Vande Mataram Full Lyrics In Hindi: स्वतंत्रता दिवस का नाम आते ही हर तरफ देशभक्ति का माहौल नजर आने लगता है। 15 अगस्त के मौके पर घरों से लेकर स्कूल-कॉलेज और सरकारी व निजी कार्यालयों तक तिरंगा फहराया जाता है। इस दिन कई जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, जिनमें देशभक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती है।

भारत के राष्ट्रगान जन गण मन के साथ ही राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् का भी विशेष महत्व है। आजादी के आंदोलन के दौरान यह गीत देशवासियों के बीच देशप्रेम और एकता की भावना जगाने का प्रतीक बना था। आज भी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसरों पर इसे बड़े गर्व और सम्मान के साथ गाया जाता है।

अगर आप भी 15 अगस्त के कार्यक्रम की तैयारी कर रहे हैं, बच्चों को राष्ट्रगीत सिखाना चाहते हैं या वन्दे मातरम् के पूरे बोल हिंदी में पढ़ना चाहते हैं, तो यहां देख सकते हैं राष्ट्रगीत की लिरिक्स।

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!

सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,
शस्यश्यामलाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्!

शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥

कोटि कोटि कण्ठ कल कल निनाद कराले
द्विसप्त कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले
के बोले मा तुमी अबले
बहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम्
रिपुदलवारिणीम् मातरम्॥
वंदे मातरम्!

तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि ह्रदि तुमि मर्म
त्वं हि प्राणाः शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारै प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्॥
वंदे मातरम्!

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमलदल विहारिणी
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्
नमामि कमलां अमलां अतुलाम्
सुजलां सुफलां मातरम्॥
वंदे मातरम्!

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्
धरणीं भरणीं मातरम्॥

वंदे मातरम् से जुड़ी जरूरी बातें

वंदे मातरम् से जुड़ी जरूरी बातें

भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना प्रसिद्ध कवि, उपन्यासकार और साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के अनुसार, इसे 7 नवंबर 1875 को लिखा गया था और बाद में इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’, जो 1882 में प्रकाशित हुआ, में शामिल किया गया।

‘वंदे मातरम्’ को पहली बार 1896 में कलकत्ता में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में सार्वजनिक रूप से गाया गया था। उस समय रवींद्रनाथ टैगोर ने इसका गायन किया था और सरकारी दस्तावेजों में इसे संगीतबद्ध करने का श्रेय भी उन्हें दिया गया है।

आजादी की लड़ाई के दौरान ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं रहा, बल्कि यह देशभक्ति और ब्रिटिश शासन के विरोध का एक सशक्त प्रतीक बन गया। खासतौर पर 1905 के बंगाल विभाजन विरोधी और स्वदेशी आंदोलन के दौरान इसका प्रभाव काफी बढ़ा। राजनीतिक नारे के रूप में ‘वंदे मातरम्’ का पहली बार इस्तेमाल 7 अगस्त 1905 को दर्ज किया गया है।

भारत की संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया।