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Kargil Vijay Diwas 2020 Speech, Essay, Quotes: कारगिल विजय दिवस के लिए यहां से तैयार करें स्पीच

Kargil Vijay Diwas 2020 Date, Theme, Speech, Essay, Quotes: कारगिल विजय दिवस पर भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सेना के तमाम अधिकरियों समेत सभी भारतीय सेना के शौर्य को सलाम करते हैं और उन्हें नमन करते हैं।

kargil vijay diwas speech in hindi, kargil vijay diwas bhashan, happy kargil vijay diwas 2020Kargil Vijay Diwas 2020: कारगिल दिवस स्पीच- (Representative image)

Kargil Vijay Diwas 2020 Date, Theme, Speech, Essay, Quotes: भारत के शौर्य का प्रतीक ‘कारगिल विजय दिवस’ हर साल 26 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन हम साल 1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को धूल चटाते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अपने वीर सपूतों को याद करतेे हैं। इस साल ऑपरेशन विजय की 21वीं वर्षगांठ है। कारगिल विजय दिवस पर भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सेना के तमाम अधिकारियों समेत देशवासी तीनों सेनाओं के शौर्य को सलाम करते हैं और उन्हें नमन करते हैं।

आपको बता दें कि साल 1999 में पाकिस्तान से 60 दिनों तक चले युद्ध में भारतीय सेना के कई जांबाज शहीद हुए थे लेकिन उन्होंने अपने शौर्य के बूते पाकिस्तान को धूल चटा दी थी। इस युद्ध में भारत ने विजय पताका लहराई थी।

स्पीच 1: कारगिल युद्ध में जान गंवाने वाले 527 वीर सैनिकों की याद में हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस पर भारत भर में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय दिया था। कारगिल में विजय भारत के संकल्पों की जीत थी, भारत की शक्ति और धैर्य की जीत थी, भारत की गरिमा और अनुशासन की जीत थी। यह विजय हर भारतीय की उम्मीदों और कर्तव्यपरायणता की जीत थी।

युद्ध सरकारों द्वारा नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र द्वारा लड़े जाते हैं। सरकारें आती हैं और जाती हैं; लेकिन जो लोग देश के लिए जीने या मरने का सोचते हैं, वे अमर हैं। सैनिक न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए और सुरक्षित भविष्य के लिए अपने जीवन का बलिदान देते हैं। सैनिक जीवन और मृत्यु के बीच अंतर नहीं करते हैं। उनके लिए, कर्तव्य सर्वोच्च है। राष्ट्र की ताकत से जुड़े इन सैनिकों का जीवन सरकारों के कार्यकाल से जुड़ा नहीं है। कोई भी शासक और प्रशासक हो सकता है, लेकिन हर भारतीय को अपने बहादुर सैनिकों पर गर्व करने का अधिकार है।

Live Blog

Highlights

    08:50 (IST)26 Jul 2020
    भाषण या निबंध लिखते समय इन बातों का रखें ध्यान...

    कारगिल विजय दिवस के लिए भाषण या निबंध तैयार करने से पहले अच्छे से इस घटनाक्रम के बारे में पढ़ें। अधिक से अधिक जानकारियां जुटाएं और कोशिश करें कि आपने जो मैटर निकाला हो, वह आधिकारिक स्रोतों के जरिए मिला हो। अपने भाषण और निबंध को और प्रभावशाली बनाने के लिए वीर रस से जुड़ी कविता और शेर-शायरी उसमें शामिल करें। ये काम आप शुरुआत के साथ अंत में भी कर सकते हैं, जबकि निबंध लंबा होने पर उसके बीच में भी इनका जिक्र किया जा सकता है। निबंध और भाषण में घटनाक्रम का बखान करने के दौरान वाक्य सरल, सहज और छोटे रखें, ताकि लोग पढ़ने और सुनने के दौरान ऊबे नहीं। भाषण देने या फिर निबंध लिखने से पहले अच्छे से करगिल के मैटर को पढ़ लें। कोशिश करें कि पूरे भाषण और निबंध को कुछ प्वॉइंटर्स में रखें और उन्हीं के अनुसार आगे बढ़ें। कारगिल विजय दिवस पर जाने-माने राजनेताओं, जवानों, वरिष्ठ पत्रकारों या फिर युद्ध के दौरान शहीदों के परिजन से जुड़ा बयान और उनकी कही हुई अहम बातों को भी आप अपने भाषण या निबंध में जोड़ सकते हैं।

    08:20 (IST)26 Jul 2020
    टाइगर पहाड़ी पर हुआ था युद्ध...

    भारत और पाकिस्तान की सरहदों पर स्थित कारगिल दुनिया के सबसे ऊंचे और खराब मौसम परिस्थितियों वाला युद्ध मैदान है। 1999 में हुआ युद्ध भारत और पाकिस्तान के टाइगर नामक पहाड़ी पर हुआ था जोकि श्रीनगर से 205 किलोमीटर की दूरी पर है। टाइगर नमक पहाड़ी पर मौसम बहुत ठंडा होता है जोकि रात में -45 डिग्री तक पहुँच जाता है और इस क्षेत्र में रातें बहुत लम्बी होती है।

    07:49 (IST)26 Jul 2020
    वीर शहीदों को किया जाता है याद...

