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जानिए प्रेग्नेंसी में क्यों नहीं करना चाहिए मेकअप और कौन से इंग्रीडिएंट्स पहुंचा सकते हैं नुकसान?

नाखून पॉलिश में टालुइन का इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया जाता है। जिसमें मेथिलबेन्जेन, टोलुओल और एंटीसाल 1 पाया जाता है।

प्रतीकात्मक चित्र

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को अपने खानपान के अलावा शारीरीक और मानसिक स्वास्थ्य पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है। लेकिन इन दिनों में महिलाओं द्वारा किया गया मेकअप मां और बच्चों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। क्योंकि मेकअप में इस्तेमाल होने वाले कॉस्मेटिक्स में कई तरह के रसायन होते हैं। इसलिए प्रेग्नेंट महिलाओं को सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करते वक्त खास सावधानी बरतनी चाहिए। आइए आज हम आपको ऐसे इंग्रीडिएंट्स के बारे में बताते हैं जिनका इस्तेमाल मेकअप प्रोडक्ट्स में होता है और इन से प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को नुकसान पहुंच सकता है।

ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले इंग्रीडिएंट्स-

रासायनिक सनस्क्रीन: रासायनिक सनस्क्रीन के प्रोडक्ट्स में एवोबेनज़ोन, होमोसालेट, ऑक्टेटिलेट, ऑक्टोक्लिलीन, ऑक्सीबेंज़ोन, ऑक्स्टिनॉक्सेट, मिथाइल एंथ्रेनिलेट और ऑक्स्टोक्राइलीन जैसे पदार्थ इस्तेमाल किए जाते हैं जो प्रेग्नेंसी के दौरान हानिकारक साबित हो सकते हैं।

टोलुइन: नाखून पॉलिश में टालुइन का इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया जाता है। जिसमें मेथिलबेन्जेन, टोलुओल और एंटीसाल 1 पाया जाता है।

एल्यूमिनियम क्लोराइड हेक्साहाइड्रेट: यह एंटीपरर्सिपेंट प्रोडक्ट्स में पाया जाता है जिसमें एल्यूमीनियम क्लोराइड हेक्साहाइड्रेट और एल्यूमिनियम क्लोरोहाइड्रेट की मात्रा अधिक पाई जा सकती है।

बीटा हाइड्रॉक्सी एसिड: यह सैलिसिलिक एसिड में पाया जाता है, जो त्वचा रोग संबंधी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें 3-हाइड्रॉक्सीप्रोपोनिक एसिड, ट्रेथोकैनिक एसिड और ट्रोपिक एसिड होता है।

डायथेनोलामाइन (डीईए): इसका इस्तेमाल बालों और बॉडी के प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल किया जाता है। डीईए में डायथेनोलामाइन, ओलेमाइड डीईए, लौरामाइड डीईए और कोकामाइड डीईए से स्पष्ट रहें।

डायहाइड्रोक्साइसेटोन (डीएचए): स्प्रे स्व-टैनर्स में मिलाया में जाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान इस तरह के उत्पादों का इस्तेमाल करने से मां और शिशु दोनों को सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।

इन मेकअप प्रोडक्ट्स से बनाएं दूरी-

शैम्पू: चिकित्सकों का मानना है किशैम्पू में कृत्रिम सुगंध के सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा इसमें सोडियम लॉरियल सल्फेट भी होता है जिसके साइड इफेक्ट भी होते हैं। शैंपू के ज्यादा इस्तेमाल से त्वचा का रंग काला होना, त्वचा में खुजली होना और सिरदर्द की शिकायत हो सकती है।

लिपस्टिक: लिपस्टिक में लेड पाया जाता है। पेय पदार्थ लेते वक्त यह लेड शरीर के अंदर चला जाता है। यह मां के अलावा गर्भ में पल रहे बच्चे को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

बालों को कलर करना: हेअर डाई करने वाले उत्पादों में काफी मात्रा में कृत्रिम रंगों का प्रयोग किया जाता है। चिकित्सकों के मुताबिक इन रसायनों से एलर्जिक रिएक्शन होने का काफी खतरा होता है। इसलिए महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान हेअर डाई करने से बचना चाहिए।

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