मानसून का मौसम हरियाली और ताजगी लेकर आता है, लेकिन इसी मौसम में बगीचे और गमलों में लगे पौधों पर कीड़े-मकोड़ों का हमला भी बढ़ जाता है। अधिक नमी और उमस के कारण एफिड्स (चेपा), व्हाइटफ्लाई, घोंघे, स्लग और पत्तियां खाने वाले कीड़े तेजी से पनपते हैं। अगर समय रहते इनसे बचाव न किया जाए तो पौधे कमजोर हो सकते हैं और उनकी वृद्धि भी रुक सकती है। ऐसे में कुछ आसान और प्राकृतिक उपाय अपनाकर आप अपने पौधों को सुरक्षित रख सकते हैं।

नीम का स्प्रे करें

नीम प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में बेहद प्रभावी माना जाता है। इसके लिए नीम की पत्तियों को पानी में उबालें, ठंडा होने पर छान लें और इस घोल को स्प्रे बोतल में भरकर पौधों पर छिड़कें। खासकर पत्तियों के निचले हिस्से पर स्प्रे जरूर करें, क्योंकि कीड़े अक्सर वहीं छिपे रहते हैं। सप्ताह में दो बार इसका इस्तेमाल करने से एफिड्स, व्हाइटफ्लाई और फंगल संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।

लहसुन और हरी मिर्च का स्प्रे बनाएं

लहसुन और हरी मिर्च की तेज गंध कई तरह के कीड़ों को दूर रखने में मदद करती है। इसके लिए 10 लहसुन की कलियां और 2 हरी मिर्च को 1 लीटर पानी के साथ पीस लें। इस मिश्रण को रातभर ढककर रखें, फिर छानकर पौधों पर स्प्रे करें। यह घरेलू उपाय सब्जियों और फूलों वाले पौधों के लिए भी सुरक्षित माना जाता है।

मिट्टी में सरसों का पाउडर या लकड़ी की राख डालें

पौधों की मिट्टी में थोड़ा-सा सरसों (राई) का पाउडर मिलाने से जड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों से बचाव हो सकता है। वहीं, पौधों के आसपास लकड़ी की राख छिड़कने से स्लग और घोंघे दूर रहते हैं। साथ ही राख मिट्टी में कुछ आवश्यक खनिज भी पहुंचाती है। हर 10 से 15 दिन में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

नेचुरल इंसेक्टिवोरौस ऑर्गेनिज्म को बढ़ावा दें

लेडीबग, लेसविंग और मेंढक जैसे जीव बगीचे के लिए फायदेमंद होते हैं। ये एफिड्स, छोटे कीड़ों और घोंघों को खाकर उनकी संख्या कंट्रोल रखते हैं। इसलिए जरूरत से ज्यादा रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करने से बचें, ताकि ये लाभकारी जीव सुरक्षित रह सकें।

बगीचे की नियमित सफाई करें

गिरी हुई पत्तियां, सड़े हुए फल-सब्जियां, खरपतवार और पौधों का कचरा कीड़ों और फंगस को बढ़ावा देता है। इसलिए समय-समय पर बगीचे की सफाई करें और पौधों की अतिरिक्त शाखाओं की छंटाई करें, ताकि हवा का संचार बना रहे। पौधों को सुबह पानी दें, जिससे रात तक अतिरिक्त नमी न रहे और फंगल संक्रमण का खतरा कम हो। साथ ही, बागवानी में इस्तेमाल होने वाले औजारों को भी साफ रखें।

(डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले उसे एक-दो पौधों पर परीक्षण के रूप में इस्तेमाल करें, ताकि पौधों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।)

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