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Diabetes Cure: डायबिटीज की वजह से हो सकती है अनिद्रा की परेशानी, इन 5 उपायों से करें नींद के पैटर्न में सुधार

डायबिटीज के मरीजों की शुगर बढ़ने से अनिद्रा, बार-बार नींद से जागना, सोने में परेशानी होना या फिर बहुत ज्यादा नींद आने की परेशानी हो सकती है।

Diabetes Cure: डायबिटीज की वजह से हो सकती है अनिद्रा की परेशानी, इन 5 उपायों से करें नींद के पैटर्न में सुधार
टाइप 2 डायबिटीज के मरीज बेहतर नींद लेना चाहते हैं तो डायबिटीज को कंट्रोल करें। photo-freepik

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसे कंट्रोल नहीं किया जाए तो दिल के रोगों, किडनी और लंग्स को नुकसान पहुंच सकता है। डायबिटीज के मरीजों की इम्युनिटी कम होने लगती है जिसकी वजह से उनके बीमार रहने की संभावना अधिक रहती है। दिन भर की मसरूफियत, तनाव और खराब खान-पान डायबिटीज को बढ़ा सकता है।

डायबिटीज के मरीजों के ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ने से बॉडी में उसके लक्षण दिखना शुरू हो जाते हैं। डायबिटीज के मरीजों को ज्यादा प्यास लगती है, ज्यादा यूरिन डिस्चार्ज होता है, पसीना ज्यादा आता है और स्लीप पैटर्न भी बदला रहता है। आप जानते हैं कि डायबिटीज के मरीजों के लिए कम नींद उनकी परेशानी को बढ़ा सकती है। जो लोग 8 घंटे से कम सोते हैं उन्हें डायबिटीज की बीमारी का खतरा अधिक होता है।

एक रिसर्च के मुताबिक डायबिटीज की वजह से नींद की गड़बड़ी हो सकती है। डायबिटीज के मरीजों के ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ने से अनिद्रा, बार-बार नींद से जागना, सोने में परेशानी होना या फिर डायबिटीज की वजह से बहुत ज्यादा नींद आने की परेशानी हो सकती है। नींद की कमी ब्लड में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ा सकती है। आप भी डायबिटीज के शिकार हैं और नींद की परेशानी हैं तो इन 5 उपायों को अपनाकर नींद के पैटर्न में करें सुधार।

स्लीप एपनिया की जांच करें: (Check for Sleep Apnea)

किंगमैन स्ट्रोहल, एमडी, क्लीवलैंड में यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स केस मेडिकल सेंटर के स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ कहते हैं कि स्लीप एपनिया, स्लीप डिसऑर्डर, टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों में आम परेशानी है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन के अनुसार, टाइप 2 डायबिटीज वाले 10 में से 7 लोगों को भी ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया है। जब आप अधिक वजन वाले होते हैं और आपकी गर्दन में अतिरिक्त चर्बी होती है, तो यह स्लीप एपनिया का कारण बन सकती है।

स्लीप एपनिया के लक्षणों में जोर से खर्राटे लेना, दिन में अत्यधिक नींद आना, चिड़चिड़ापन और सुबह का सिरदर्द शामिल हैं। यदि आपको या आपके साथी को संदेह है कि आपको स्लीप एपनिया है, तो अपने डॉक्टर से स्लीप टेस्ट के बारे में पूछें। स्लीप एपनिया का इलाज सांस लेने वाले उपकरणों से किया जा सकता है।

ब्लड में शुगर के स्तर को कंट्रोल करें: (Blood Sugar Management)

जब आपका ब्लड शुगर बहुत अधिक या बहुत कम होता है, तो यह आपको रात में जगा सकता है। टाइप 2 डायबिटीज के मरीज बेहतर नींद लेना चाहते हैं तो डायबिटीज को कंट्रोल करें। डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए डाइट पर कंट्रोल करें, रेगुलर वॉक और एक्सरसाइज करें और शुगर की दवा का सेवन करें आपकी डायबिटीज कंट्रोल रहेगी।

बार-बार नींद की झपकी नहीं लें पूरी नींद लें: (Practice Good Sleep Hygiene)

NSF के अनुसार, अधिकांश वयस्कों को रात में कम से कम सात से नौ घंटे की नींद की आवश्यकता होती है। कुछ लोग काम की मसरूफियत की वजह से पूरी नींद नहीं लेते और उन्हें बार-बार नींद की झपकी आती है। लोग आधी रात तक टीवी देखते हैं या फिर फोन पर बात करते हैं जिससे उनकी रात की नींद प्रभावित होती है। दोपहर में 20 मिनट से ज्यादा नहीं सोए और रात को समय पर सोएं आपकी शुगर कंट्रोल रहेगी।

सोने से पहले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बंद करें: (Turn Off Electronic Devices)

स्मार्टफोन की तेज रोशनी के संपर्क में आने से न केवल नींद में खलल पड़ती है बल्कि यह आपके मेटाबॉलिज्म को भी बदल सकती है। स्मार्टफोन आपकी नींद के साथ ही आपको मोटापा का भी शिकार बना सकता है। मई 2016 में पीएलओएस वन नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि नीली रोशनी का एक्सपोजर इंसुलिन प्रतिरोध में वृद्धि से जुड़ा है।

2019 में JAMA इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन के अनुसार, रात में नीली रोशनी के संपर्क में आने से वजन बढ़ने और मोटापे का खतरा बढ़ सकता है। NSF बिस्तर से कम से कम 30 मिनट पहले उपकरणों को बंद करने की सलाह देता है।

सोने से पहले शराब का सेवन न करें:  (Don’t Drink Alcohol Before Bed)

शराब ब्लड में शुगर के स्तर को प्रभावित करती है। नींद की गड़बड़ी के जोखिम को कम करने के लिए, NSF सोने से चार घंटे पहले शराब का सेवन बंद करने की सलाह देता है। सोने से पहले शराब का सेवन करने से बचना चाहिए। अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो शराब का सेवन करने से परहेज करें ज्यादा बेहतर है।

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