बारिश शुरू होते ही अगर आपके घर में हल्की-सी सीलन की बदबू आने लगे या दीवार के किसी कोने पर छोटे-छोटे काले धब्बे दिखने लगें, तो इन्हें नजरअंदाज करने की गलती न करें। यह घर में कई जगहों पर फफूंदी लगने का संकेत हो सकती हैं। यह अचानक नहीं बनती है, बल्कि नमी वाली कुछ खास जगहों से धीरे-धीरे फैलना शुरू करती है।

लोगों को लगता है कि सीलन या फफूंदी लगने की शुरुआत हमेशा बाथरूम की दीवारों से होती है, लेकिन ऐसा नहीं है। घर के कई ऐसे कोने भी हैं जहां लोग महीनों तक ध्यान ही नहीं देते। अगर समय रहते इन जगहों की पहचान कर ली जाए, तो फफूंदी या सीलन घर में फैलने से काफी हद तक रोका जा सकता है। आइए जानते हैं मानसून में घर की वे 7 जगहें, जहां सबसे पहले फफूंदी बनने की संभावना रहती है और इसके पीछे क्या वजह होती है।

बाथरूम की दीवारें और टाइल्स के बीच की लाइन

बाथरूम पूरे घर की सबसे नम जगहों में से एक होता है। नहाने के बाद दीवारों और टाइल्स के बीच बनी ग्राउट लाइन में नमी देर तक बनी रह सकती है। अगर एग्जॉस्ट फैन या वेंटिलेशन अच्छा न हो, तो फफूंदी या सीलन आने का डर रहता है। इसलिए नहाने के बाद दीवारों और फर्श से अतिरिक्त पानी हटा दें। एग्जॉस्ट फैन या खिड़की का इस्तेमाल करें। सप्ताह में एक बार टाइल्स और ग्राउट लाइन की सफाई करें।

किचन सिंक के नीचे वाली कैबिनेट

सिंक के नीचे अक्सर पाइपलाइन होती है। यहां अगर पानी का हल्का सा रिसाव भी है तो यह जगह लंबे समय तक गीली रह सकती है। बंद कैबिनेट होने के कारण हवा भी कम पहुंचती है। इसलिए समय-समय पर पाइप की जांच करें। कैबिनेट को सूखा रखें। महीने में एक-दो बार दरवाजा खोलकर हवा लगने दें।

अलमारी के पीछे और दीवार से सटे हिस्से

जब अलमारी पूरी तरह दीवार से सटी रहती है, तो दोनों के बीच हवा का प्रवाह कम हो जाता है। बारिश के मौसम में यहां नमी जमा हो सकती है, जिससे दीवार पर फफूंदी बनने लगती है। अलमारी और दीवार के बीच थोड़ा गैप रखें। मानसून के मौसम में समय-समय पर अलमारी खिसकाकर सफाई करें।

खिड़कियों के कोने और पर्दे

बारिश के दौरान खिड़कियों पर पानी की बूंदें और नमी जमा हो सकती हैं। अगर इन्हें समय पर न पोंछा जाए, तो कोनों और पर्दों में फफूंदी बनने की डर रहता है। खिड़कियों को सूखे कपड़े से पोंछें। गीले पर्दों को तुरंत सुखाएं। समय-समय पर पर्दे धोते रहें।

गद्दा, तकिया और बिस्तर

यहां भी बारिश में सीलन की वजह से फफूंद लगने का खतरा रहता है। पसीना, हवा में नमी और कम धूप मिलने की वजह से गद्दों और तकियों में सीलन आ सकती है। लंबे समय तक यही स्थिति बनी रहे तो फफूंदी लग सकती है। समय-समय पर गद्दे और तकिए को हवा लगवाएं।

वॉशिंग मशीन की रबर गैस्केट

फ्रंट लोड वॉशिंग मशीन की रबर सील में पानी और डिटर्जेंट के पार्टिकल रह सकते हैं। अगर हर वॉश के बाद इसे सूखने का मौका न मिले, तो यहां काले धब्बे और बदबू आने लगती है। इसलिए हर वॉश के बाद रबर गैस्केट पोंछें। मशीन का दरवाजा कुछ देर खुला छोड़ दें। समय-समय पर मशीन की डीप क्लीनिंग करें।

स्टोर रूम और कम इस्तेमाल होने वाले कोने

जहां धूप और हवा कम पहुंचती है, वहां नमी ज्यादा समय तक बनी रह सकती है। पुराने गत्ते, कपड़े या लकड़ी के सामान भी फफूंदी बनने का जोखिम बढ़ा सकते हैं। स्टोर रूम को समय-समय पर खोलें। अनावश्यक सामान हटाएं।