान आयरन की जरूरत होती है। क्योंकि आयरन की कमी के चलते एनीमिया होने का खतरा काफी बढ़ जाता है जिससे मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। एनीमिया के चलते महिलाओं में थकान, चिड़चिड़ापन, सांस लेने में कठिनाई, कमजोरी, चक्कर आना, पलकों और नाखूनों का फीका पड़ना, कई बार नाखूनों का चम्मच जैसा आकार हो जाना, मुंह का स्वाद खराब रहना, बालों का झड़ना और ठंड सहन न कर पाना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

आयरन की कमी बचने के उपाय: विटामिन सी आयरन की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है। इसकी पूर्ती के लिए दाल, पालक, मेथी, सरसों, बथुआ, धनिया और पुदीना जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना चाहिए। संतरे के जूस की भरपूर मात्रा पीने से भी आप हीमोग्लोबिन की कमी से बच सकती हैं। इसके अलावा आप कच्चे नारियल के कुछ टुकड़े, मेवे, किशमिश और खजूर का सेवन करें। मूंगफली की पट्टी, रेवड़ी आदि में आयरन की भरपूर मात्रा होती है।

 

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