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प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ जाता है थायरॉयड की बीमारी का खतरा, ऐसे रखें ख्याल

थायरॉयड के कारण बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर बहुत प्रभाव पड़ता है, बच्चा असमान्य भी हो सकता है। बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में भी समस्या आ सकती हैं।

चित्र का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को खुद का खास ख्याल रखना होता है। प्रेगनेंट महिला को इन दिनों कई तरह की समस्याओं के होने का खतरा होता है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला और शिशु को थायरॉयड होने का खतरा बढ़ जाता है। दरअसल, थायरॉयड एक गले का रोग है, जो हार्मोन्स के असंतुलन की वजह से होता है। प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनों में थायरॉयड होने का खतरा ज्यादा होता है। इस वजह से डॉक्टर्स भी इन महीनों में प्रेगनेंट महिला को थायरॉयड जांच की सलाह देते हैं। इस समस्या को शुरुआती दिनों में कंट्रोल किया जा सकता है। आइए जानते हैं प्रेगनेंसी के दौरान कैसे रखें ख्याल-

थायरॉयड क्या है : गले में एक थायरॉयड ग्रंथि होती है, जो दो तरह के हॉर्मोन टी3 और टी4 बनाती हैं। यह हमारे शरीर के लिए सबसे जरुरी ग्रंथि में से एक हैं। थायरॉयड ग्रंथि शरीर में कई चीजों को नियंत्रित करती है जैसे की नींद, पाचन तंत्र, मेटाबोलिस्म, चयापचय, लिवर की कार्यप्रणाली, शरीर का तापमान नियंत्रण आदि। आसान भाषा में इसे शरीर का सेंट्रल कंट्रोलर कहा जा सकता है। मुख्य रूप से दो प्रकार के थायरॉयड रोग होते हैं, हाइपोथायरायडिज्म और हयपरथायरोडिस्म।

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थायरॉयड रोग के लक्षण : हाइपोथायरायडिज्म में थायरॉयड हॉर्मोन कम निर्माण होता हैं। इस वजह से थायरॉयड हॉर्मोन बनाने का कार्य करनेवाला तत्व यानी टीएसएच की मात्रा बढ़ जाती है। लक्ष्ण- वजन बढ़ना, भूक कम लगना, हात-पैर में सूजन, सुस्ती, ज्यादा ठण्ड लगना, पीरियड्स कम आना, याददाश्त कम होना और बाल गिरना। वहीं हाइपरथायरायडिज्म में टीएसएच कम होता हैं। लक्षण- वजन कम होना, ज्यादा भूक लगना, डिप्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर, पसीना ज्यादा आना, नींद में कमी और गले में सूजन।

प्रेगनेंसी के दौरान : प्रेगनेंट महिलाओं को समय-समय पर थायरॉयड की जांच करना की सलाह दी जाती है। महिलाओं को थायरॉयड का पता लगते ही तुरंत इलाज शुरू कर देना चाहिए। नियमित रूप से दवाओं का सेवन करना चाहिए जिससे होने वाले बच्चे पर थायरॉयड का कोई खास प्रभाव न पड़े और गर्भवती महिला भी सुरक्षित रहें। थायरॉयड के कारण बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर बहुत प्रभाव पड़ता है, बच्चा असमान्य भी हो सकता है। बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में भी समस्या आ सकती हैं। थायरॉयड पीडि़त प्रेग्नेंट महिलाओं के बच्चों को यानी नवजात शिशुओं का नियोनेटल हाइपोथायरॉयड की समस्या हो सकती हैं।

 

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