अमेरिका के पंखे, तुर्की के स्टाइल वाला बाथरूम और रसोई में इंग्लिश नौकर; कुछ ऐसे हुई थी जमशेदजी टाटा के ताज होटल की शुरुआत

जमशेदजी ने टाटा ने मुंबई में एक शानदार होटल बनाने का फैसला किया था। इस होटल के लिए उन्होंने खुद दुनियाभर से सामान खरीदा था। इसमें कई तरह की विशेष सुविधाएं थीं।

Taj Mahal Hotel
ताज महल होटल (Photo- Indian Express)

जमशेदजी टाटा के लिए कहा जाता है कि वह भारत के व्यवसाय का भविष्य देख सकते थे। यही वजह थी कि भविष्य में काम आने वाली कई चीजों की शुरुआत वह पहले ही भारत में कर चुके थे। जमशेदजी ने एक ऐसा ही सपना 20वीं सदी शुरू होने से पहले देखा था। वह भारत में एक आलीशान होटल बनाना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने आर्थिक राजधानी मुंबई को चुना था। ये होटल साल 1903 में लोगों के लिए खोल दिया गया था। लेकिन इसकी शुरुआत इतनी आसान नहीं थी।

लेखक आर.सी गुप्ता ने अपनी किताब ‘ए कंप्लीट बायोग्राफी ऑफ रतन टाटा’ में इसका जिक्र किया है। जमशेदजी ने मुंबई में उस समय भारत का सबसे शानदार ताज महल होटल बनाया था। इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा पैसे खर्च हो गए थे। इस होटल का बनाने का मुख्य उद्देश्य भारत की तरफ यात्रियों को आकर्षित करना था। उन्होंने इस होटल के लिए खुद सामान खरीदा था। इस होटल में उस समय के हिसाब से सबसे बेहतरीन सुविधाएं थीं जो यूरोपियन मानकों पर भी खरी उतरती थीं।

होटल में सोडा और बर्फ के लिए विशेष जगह बनाई गई थी। इसके अलावा कपड़ो की धुलाई के लिए मशीन, एलिवेटर और इलेक्ट्रिक जनरेटर भी लगाए गए थे। इस होटल की विशेषता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि उस समय शानदार लाइटों से लेस ये मुंबई की पहली विशाल बिल्डिंग थी। होटल ताज पैलेस में अमेरिका के पंखे, तुर्की से स्टाइल का बाथरूम भी था। साथ ही जमशेदजी ने रसोई में काम करने के लिए इंग्लिश नौकर तक रखे थे। यानी कुल मिलाकर इस होटल में वो सब सुविधाएं थीं जो उस समय दुनिया के शानदार होटलों में हुआ करती थीं।

स्टील इंडस्ट्री की शुरुआत: इंग्लैंड में रहते हुए जमशेदजी टाटा ने भारत में स्टील की फैक्ट्री लगाने का फैसला किया। ये मुश्किल फैसला भी था क्योंकि भारत में अंग्रेजी सरकार की हुकूमत थी और वे कभी नहीं चाहते थे कि कोई भी बड़ा व्यवसाय भारत में स्थापित हो। इसके लिए कंपनियों को बहुत कड़े कानूनों से होकर गुजरना पड़ता था। 1901 में जमशेदजी ने भारत के स्टील कारोबार पर ध्यान देना शुरू कर दिया। शुरुआत में उनकी कंपनी ने बहुत कम स्टील बनाया।

जमशेदजी कंपनी के आउटपुट से खुश नहीं थे। वह अमेरिका और जर्मनी की कंपनियों में गए और यहां काम करने के तरीके को देखा। वह इस कंपनी में ज्यादा निवेश तो चाहते थे, लेकिन उससे पहले एक प्लान भी चाहते थे, जिससे कंपनी को मुनाफे में लाया जा सके। इससे पहले वह ऐसा कुछ कर पाते उनका 1904 में जर्मनी में निधन हो गया।

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