पिता को विदेश में छोड़कर अकेले भारत लौट आई थीं इंदिरा गांधी, पति फिरोज गांधी थे वजह

इंदिरा गांधी साल 1958 में पिता पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ भूटान जा रही थीं। इस दौरान फिरोज गांधी को हार्ट अटैक आ गया था। इसके बाद इंदिरा तुरंत वापस लौट आई थीं।

Indira Gandhi, Feroze Gandhi
इंदिरा गांधी के साथ फिरोज गांधी (Photo- Indian Express)

इंदिरा गांधी ने फिरोज गांधी से शादी करने का फैसला किया तो उनके पिता शुरू में इसके खिलाफ थे। यूं तो फिरोज गांधी भी कांग्रेस में सक्रिय थे लेकिन पंडित जवाहर लाल नेहरू नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी फिरोज से शादी करे। हालांकि इंदिरा की जिद के आगे वे दोनोंं की शादी को तैयार हो गए। इंदिरा और फिरोज की शादी से पहले देशभर में दोनों का काफी विरोध हुआ था। यहां तक कि जवाहर लाल नेहरू को धमकी भरे पत्र तक आने लगे।

पुपुल जयकर अपनी किताब ‘इंदिरा गांधी, ए बायोग्राफी’ में लिखती हैं कि पंडित नेहरू भले ही खिलाफ रहे हों, लेकिन इंदिरा गांधी की मां कमला नेहरू चाहती थीं कि फिरोज़ उनकी बेटी से शादी कर लें। कमला नेहरू जब अस्वस्थ थीं, तब फिरोज ने उनकी काफी देखभाल की थी। इससे इंदिरा काफी प्रभावित हुई थीं। यही वजह थी कि पहले इंदिरा गांधी ने फिरोज को शादी के लिए मना कर दिया था, लेकिन बाद में वो तैयार हो गई थीं। हालांकि शादी के कुछ महीनों बाद ही इंदिरा-फिरोज के रिश्तों में तल्खियां भी नज़र आने लगी थीं।

पिता के साथ जा रही थीं भूटान: इंदिरा गांधी अक्सर पिता पंडित नेहरू के साथ वक्त बिताती थीं और राजनीति के गुर सीखना अच्छा लगता था। बाद में जब फिरोज के साथ तल्खी आई तो उन्होंने अपना ध्यान दोनों बच्चों की देखभाल और राजनीति पर फोकस कर लिया। वो फिरोज़ से एक तरह से अलग ही हो चुकी थीं। क्योंकि फिरोज़ से अब उनकी रिश्ता पहले जैसा नहीं था। इंदिरा हर बड़े मौके पर अपने पिता के साथ नज़र आने लगी थीं। सितंबर 1958 में वो अपने पिता जवाहर लाल नेहरू के साथ भूटान जा रही थीं।

वापस लौट आई थीं इंदिरा गांधी: इसी दरम्यान, फिरोज़ गांधी को दिल का दौरा पड़ गया था। इंदिरा गांधी को जैसे ही ये बात पता लगी तो उन्होंने भारत वापस लौटने का फैसला किया। पंडित नेहरू को अकेला छोड़कर वह भारत वापस लौट आईं। हालांकि जब तक इंदिरा, फिरोज के पास पहुंचीं वह खतरे से बाहर आ चुके थे।

चर्चित लेखक बार्टिल फाक ने अपनी किताब ‘फिरोज: द फॉरगेटेन गांधी’ में इसका विस्तार से जिक्र किया है। दोनों के रिश्तों में जो दूरियां आई थीं, वह एक बार फिर खत्म होने लगीं। फिरोज़ ठीक हो गए और परिवार के साथ श्रीनगर चले गए। पंडित नेहरू भी दोनों के पास आने से खुश थे, लेकिन दिल्ली वापस आने के बाद एक बार फिर दोनों के बीच तल्खियां बढ़ने लगी थीं।

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