करीना कपूर खान हिंदी सिनेमा की सफल और बेहतरीन अभिनेत्रइयों में से एक हैं। अभिनेत्री ने एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया है। अभिनेत्री ने एक बार बताया था कि वह हमेशा से ही अपने काम को लेकर बहुत महत्वाकांक्षी रही हैं और सफलता पाने की उनमें काफी चाहत थी। ऐसे में अगर उन्हें अपनी कम उम्र वाली खुद को कोई सलाह देनी हो, तो वह कहेंगी कि मेहनत करती रहो और थोड़ा शांत रहो।

सफलता के लिए क्या करना चाहिए

करीना कपूर खान का कहना है कि, “मुझे लगता है कि मैं बहुत उतावली थी। क्योंकि मैंने लोलो (बड़ी बहन करिश्मा कपूर) के साथ बहुत कुछ देखा था। मैंने उनकी फ्लॉप फिल्में, हिट फिल्में, सफलता और एक बड़ा स्टार बनना सब देखा था। इसलिए मैं भी उसी दौड़ में शामिल हो गई थी। मेरे अंदर दुनिया को यह साबित करने की चाहत थी कि मैं सबसे बेहतर हूं” इसके आगे वह कहती हैं कि वह उस समय अपने काम को अलग तरीके से शायद नहीं कर सकती थीं, लेकिन उन्हें लगता है कि उन्हें अपनी कम उम्र वाली खुद से कहना चाहिए था कि “मेहनत करो और शांत रहो। जो कुछ तुम्हारे लिए है, वह तुम्हारे पास आ ही रहा है। शायद मुझे उस समय इतनी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए थी”। करीना कपूर ने यह बात साल 2024 में ट्विक इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में कही थी, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर फिर से काफी चर्चा में है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

उनकी इन बातों पर इंडियन एक्सप्रेस ने मनोचिकित्सक और रिलेशनशिप ब्रेकथ्रू कोच डेल्ना राजेश से ऐसी महत्वाकांक्षा और सफलता पाने की चाह के बारे में बता की। डेल्ना राजेश कहती हैं कि, “यह हमें मेहनत करने की दिशा देती है, हमारी सहज सीमाओं से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है और हमें अपनी उन क्षमताओं को पहचानने में मदद करती है, जिनका इस्तेमाल शायद हम कभी नहीं कर पाते। असल सवाल यह नहीं है कि हम कितने महत्वाकांक्षी हैं, बल्कि यह है कि हमारी महत्वाकांक्षा की वजह क्या है।”

करीना कपूर का अपनी बहन के करियर को करीब से देखने का अनुभव महत्वाकांक्षा पर एक और बड़े प्रभाव की ओर इशारा करता है। इसे हम अपने ‘रेफरेंस ग्रुप’ यानी आसपास के लोगों से खुद की तुलना के रूप में समझ सकते हैं।

दूसरों से तुलना कब करना चाहिए

डेल्ना बताती हैं कि, “हम आमतौर पर अपनी तरक्की का आकलन अकेले नहीं करते। हम खुद की तुलना अपने भाई-बहनों, सहपाठियों, सहकर्मियों, पड़ोसियों और अब तेजी से सोशल मीडिया पर मौजूद हजारों लोगों से करने लगे हैं।” दूसरों से तुलना करना तब फायदेमंद हो सकता है, जब उससे हमें कुछ सीखने या प्रेरणा लेने का मौका मिले। लेकिन यह तुलना तब मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाने लगती है, जब किसी दूसरे की सफलता या तरक्की हमें यह महसूस कराने लगे कि हम पीछे रह गए हैं।

लोग मेहनत नहीं सफलता देखते हैं

किसी दूसरे व्यक्ति की सफलता की समय-सीमा धीरे-धीरे हमारी अपनी डेडलाइन बन जाती है। इस पर डेल्ना कहती हैं, “सोशल मीडिया ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है, क्योंकि हम लगातार लोगों की सफलता और उपलब्धियां देखते रहते हैं, लेकिन उस सफलता तक पहुंचने में लगा पूरा समय और मेहनत नहीं देख पाते। हम प्रमोशन देखते हैं, लेकिन इससे पहले के 10 साल नहीं। हम बदला हुआ शरीर देखते हैं, लेकिन हर सुबह की गई मेहनत और अनुशासन नहीं देखते। हम सफल कंपनी देखते हैं, लेकिन उसके पीछे किए गए असफल प्रयोग नहीं देखते। हम खुशहाल तस्वीर देखते हैं, लेकिन उस रिश्ते के पीछे की असल जटिलताओं को नहीं देखते”।

शांत रहकर महत्वाकांक्षी होना भी उतना ही जरूरी है

डेल्ना के अनुसार, शांत महत्वाकांक्षा का मतलब कम महत्वाकांक्षी होना नहीं है। शांत रहकर लक्ष्य हासिल करने की कोशिश करने वाला व्यक्ति भी पूरी तैयारी करता है, अनुशासन बनाए रखता है, दूसरों की सलाह और प्रतिक्रिया स्वीकार करता है, सोच-समझकर जोखिम उठाता है और लगातार खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करता है। इसके आगे वह कहती हैं कि, “लेकिन ऐसा व्यक्ति हर देरी को असफलता नहीं मानता और न ही हर अस्वीकृति को अपनी कमी का सबूत समझता है। वह समझता है कि जब कोई कदम वास्तव में जरूरी हो, तब जल्दी करना ठीक है। लेकिन हर समय जल्दबाजी में जीने से हमारी सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, रिश्तों पर असर पड़ सकता है और सफलता मिलने के बाद भी हम उसका आनंद नहीं ले पाते।” इसलिए एक बेहतर तरीका यह है कि जो चीजें आपके नियंत्रण में हैं, उनमें पूरी मेहनत करें, लेकिन उन चीजों को नियंत्रित करने की कोशिश न करें जो आपके हाथ में नहीं हैं।

इन दो चीजों के बीच अंतर समझना जरूरी

डेल्ना समझाते हुए बताती हैं कि, “आपकी तैयारी आपके हाथ में है। आपका अनुशासन आपके हाथ में है। आपकी ईमानदारी, सीखने की इच्छा, निरंतरता और मुश्किल परिस्थितियों में आपका व्यवहार आपके नियंत्रण में है। लेकिन सही समय, मौके, आर्थिक परिस्थितियां, किसी दूसरे व्यक्ति का फैसला और भविष्य में होने वाली कई चीजें पूरी तरह आपके नियंत्रण में नहीं होतीं। जब तक जिम्मेदारी और नियंत्रण के बीच का अंतर समझना शुरू करते हैं, तब हमारी मानसिक मजबूती बढ़ती है।” शायद यही करीना कपूर की अपनी कम उम्र वाली खुद को दी गई सलाह की सबसे बड़ी सीख है।

हत्वाकांक्षा और सुकून में किसे चुनें

डेल्ना ने कहा, “बेशक मेहनत करें। बड़े सपने देखें। जब कोई आपको न देख रहा हो, तब भी अपनी तैयारी करते रहें। जब मन न करे, तब भी अनुशासन बनाए रखें। जो मौके मिलें, उन्हें अपनाएं और जब मौके न मिलें तो नए मौके बनाने की कोशिश करें। लेकिन इतना शांत रहना भी सीखें कि जिस जिंदगी को बनाने के लिए आप इतनी मेहनत कर रहे हैं, उसका आनंद ले सकें। आपको महत्वाकांक्षा और सुकून में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है।”

डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और इंडियन एक्सप्रेस द्वारा बातचीत किए गए विशेषज्ञों से मिली जानकारी पर आधारित है।