मानसून आते ही प्रकृति हरियाली से लहलहा उठती है। बारिश की बूंदें धरती की तपन को कम करने के साथ ही पेड़-पौधों पर जमी धूल की परत को भी साफ करती हैं। पेड़-पौधों पर नई कोपलें निकलती हैं, जमीन से नए पौधे निकलते हैं। वनस्पति के लिए बारिश किसी वरदान से कम नहीं होती। बरसात आते ही बाग-बगीचे, जंगल से लेकर नई फसलें खेतों में लहलहाने लगती हैं।

इसके साथ ही गमले में लगाए गए पौधे भी फिर से हरे-भरे होने लगते हैं। काफी लोग अपने घर की बालकनी या छत पर एक छोटा सा गार्डन भी बनाते हैं, जिसमें तरह-तरह के फूल, फल, सब्जियां और हरे-भरे पौधे लगे होते हैं। लेकिन इन पौधों की बारिश के मौसम में थोड़ी सा खास देखभाल करने की जरूरत होती है।

दरअसल, बरसात आते ही खरपतवार, कीड़े-मकोड़े और गमलों में पानी भरने जैसी कई सारी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं बरसात के मौसम में किस तरह पौधों को खराब होने से बचाया जाए और उनके देखभाल का सही तरीका क्या है।

1- पानी जमा न होने दें

मानसून के मौसम में सबसे जरूरी है गमले का ड्रेनेज सिस्टम सही तरह से काम करे, ताकि पौधे में पानी इकट्ठा न हो। अगर गमले के नीचे बना छेद मिट्टी या कंकड़ की वजह बंद हो गया है, तो इससे बारिश का पानी बाहर नहीं निकल पाएगा। इससे कुछ समय बाद जड़ें सड़ सकती हैं। ऐसे में ड्रेनेज होल को सही रखें, ताकि बारिश का अतिरिक्त पानी गमले से बाहर निकल जाए।

2- फालतू के पौधे हटा दें

बरसात आते ही गमलों और क्यारियों में कई तरह के जंगली घास और खरपतवार उगने लगती हैं। ये मिट्टी के पोषक तत्वों को सोखने का काम करती हैं, जिससे आपके गमले का पौधा कमजोर होने लगता है। ऐसे में मानसून की शुरुआत से पहले पूरे गमलों की अच्छी तरह गुड़ाई करके खरपतवार को साफ कर दें।

3- छंटाई भी जरूरी

बारिश के मौसम में पौधे तेजी से विकास करते हैं। अच्छी ग्रोथ के लिए प्रूनिंग बेहतर तरीका माना जाता है। बारिश से ठीक पहले अपने पौधों की हल्की छंटाई कर दें। इस दौरान सूखी, सड़ी-गली या मुरझाई टहनियों को काटकर अलग कर दें। इससे पौधों में हवा और धूप का संचार बेहतर होता है और जब बारिश का पानी मिनता है तो नई टहनियां और पत्तियां निकलने लगती हैं।

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4- खाद का रखें ध्यान

मानसून में पौधों की ग्रोथ के लिए लोग कई बार अधिक खाद डाल देते हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पौधों को नुकसान पहुंच सकता है। पौधों में वर्मी कम्पोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खास सीमित मात्रा में डालनी चाहिए। वहीं, गीली मिट्टी में खाद डालने से बचना चाहिए।

5- बड़े पौधों और बेलों की देखभाल

गार्डन या बगीचे में कई बड़े और बेल वाले पौधे भी लगे होते हैं। अगर ये गमले में लगे हैं तो मानसून में इनकी देखभाल पर विशेष ध्यान देना चाहिए। दरअसल, बरसात के मौसम में कई बार तेज हवाएं और आंधी चलने के कारण मनी प्लांट, गिलोय या सब्जियों की बेलें और भारी पौधे टूटकर गिर सकते हैं। इससे बचने के लिए मानसून से पहले सभी बेलों और लंबे पौधों को बांस की लकड़ी, छड़ी या रस्सी की मदद से मजबूती से सहारा दे दें।

6- मिट्टी की करें जांच

बारिश से पहले गमले की मिट्टी भी हल्की बदल देनी चाहिए। अगर मिट्टी बहुत ज्यादा सख्त हो गई है, तो उसमें थोड़ी नई मिट्टी और जैविक खाद मिलाकर उसे भुरभुरा कर दें। बारिश का पानी मिलने पर मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे जैविक खाद के पोषक तत्व धीरे-धीरे जड़ों तक पहुंचने में मदद मिलती है।

7- सही जगह पर रखें

बदलते मौसम में पौधों को लगातार पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती। इसके अलावा अगर पौधे एक दूसरे के काफी पास रखे हैं, तो इससे नमी अधिक बना रहती है जिससे फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बारिश शुरू होने से पहले पौधों को पर्याप्त दूरी पर रख दें। इसके साथ ही ऐसे जगह पर रखें जहां धूप निकलने पर उन्हें सीधी प्राकृतिक रोशनी मिल सके।

डिस्क्लेमर: आर्टिकल में लिखी गई सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य जानकारी है। अत्यधिक मात्रा में किसी भी खाद का उपयोग करने से बचना चाहिए। किसी भी प्रकार की समस्या या सवाल के लिए विशेषज्ञ से जरूर परामर्श करें।

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