बहुत सारे लोग भारत-पाकिस्तान बॉर्डर देखने की ख्वाहिश रखते हैं। ऐसे में जब भी भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर घूमने की बात आती है तो सबसे पहले वाघा-अटारी बॉर्डर का नाम दिमाग में आता है। लेकिन क्या आपको पता है देश की सीमाओं पर सिर्फ एक जगह ही ऐसी नहीं है, जहां घूमने का अलग अनुभव मिलता है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में कई गांव और सीमावर्ती इलाके ऐसे हैं, जहां आपको खूबसूरत पहाड़, नदियां, स्थानीय संस्कृति और सरहद के करीब होने का अनोखा अनुभव एक साथ मिल सकता है।
कुछ ऐसे गांव भी हैं जहां से आप बॉर्डर के उस पार का नजारा देख सकते हैं। उत्तराखंड से लेकर अरुणाचल प्रदेश, गुजरात और मेघालय तक ऐसे कई बॉर्डर डेस्टिनेशन हैं जो धीरे-धीरे ऑफबीट ट्रैवल पसंद करने वाले लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। अगर आप भी इस बार कुछ अलग घूमना चाहते हैं तो इन जगहों को अपनी बकेट लिस्ट में शामिल कर सकते हैं।
माणा, उत्तराखंड
बद्रीनाथ से कुछ किलोमीटर आगे ऊंचाई पर बसा माणा गांव लंबे समय से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। इसे पहले अक्सर ‘भारत का आखिरी गांव’ कहा जाता था, लेकिन 2022 में सरकार ने इसे ‘भारत का पहला गांव’ के रूप में प्रचारित करना शुरू किया, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। यहां का माहौल बाकी हिल स्टेशनों से काफी अलग महसूस होता है। ऊंचे पहाड़, ठंडी हवा, पत्थर के पारंपरिक घर और आसपास का धार्मिक वातावरण इस जगह को खास बनाते हैं।
यहां क्या देखें?
व्यास गुफा और गणेश गुफा
भीम पुल
सरस्वती नदी का क्षेत्र
आसपास के हिमालयी नजारे
स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक संस्कृति
माणा भारत-तिब्बत सीमा के करीब है, इसलिए यहां जाने से पहले स्थानीय प्रशासन की मौजूदा यात्रा और परमिट संबंधी जानकारी जरूर जांच लें।
चितकुल, हिमाचल प्रदेश
अगर आपको पहाड़ों के साथ शांति और गांव की सादगी पसंद है तो चितकुल आपके लिए शानदार जगह हो सकती है। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में बसा यह गांव बास्पा घाटी के खूबसूरत नजारों के लिए जाना जाता है। चितकुल को अक्सर भारत-तिब्बत सीमा के पुराने व्यापार मार्ग से जुड़ा आखिरी आबाद गांव बताया जाता है। यहां पहुंचने पर पारंपरिक लकड़ी के घर, ऊंचे पहाड़, सेब के बाग और बास्पा नदी का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है।
चितकुल में क्या खास है?
पारंपरिक किन्नौरी वास्तुकला
बास्पा नदी और घाटी के खूबसूरत नजारे
सेब के बाग
शांत और कम भीड़ वाला माहौल
आसपास के ट्रेकिंग रूट
अगर आपको भीड़भाड़ वाले हिल स्टेशन पसंद नहीं हैं तो चितकुल एक अच्छा ऑफबीट विकल्प हो सकता है।
किबिथू, अरुणाचल प्रदेश
अरुणाचल प्रदेश का किबिथू उन यात्रियों के लिए खास हो सकता है जो सामान्य टूरिस्ट डेस्टिनेशन से कुछ अलग देखना चाहते हैं। यह अंजॉ जिले में भारत-चीन सीमा के करीब स्थित है और अपने ऊंचे पहाड़ों तथा लोहित नदी की घाटी के लिए जाना जाता है। यह इलाका प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में भी सैन्य गतिविधियां हुई थीं।
किबिथू क्यों जाएं?
पहाड़ों के बीच खूबसूरत सूर्योदय देखने के लिए
लोहित नदी की घाटी के नजारे
मिश्मी समुदाय की स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने के लिए
सीमावर्ती इलाके का अनुभव लेने के लिए
इतिहास और प्रकृति दोनों में रुचि रखने वालों के लिए
अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में यात्रा के लिए परमिट और स्थानीय नियम लागू हो सकते हैं, इसलिए ट्रिप प्लान करने से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर लें।
नडाबेट, गुजरात
अगर पहाड़ों की बजाय आप सरहद और देश की सुरक्षा से जुड़ा अनुभव लेना चाहते हैं तो गुजरात का नडाबेट अलग तरह का डेस्टिनेशन है। बनासकांठा जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित नडाबेट को ‘सीमा दर्शन’ पर्यटन परियोजना के जरिए डेवलप किया गया है। यहां पर्यटकों को सीमा क्षेत्र, बीएसएफ से जुड़ी जानकारी और सैन्य इतिहास को करीब से समझने का मौका मिलता है। यहां होने वाली बीएसएफ की परेड और रिट्रीट सेरेमनी भी पर्यटकों के आकर्षण का हिस्सा है।
नडाबेट में क्या देखें?
सीमा दर्शन पर्यटन परिसर
बीएसएफ की परेड/रिट्रीट सेरेमनी
सीमा क्षेत्र से जुड़े प्रदर्शनी और जानकारी केंद्र
आसपास का रेगिस्तानी इलाका
अगर आप वाघा-अटारी के अलावा किसी दूसरे बॉर्डर डेस्टिनेशन का अनुभव लेना चाहते हैं तो नडाबेट एक विकल्प हो सकता है।

डॉकी, मेघालय
मेघालय का डॉकी बाकी जगहों से थोड़ा अलग है। यहां आपको सीमा क्षेत्र के साथ-साथ बेहद खूबसूरत उमंगोट नदी देखने को मिलती है। साफ पानी और आसपास के हरे-भरे पहाड़ों की वजह से डॉकी मेघालय के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल है। डॉकी भारत-बांग्लादेश सीमा के करीब है और यहां से सीमा क्षेत्र को भी देखा जा सकता है। इसके आसपास शनोंगपडेंग जैसे स्थान भी घूमने के लिए लोकप्रिय हैं।
डॉकी में क्या करें?
उमंगोट नदी में बोटिंग
भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र का नजारा
आसपास के गांवों की यात्रा
शनोंगपडेंग घूमना
अगर आपकी ट्रिप में प्रकृति, नदी और बॉर्डर का अनुभव तीनों शामिल होना चाहिए तो डॉकी अच्छा विकल्प हो सकता है।
बॉर्डर विलेज घूमने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
इन जगहों की खूबसूरती जितनी खास है, उतना ही जरूरी है कि यात्रा के दौरान स्थानीय नियमों का ध्यान रखा जाए। सीमावर्ती इलाकों में कई जगहों पर परमिट, पहचान पत्र या आवाजाही से जुड़े अलग नियम हो सकते हैं। यात्रा से पहले संबंधित राज्य की आधिकारिक पर्यटन वेबसाइट और स्थानीय प्रशासन से मौजूदा नियम, सड़क की स्थिति, मौसम और परमिट की जानकारी जरूर जांच लें। खासकर ऊंचाई वाले और सीमा के करीब स्थित इलाकों में मौसम तेजी से बदल सकता है।
