कई पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के लेबल पर INS नंबर लिखा होता है। हो सकता है, आपमें से कुछ लोगों ने देखा होगा और कई ने देखकर इसे नजरंदाज भी कर दिया होगा। यह नंबर कुछ इस तरह होते हैं- INS 330, INS 322, INS 551, अब सवाल उठता है कि क्या आपने कभी सोचा है कि ये क्यों लिखे होते हैं और इनका क्या मतलब होता है। अगर नहीं तो आइए विस्तार से इनके बारे में जानते हैं।
खाने के पैकेट पर लिखा INS का मतलब इंटरनेशनल नंबरिंग सिस्टम फॉर फूड एडिटिव्स है। यह एक ऐसी नंबर प्रणाली है, जिसके जरिए खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग एडिटिव्स (खाद्य योजक) की पहचान की जाती है। इससे उपभोक्ताओं और नियामक संस्थाओं के लिए इन एडिटिव्स को पहचानना और समझना आसान हो जाता है। इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस की टीम ने कैलाश दीपक अस्पताल की कंसल्टेंट डायटेटिक्स रिचा शर्मा से बात की तो उन्होंने बताया, “यह मूल रूप से एक नंबर प्रणाली है, जिसका इस्तेमाल पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में मिलाए जाने वाले अलग-अलग खाद्य योजकों की पहचान करने के लिए किया जाता है।”
यह नंबर प्रणाली कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन के तहत विकसित की गई थी। यह संख्या खाद्य एवं कृषि संगठन और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मिलकर बनाई गई है, जिसका उद्देश्य दुनियाभर में खाद्य पदार्थों से जुड़े मानक तैयार करना है। उदाहरण के लिए, किसी खाद्य पदार्थ के पैकेट पर मोनोसोडियम ग्लूटामेट का पूरा नाम लिखने के बजाय निर्माता INS 621 जैसे छोटे कोड का इस्तेमाल कर सकते हैं। आमतौर पर इस कोड के साथ यह भी बताया जाता है कि उस खाद्य योजक का इस्तेमाल किस काम के लिए किया गया है।
INS 330, INS 322, INS 551 का क्या मतलब है
हर नंबर का मतलब विस्तार से समझाते हुए रिचा शर्मा बताती हैं, “INS 330 का मतलब सिट्रिक एसिड है। इसका इस्तेमाल खाद्य पदार्थ की खटास और अम्लता को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। यह खाने का स्वाद बनाए रखने में भी मदद कर सकता है।”
INS 322 का मतलब लेसिथिन होता है। “इसका इस्तेमाल तेल और पानी जैसी अलग-अलग चीजों को अच्छी तरह मिलाने के लिए किया जाता है। लेसिथिन प्राकृतिक रूप से सोयाबीन और अंडे जैसे खाद्य पदार्थों में भी पाया जाता है।”
INS 551 का मतलब सिलिकॉन डाइऑक्साइड है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से पाउडर वाले खाद्य पदार्थों में किया जाता है, ताकि वे आपस में चिपककर गुठलियां न बनाएं। इससे खाद्य पदार्थ आसानी से बहने या निकलने योग्य बने रहते हैं।
क्या ये असुरक्षित होते हैं
किसी पैकेट पर INS नंबर लिखा होने का मतलब यह नहीं है कि वह खाद्य पदार्थ अस्वस्थ या असुरक्षित है। रिचा शर्मा बताती हैं, “यह नंबर सिर्फ यह बताता है कि खाद्य पदार्थ में कौन सा एडिटिव इस्तेमाल किया गया है और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया है।” हालांकि, पैकेटबंद खाद्य पदार्थ खरीदते समय हमें केवल इन नंबरों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। शर्मा आगे कहती हैं, “खाद्य पदार्थ के पूरे इंग्रीडिएंट्स और पोषण संबंधी जानकारी को ध्यान से देखें। खासतौर पर उसमें चीनी, नमक, वसा और फाइबर की मात्रा कितनी है, इस पर ध्यान देना चाहिए। इससे आपको यह समझने में ज्यादा मदद मिलेगी कि वह खाद्य पदार्थ वास्तव में कितना सेहतमंद है।”
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी तरह की दिनचर्या शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
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