पहाड़ों की खूबसूरती देखने का मन तो हर किसी का होता है, लेकिन जब सामने कई किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई हो, तो अच्छे-अच्छों के कदम जवाब देने लगते हैं। खासकर बुजुर्गों या उन लोगों के लिए, जिन्हें लंबा ट्रेक करना मुश्किल लगता है, पहाड़ी सफर किसी चुनौती से कम नहीं होता।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप इन खूबसूरत जगहों का सफर नहीं कर सकते। भारत में कई ऐसे धार्मिक और पहाड़ी पर्यटन स्थल हैं, जहां ट्रेक के मुश्किल हिस्सों को पार करने के लिए पोनी (Pony) यानी टट्टू (घोड़े की एक प्रजाति) या खच्चर किराए पर लेने की सुविधा मिलती है। इससे आपको पूरा सफर पैदल तय नहीं करना पड़ता। अगर आप भी पहाड़ों की सैर करना चाहते हैं, लेकिन लंबी और थकाने वाली चढ़ाई को लेकर परेशान हैं, तो इन 6 जगहों के बारे में जान लीजिए।

वैष्णो देवी, जम्मू-कश्मीर

माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए कटरा से भवन तक करीब 13 से 14 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है। यह रास्ता कई श्रद्धालुओं के लिए काफी थकाने वाला हो सकता है।

ऐसे लोगों के लिए घोड़ा एक विकल्प है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड श्रद्धालुओं को सलाह देता है कि पोनी, पिट्ठू या पालकी की सेवा सिर्फ अधिकृत ठेकेदारों के माध्यम से ही लें। इसके लिए कटरा, अर्धकुंवारी और भवन में अधिकृत कार्यालयों की सुविधा उपलब्ध है।

रास्ते पर तय रेट भी प्रदर्शित किए जाते हैं और सेवा लेने वाले व्यक्ति का रजिस्ट्रेशन नंबर नोट करने की सलाह दी जाती है। इसलिए अगर पूरी चढ़ाई पैदल करना मुश्किल लग रहा है, तो पोनी की मदद ली जा सकती है।

केदारनाथ, उत्तराखंड

भारत के सबसे चर्चित और चुनौतीपूर्ण धार्मिक ट्रेक में केदारनाथ का नाम भी शामिल है। ऊंचाई और कठिन रास्ते के कारण यह यात्रा शारीरिक रूप से काफी थका सकती है।

केदारनाथ मार्ग पर श्रद्धालुओं की मदद के लिए घोड़े-खच्चर आधारित सेवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। उत्तराखंड में वर्ष 2026 के लिए जारी मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP में केदारनाथ समेत कई प्रमुख तीर्थ मार्गों पर इक्वाइन यानी घोड़े और खच्चरों के इस्तेमाल कर सकते हैं।

जो लोग लंबी चढ़ाई पैदल तय करने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए घोड़ा यात्रा को थोड़ा आसान बना सकती है। हालांकि, मौसम और स्थानीय नियमों के आधार पर व्यवस्था में बदलाव हो सकता है, इसलिए यात्रा से पहले ताजा जानकारी जरूर ले लें।

यमुनोत्री, उत्तराखंड

चार धाम यात्रा का हिस्सा यमुनोत्री भी एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जहां चढ़ाई आसान नहीं है। जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु पैदल जा सकते हैं या फिर पोनी और पालकी का सहारा ले सकते हैं।

उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार, यह रास्ता खड़ी चढ़ाई वाला है। ऐसे में बुजुर्गों या उन लोगों के लिए जिन्हें लंबे समय तक पैदल चलने में परेशानी होती है, पोनी या पालकी उपयोगी विकल्प हो सकती है।

वैली ऑफ फ्लावर्स, उत्तराखंड

अगर आपकी ट्रैवल लिस्ट में उत्तराखंड की खूबसूरत वैली ऑफ फ्लावर्स शामिल है, तो यहां एक जरूरी बात जान लेना चाहिए।

आप घोड़े पर बैठकर सीधे फूलों की घाटी के अंदर नहीं घूम सकते। पोनी और पोर्टर की सुविधा घांघरिया तक पहुंचने वाले रास्ते में मिल सकती है, क्योंकि घांघरिया वैली ऑफ फ्लावर्स का बेस कैंप है।

लेकिन वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क के अंदर जाने के बाद आपको रास्ता पैदल ही तय करना होगा। यानी यात्रा के एक हिस्से में घोड़ा आपकी मदद कर सकता है, लेकिन असली घाटी का अनुभव लेने के लिए पैदल चलना जरूरी है।

रास्ते में थकान महसूस होने पर कुछ स्थानीय लोग टोकरी जैसी व्यवस्था के जरिए यात्रियों को ले जाने की सुविधा भी देते हैं।

हेमकुंड साहिब, उत्तराखंड

समुद्र तल से 4,600 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब तक पहुंचने का रास्ता भी आसान नहीं है। इसकी यात्रा घांघरिया से शुरू होती है, जो वैली ऑफ फ्लावर्स का भी बेस कैंप है।

हेमकुंड साहिब के मार्ग पर भी जरूरत पड़ने पर पोनी की मदद ली जा सकती है। उत्तराखंड की 2026 SOP में इस तीर्थ मार्ग पर भी घोड़ों और इक्वाइन का इस्तेमाल किया जाता है।

अगर चढ़ाई के दौरान आपको ज्यादा थकान महसूस हो, तो रास्ते में भी खच्चर या घोड़े किराए पर लेने का विकल्प मिल सकता है। हालांकि, यहां यात्रा शुरू करने में देर न करें, क्योंकि गुरुद्वारा दोपहर के बाद बंद हो जाता है।

अमरनाथ, जम्मू-कश्मीर

अमरनाथ यात्रा भी हिमालय की कठिन धार्मिक यात्राओं में शामिल है। पहाड़ी रास्ते और चुनौतीपूर्ण ट्रेक के कारण हर व्यक्ति के लिए पूरा सफर पैदल तय करना आसान नहीं होता।

ऐसे श्रद्धालुओं के लिए घोड़े एक स्थापित विकल्प हैं। वर्ष 2026 की अमरनाथ यात्रा के लिए अनंतनाग जिला प्रशासन ने राइडिंग और पैक पोनी समेत कई सेवाओं के रेट आधिकारिक रूप से तय किए थे। प्रशासन ने यात्रियों को अधिक शुल्क वसूलने की स्थिति में शिकायत करने की सलाह भी दी थी।

इसलिए अगर आप अमरनाथ यात्रा करना चाहते हैं लेकिन पूरे पहाड़ी रास्ते को पैदल तय करने को लेकर चिंतित हैं, तो घोड़े की सुविधा आपके लिए मददगार हो सकती है।

यात्रा पर निकलने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

घोड़े या खच्चर से यात्रा करने का फैसला करने से पहले स्थानीय नियमों और मौजूदा व्यवस्थाओं की जानकारी जरूर लें। कई जगहों पर सेवाएं मौसम, यात्रा की स्थिति और प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार बदल सकती हैं।

इसके अलावा, जहां भी संभव हो, केवल पंजीकृत और अधिकृत सेवा प्रदाता से ही घोड़े या खच्चर किराए पर लें और तय किराए की जानकारी पहले ही कर लें।

तो अगली बार अगर पहाड़ों की चढ़ाई देखकर आपके घुटने जवाब देने लगें, तो जरूरी नहीं कि आप खूबसूरत सफर छोड़ दें। इन जगहों पर उपलब्ध पोनी और खच्चर की सुविधा यात्रा के मुश्किल हिस्सों को कुछ हद तक आसान बना सकती है।