    26 जुलाई को कारगिल दिवस मनाया जाता है। इस दिन हमारे देश के जवानों ने पाकिस्तान से भारत को बचाने में अपने जान गवां दी थी। यही वो दिन है जब भारतीय जवानों ने कारगिल पर विजय प्राप्त की थी। भारतीय जवानों से लेकर आम इंसान तक के लिए यह दिन बेहद खास और अहम है। इसलिए इस दिन सभी उन जवानों को याद करते हैं जिन्होंने इस युद्ध में जान गंवाई थी और उन्हें पूरी श्रद्धा के साथ श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

    06:34 (IST)26 Jul 2020
    पाकिस्तान ने तीन बार हमला किया और तीनों बार हारा, लेकिन फिर भी लड़ना चाहता है

    पाकिस्तान भारत पर तीन बार हमला कर चुका है। तीनों बार वह पराजित हुआ, लेकिन अपने नापाक हरकतों से वह बाज नहीं आता है। इसके चलते पाकिस्तान आर्थिक रूप से काफी कमजोर हो चुका है और चीन समेत दूसरे देशों की मदद से चल रहा है। इससे वहां के लोगों में गरीबी बढ़ रही है। 

    05:00 (IST)26 Jul 2020
    लाहौर समझौते को तोड़कर पाकिस्तान ने किया था कारगिल पर हमला

    पाकिस्तान ने लाहौर समझौते के तीन महीने बाद ही भारत के खिलाफ धोखेबाजी से हमला कर दिया। लेकिन भारत के वीर जवानों ने पाकिस्तान की कुत्सित चाल को नाकाम कर दिया। इसके बाद भी पाकिस्तान अपने रवैए से बाज नहीं आ रहा है।

    03:46 (IST)26 Jul 2020
    1999 में पाकिस्तानी फौज और आतंकी नियंत्रण रेखा के भीतर घुस आए थे

    1999 के मई महीने के शुरू में तत्कालीन जम्मू और कश्मीर राज्य के कारगिल जिले में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी फौज और उनके आतंकी नियंत्रण रेखा (Line Of Control) को पार कर भारतीय सीमा में घुस आए और सामरिक महत्व के कई अहम स्थानों टाइगर हिल्स और द्रास सेक्टर की चोटियाें पर कब्जा जमा लिया।

    22:01 (IST)25 Jul 2020
    इस लिए दिया गया कारगिल विजय दिवस का नाम

    ऑपरेशन विजय की सफलता के नाम पर कारगिल विजय दिवस का नाम दिया गया। 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने सफलतापूर्वक प्रमुख चौकी की कमान संभाली, जो पाकिस्तानी घुसपैठियों द्वारा भारत से छीन ली गयी थी।

    21:24 (IST)25 Jul 2020
    60 से भी अधिक दिनों तक चला था युद्ध

    कारगिल युद्ध 60 से भी अधिक दिनों के लिए लड़ा गया था, यह  26 जुलाई को खत्म हो गया और परिणामस्वरूप दोनों पक्षों, भारत और पाकिस्तान के जीवन में नुकसान के बाद, हमें कारगिल की संपत्ति फिर से हासिल हुई।

    20:12 (IST)25 Jul 2020
    पाकिस्तान के 3 हजार से ज्यादा सैनिक मारे गए थे

    कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के 3 हजार से ज्यादा सैनिक मारे गए थे। कारगिल युद्ध से पहले पाकिस्तानी जनरल परवेज मुशर्रफ ने भारतीय सीमा (LOC) में आकर रात गुजारी थी।

    19:34 (IST)25 Jul 2020
    ऑपरेशन विजय नाम से 2,00,000 सैनिकों की हुई थी तैनाती

    1998-99 में सर्दियों के दौरान पाकिस्तान ने गुपचुप तरीके से सियाचीन ग्लेशियर की फ़तेह के इरादे से अपनी फौजें भेजनी शुरू कर दी। जब भारत द्वारा इसके बारे में पूछा गया तो पाकिस्तान ने कहा की यह उनकी फ़ौज नहीं बल्कि मुजाहिद्दीन हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाकर कश्मीर के मुद्दे को सुलझाना चाहता था। भारतीय सेना को अहसास हो गया कि हमले की योजना बहुत बड़े पैमाने पर किया गया है। इसके बाद भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय नाम से 2,00,000 सैनिकों को भेजा। 

    18:54 (IST)25 Jul 2020
    युद्ध के लिए पाकिस्तान ने कश्मीरी आतंकवादियों को ठहराया था जिम्मेदार

