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राष्ट्रीय चिन्ह को लेकर जवाहर लाल नेहरू ने दिया था आइडिया, जानें- अशोक स्तंभ का गौरवशाली इतिहास और इससे जुड़े रोचक तथ्य

सम्राट अशोक के शासन काल में बने चार सिंहों को दिखाने वाला ये स्तंभ आखिर कैसे देश का राष्ट्रीय प्रतीक बन गया? आइए जानते हैं कुछ रोचक तथ्य-

राष्ट्रीय चिन्ह को लेकर जवाहर लाल नेहरू ने दिया था आइडिया, जानें- अशोक स्तंभ का गौरवशाली इतिहास और इससे जुड़े रोचक तथ्य
अशोक ने अपने धम्म के प्रचार के लिए अपने पूरे साम्राज्य में स्तंभों और शिलाओं पर संदेशों लिखवाए थे। (Photo Credit – Indian Government Website)

राष्ट्रीय चिन्ह किसी भी देश की संस्कृति और स्वतंत्रता का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। जिससे उस देश की पहचान व छवि जुड़ी होती हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं भारत के कई राष्ट्रीय प्रतीक हैं जो भारत की गरिमा को दर्शाते हैं। इन्हीं राष्ट्रीय प्रतीक में से एक है अशोक स्तंभ जो कि देश के आत्मविश्वास और संवैधानिक मूल्यों की नींव का प्रतीक माना जाता है।

बता दें कि आजादी के बाद सारनाथ के अशोक स्तंभ को ही देश का राष्ट्रीय प्रतीक चुना गया। लेकिन अशोक स्तंभ से जुड़े इतिहास और तथ्यों को बहुत कम लोग जानते हैं, तो आइए आजादी के इस अमृत महोत्सव के मौके पर जानते हैं राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ का इतिहास और कुछ रोचक तथ्य-

अशोक स्तंभ से जुड़ा इतिहास

26 जनवरी 1950 को भारत का सविंधान लागू किया गया और इसी दिन अशोक स्तंभ को राष्ट्रीय चिन्ह के रूप में स्वीकार किया गया। लेकिन अशोक स्तंभ का इतिहास यहीं पर खत्म नहीं होता है बल्कि इसका इतिहास मौर्य वंश के शासनकाल से जुड़ा हुआ है। अशोक स्तंभ का निर्माण सम्राट अशोक द्वारा उत्तर प्रदेश के सारनाथ में करवाया गया। लेकिन यह भी जानना जरूरी है आखिर अशोक स्तंभ के निर्माण के लिए सारनाथ को ही क्यों चुना गया। दरअसल सारनाथ वह जगह है जहां पर महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसलिए इस जगह पर सम्राट अशोक ने भारत के राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ का निर्माण करवाया था।

वहीं बात अगर इस स्तंभ के आकार और डिजाइन की जाए तो इसके ऊपरी हिस्से में 4 एशियाई शेर हैं और जिनका मुख चारों दिशाओं की ओर है। अशोक स्तंभ के यह चारों शेर शक्ति, साहस, आत्मविश्वास और गौरव को दर्शाते हैं। इसके निचले हिस्से में घोड़ा और बैल भी हैं और जिनके बीच में धर्म चक्र है।

इसके अलावा आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के एक दस्तावेज के मुताबिक इसकी ऊंचाई 7 फीट 6 इंच है वहीं दूसरी ओर नये संसद की छत पर जो अशोक स्तंभ स्थापित किया गया है उसकी ऊंचाई 6.5 मीटर यानी कि 21 फीट के करीब है।

राष्ट्रीय चिन्ह को लेकर संविधान सभा में नेहरू ने रखा था प्रस्ताव

जब भारत आजाद होने वाला था। इससे पहले 22 जुलाई 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा के सामने एक प्रस्ताव रखा था कि देश के नए झंडे और राष्ट्रीय प्रतीक के लिए एक डिजाइन बनाया जाना चाहिए। नेहरू ने यह भी सुझाव दिया कि बेहतर है कि हम मौर्य सम्राट अशोक के स्वर्णकाल को इन्हीं बातों में रखें। आधुनिक भारत को इस समृद्ध और उज्ज्वल अतीत के आदर्शों और मूल्यों को सामने लाना चाहिए।

नेहरू ने संविधान सभा में इस बारे में आगे कहा, “चूंकि मैंने सम्राट अशोक का उल्लेख किया है, मैं यह कहना चाहूंगा कि सम्राट अशोक का काल भारतीय इतिहास में एक ऐसा काल था जिसे ध्यान में रखा जाना चाहिए, जिसमें हमने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। यह सिर्फ एक राष्ट्रीय काल नहीं था बल्कि एक समय था जब हमने भारतीय राजदूतों को दूर देशों में भेजा और वे साम्राज्य विस्तार के लिए नहीं, शांति, संस्कृति और सद्भाव के प्रतीक बनकर गए।

अशोक स्तंभ से जुड़े कुछ तथ्य

  • अशोक स्तंभ में बने चारों शेरों को चतुर्मुख भी कहा जाता है। दरअसल मौर्य शासन के ये शेर चक्रवर्ती सम्राट की शक्ति का प्रदर्शन करते थे। भारत में जब इसे राष्ट्रीय प्रतीक बनाया गया तो इसके माध्यम से सामाजिक न्याय और समानता की भी बात की गई।
  • अशोक स्तंभ के चिन्ह को प्रयोग में लाने का अधिकार केवल प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल, उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री व अन्य ऊंचे पद वाले सरकारी अधिकारियों के पास है।
  • अगर कोई व्यक्ति गैर संवैधानिक रूप से इस चिन्ह का उपयोग करता है तो उस व्यक्ति को 2 साल की जेल व 2000 का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

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