कभी UPSC के एग्जाम में नहीं मिल पाई थी एंट्री फिर बीच में ही छोड़ दी तैयारी, जानिये शेखर कुमार के IRS ऑफिसर बनने का सफर

शेखर कुमार जब यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, उस दौरान उनके माता-पिता का एक्सीडेंट हो गया। इस हादसे में उनकी मां पैरालाइज हो गई थीं वहीं पिता कोमा में चले गए।

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शेखर कुमार ने कड़े संघर्ष के बाद की थी UPSC की परीक्षा क्रैक (फोटो क्रेडिट- यूट्यूब चैनल)

किसी ने सच ही कहा है कि कड़ी मेहनत, दृढ़ निश्चय और संकल्प के जरिए आप कठिन-से-कठिन लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकते हैं। ऐसी ही कहानी है बिहार के रहने वाले आईआरएस ऑफिसर शेखर कुमार की। शेखर कुमार कभी भी सिविल सर्विस में नहीं जाना चाहते थे, हालांकि अपने माता-पिता का सपना पूरा करने के लिए ना सिर्फ उन्होंने कड़ी मेहनत की बल्कि इस दौरान जीवन में आई सभी चुनौतियों का भी डटकर सामना किया। दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC को क्रैक करने का सपना तो हर युवा देखता है, लेकिन इस परीक्षा को पास कर पाना उतना ही कठिन है।

शेखर कुमार ने कड़ी मेहनत के बाद साल 2010 में यूपीएससी की परीक्षा क्रैक की थी, जिसके बाद वह आईआरएस ऑफिसर बन गए।

माता-पिता ने किया था प्रेरित: शेखर कुमार के माता-पिता केवल 10वीं तक ही पढ़े हुए हैं। वह चाहते थे कि उनका बेटा खूब पढ़े और बड़ा मुकाम हासिल करे। एक इंटरव्यू के दौरान शेखर ने इस बात का खुलासा किया था कि उनके पिता चाहते थे कि वह डीएम बने। हालांकि शेखर को इस फील्ड में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन पिता के सपने को साकार करने के लिए उन्होंने इस ओर कदम बढ़ाया और परीक्षा की तैयारी शुरू की।

माता-पिता के एक्सीडेंट के बाद छोड़ दी थी तैयारी: शेखर कुमार जब यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, उस दौरान उनके माता-पिता का एक्सीडेंट हो गया। इस हादसे में उनकी मां कमर के नीचे केहिस्से से पैरालाइज हो गई थीं वहीं पिता कोमा में चले गए। माता-पिता के एक्सीडेंट के बाद उन्होंने अपनी तैयारी बीच में ही छोड़ दी और उनकी सेवा में लग गए। हालांकि मां के प्रेरित करने के बाद उन्होंने एक बार फिर से तैयारी शुरू की।

पेपर में नहीं मिल पाई थी एंट्री: शेखर कुमार ने जीवन में कड़ा संघर्ष किया, हालांकि किस्मत ने भी उनकी खूब परीक्षा ली। अपने सेकेंड अटेम्प्ट का पेपर देने के लिए शेखर 10 मिनट लेट पहुंचे थे। इस कारण उन्हें परीक्षा हॉल में एंट्री नहीं मिल पाई थी। मेन्स तक पहुंचकर भी शेखर पेपर नहीं दे पाए, जिसके बाद वह बुरी तरह से टूट गए थे। हालांकि परिवार के सपोर्ट के बाद उन्होंने फिर से खुद को संभाला और तैयारी शुरू की। जिसके बाद साल 2010 में शेखर और उनके माता-पिता का सपना पूरा हुआ।

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