    कारगिल युद्ध के खत्म होने के बाद पाकिस्तान ने इसके लिए कश्मीरी आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि ये बात जगजाहिर थी कि पाकिस्तान इस पूरी लड़ाई में लिप्त था। जिसे बाद में नवाज शरीफ और शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से पाक सेना की भूमिका को स्वीकार किया था। 

    18:12 (IST)25 Jul 2020
    जवानों के बलिदान से कारगिल विजय की लिखी गई कहानी

    कारगिल युद्ध में लगभग 550 से अधिक वीर योद्धा शहीद व 1400 से ज्यादा घायल हुए थे। अधिकांश शहीद होने वाले जवान अपने जीवन के 30 वसंत भी नही देख पाए थे। इन शहीदों ने भारतीय सेना की शौर्य व बलिदान की उस सर्वोच्च परम्परा का निर्वाह किया, जिसकी सौगन्ध हर सिपाही तिरंगे के समक्ष लेता है।

    15:40 (IST)25 Jul 2020
    जवानों के पराक्रम और बलान का करें जिक्र कारगिल के वीरों में कैप्टन बतरा का नाम अहम

    करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानियों को बुरी तरह खदेड़ने वाले भारत मां के 10 वीर सपूतों में कैप्टन विक्रम बतरा का नाम भी शामिल है। इन्होंने ही कारगिल के प्वॉइंट 4875 पर तिरंगा फहराते हुए 'दिल मांगे मोर' कहा था। कैप्टन उसी जगह पर वीर गति को प्राप्त हुए। वह 13वीं जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स में थे। उन्होंने तोलोलिंग पर पाकिस्तानियों द्वारा बनाए गए बंकरों पर न केवल कब्जा किया था, बल्कि अपने सैनिकों को बचाने के लिए सात जुलाई 1999 को पाक सैनिकों से सीधे जा भिड़े थे। उन्होंने इसके बाद वहां तिरंगा फहराया था, जिसकी वजह से आज भी वह चोटी बतरा टॉप नाम से मशहूर है।

    15:18 (IST)25 Jul 2020
    हिमालय की ठंड में कम जरूरतों के साथ लड़े भारतीय सैनिक

    जनरल वेद प्रकाश मलिक ने बताया था कि कारगिल युद्ध में हमारे जवानों के पास ऊंची पहाड़ियों पर लड़ने के लिए तकनीकी रूप से बेहतर हथियार नहीं थे। इसके अलावा बेहद ऊंचाई पर लड़ रहे जवानों के सामने ठंड से बचने के लिए बेहतर कपड़े और जैकेट नहीं थे। हालांकि, उन्होंने बताया था कि 1998 के दौरान परणाणु परीक्षण के बाद भारत पर कई तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगा दिए गए थे। जिसकी बदौलत अत्याधुनिक सैन्य साजो सामान भारत नहीं खरीद पाया था। मलिक ने तो यह भी कहा था कि भारतीय सेना के सामने राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को मानने की मजबूरी थी। लिहाजा, सेना ने लाइन ऑफ कंट्रोल (LOC) को क्रॉस नहीं किया।

    14:44 (IST)25 Jul 2020
    करगिल युद्ध में भारत के 550 जवान शहीद हुए और 1400 जवान घायल हो हुए थे

    जानकारी के लिए बता दें करगिल युद्ध में भारत के 550 जवान शहीद हुए और 1400 जवान घायल हो हुए थे। बोफोर्स तोपें करगिल लड़ाई में सेना के खूब काम आई थी।

    14:42 (IST)25 Jul 2020
    भारतीय सेना को करना पड़ा था मुश्किलों का सामना

    करगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना को कई बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। पाकिस्तानी सैनिक ऊंची पहाड़ियों पर थे जबकि हमारे सैनिकों को गहरी खाई में रहकर उनसे मुकाबला करना था। भारतीय जवानों को आड़ लेकर या रात में चढ़ाई कर ऊपर पहुंचना पड़ रहा था जोकि बहुत जोखिमपूर्ण था।

    14:42 (IST)25 Jul 2020
    Kargil Vijay Diwas 2020 Speech: यहां से लें ट्रेंडिंग स्पीच

    पाकिस्तानी सैनिकों ने शुरू में नियंत्रण रेखा पार की जिसे लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल कहा जाता है और भारत नियंत्रित क्षेत्र में प्रवेश किया। बाद में स्थानीय चरवाहों ने लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल पार करने वाले संदिग्ध लोगों के बारे में सेना को सूचित किया। नज़र रखने के लिए, भारतीय सेना ने अतिरिक्त सैनिकों को लद्दाख से कारगिल क्षेत्र में भेजा और उन्हें पता चला कि पाकिस्तानी सेना एलओसी पार कर भारत के नियंत्रण वाले क्षेत्र में घुस गई है। जमीन पर दावा वापस पाने के लिए दोनों सैनिकों ने गोलीबारी शुरू कर दी। बाद में भारतीय वायु सेना घाटी से सभी घुसपैठियों को साफ करते हुए युद्ध में शामिल हुई।

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