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हाई ब्लड प्रेशर और अस्थमा जैसे रोगों के लिए लाभदायक अधोमुख श्वानासन है, जानिए विधि और फायदे

हाई ब्लड प्रेशन, अस्थमा, फ्लैट पैर, साएटिका, साइनसाइटिस जैसी समस्याओं के लिए भी अधोमुख श्वानासन लाभदायक होता है।

इस आसन के करने से शरीर ललीचा हो जाता हैं और बदन में दर्द नहीं रहता।(फोटो सोर्स- यूट्यूब)

योग करना शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। नियमित रूप से योग करने से एक मजबूत एवं लचीला शरीर, सुंदर चमकती त्वचा, शांतिपूर्ण मन और अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है। वैसे तो योग ऐसे बहुत से आसन हैं जिनके अभ्यास से कई तरह के फायदे होते हैं लेकिन आज हम आपको अधोमुख श्वानासन के फायदे और करने के तरीके के बारे में बता रहे हैं। दरअसल, अधोमुख श्वानासन एक संस्कृत शब्द है जहां अधो का मतलब आगे, मुख यानी चेहरा और श्वान का मतलब कुत्ता होता है। अधोमुख श्वानासन यह बाजुओं और कंधों के लिए बहुत लाभदायक है। साथ ही पैरों को सीधा रखने में मदद करता है। आइए बताते हैं अधोमुख श्वानासन के फायदे और करने का तरीका।

अधोमुख श्वानासन करने का तरीका इस प्रकार है: सबसे पहले जमीन पर एकदम सीधे खड़े हो जाएं और उसके बाद दोनों हाथों को आगे करते हुए नीचे जमीन की ओर झुक जाएं। झुकते समय आपके घुटने सीधे होने चाहिए। आपके दोनों हाथ कंधे के बराबर नहीं बल्कि इससे थोड़ा सा पहले झुका होना चाहिए। अब अपने हाथों की हथेलियों को झुकी हुई अवस्था में आगे की ओर फैलाएं और उंगलियां सीधी रखें। सांस छोड़ें और अपने घुटनों को अधोमुख श्वानासन मुद्रा के लिए हल्का सा धनुष के आकार में मोड़ें। साथ-साथ एड़ियों को जमीन से ऊपर उठाएं। इसके बाद हाथों को पूरी तरह जमीन पर कंधों के नीचे से आगे की ओर फैलाए रखें, लेकिन उंगलियां जमीन पर फैली होनी चाहिए। अब अपने घुटनों को जमीन पर थोड़ा और झुकाएं और कूल्हों को जितना संभव हो ऊपर उठाएं। ध्यान रखें कि सिर हल्का सा जमीन की ओर झुका होना चाहिए और पीठ के बराबर होना चाहिए। यह अवस्था अधोमुख श्वानासन की है।

अधोमुख श्वानासन के लाभ:

– अधोमुख श्वानासन के रोजाना अभ्यास से सिरदर्द, अनिद्रा, पीठ दर्द और थकान से राहत मिलती है।
– इस आसन के करने से शरीर ललीचा हो जाता हैं और बदन में दर्द नहीं रहता।
– कंधों, हैमस्ट्रिंग, पिंडली और बाजुओं में खिचाव लाता है, इससे हाथ और पैर मजबूत होते हैं।
– अधोमुख श्वानासन पेट के अंगों को उत्तेजित करता है और पाचन में सुधार लाता है।
– एंड़ियों, पिंडलियों की नसों और मांसपेशियों को फैलाता है।
– इससे ना केवल रीढ़ की हड्डियों में आराम मिलता है बल्कि पीठ के नीचले, मध्य और उपरी भाग में हो रहे दर्द से आराम देता है।
– अधोमुख श्वानासन रजोनिवृत्ति के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है।
– हाई ब्लड प्रेशन, अस्थमा, फ्लैट पैर, साएटिका, साइनसाइटिस जैसी समस्याओं के लिए भी अधोमुख श्वानासन लाभदायक होता है।
– यह आसन करते समय हाथ और पैर पर भार बढ़ता है इसलिए इसे करने से हड्डी की कमजोरी दूर होती है।
– अधोमुख श्वानासन के नियमित अभ्यास से पाचन की समस्या में सुधार लाया जा सकता है।

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