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सुडौल और स्वस्थ शरीर के लिए करें गोमुखासन, डायबिटीज में भी होगा फायदा

डायबिटीज से लेकर मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी को मजबूती प्रदान करने के लिए गोमुखासन फायदेमंद होता हैं। इसके नियमित अभ्यास से कमर में दर्द में आराम मिलता है और शरीर सुडौल बनता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

स्वस्थ शरीर के लिए योग बेहद जरूरी होता है। योगासनों के अभ्यास से शरीर लचीला, सुडौल और मजबूत बनता है। इसके अलावा तन, मन और आत्मा की शांति के लिए योग बेहक फायदेमंद होता है। आज हम आपको गोमुखासन के बारे में बता रहे हैं। डायबिटीज से लेकर मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी को मजबूती प्रदान करने के लिए गोमुखासन फायदेमंद होता हैं। इसके नियमित अभ्यास से कमर में दर्द में आराम मिलता है और शरीर सुडौल बनता है। इस आसन को अग्रेंजी में Cow Face Pose कहा जाता है। आइए जानते हैं गोमुखासन के फायदे और अभ्यास का सही तरीका।

ऐसे करें गोमुखासन : इस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर चटाई बिछाएं और दोनों पैर आगे की ओर फैलाकर बैठ जाएं। अब बाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए दाएं कुल्हे की तरफ जमीन पर रखें। इसी तरह दाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए बाएं पैर के ऊपर से लाएं और दाईं एडी को बाएं कुल्हे के पास रखें। अब बाएं हाथ को उठाएं और इसको कोहनी से मोड़ते हुए अपने कमर पर ले जाएं। इसी के साथ दाएं हाथ को कोहनी से नीचे की ओर मोड़ते हुए कमर के पीछे ले जाएं। दोनों हाथों को पीछे से पकड़ें। इस दौरान कमर बिल्कुल सीधी होनी चाहिए। अब आप पूरी तरह गोमुखासन की स्थिति में हैं। इस आसन को पैर और हाथ बदलते हुए दूसरी ओर से दोहराएं। इस आसन का अभ्यास 5 से 10 बार कर सकते हैं।

गोमुखासन के फायदे

– इस आसन के अभ्यास से अस्थमा के रोगियों को फायदा होता है।
– कमर और बांहों की मासपेशियों को मजबूत बनाने के लिए गोमुखासन फायदेमंद होता है।
– जो लोग कुल्हे के दर्द से परेशान रहते हैं उन्हें नियमित रूप से गोमुखासन का अभ्यास करना चाहिए।
– गोमुखासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और सीधा रखने में लाभकारी होता है।
– बवासीर की समस्या में इस आसन का अभ्यास उपयोगी होता है। के लिए बहुत ही उपयोगी योगाभ्यास माना जाता है।
– कंधे का दर्द हो या गर्दन का इस आसन से दोनों में आराम में मिलता है। इसके अलावा सर्वाइकल की स्थिति में भी यह आसन लाभकारी होता है।
– गोमुखासन के अभ्यास से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है, जिससे डायबिटीज के रोगियों को फायदा होता है।
– यह आसन करने से शरीर सुडौल और लचकदार बनता है।

नोट : खूनी बवासीर, हाथ-पैर में ज्यादा दर्द, रीढ़ की हड्डी की गंभीर चोट और घुटनों के दर्द में गोमुखासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

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