Parenting Tips: आज के शिक्षित एवं जागरूक समाज में माता-पिता अक्सर यही चाहते हैं कि अपनी क्षमता के अनुसार बच्चों को सारी जरूरी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं। मगर एक बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि बच्चों को जिम्मेदारियों के एहसास से दूर न रखा जाए। खासकर किशोरों के मामले में संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए। क्योंकि यही वह अवस्था है, जिसमें अगर बच्चे के भीतर दायित्वबोध के निर्माण की नींव पड़ जाए, तो वह अपने जीवन में संघर्ष और चुनौतियों से मुकाबला करना भी सीख जाता है। इसके लिए पहल माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को ही करनी होती है। बच्चों को घर के छोटे-छोटे फैसलों में शामिल करना, घरेलू कार्य में उनकी मदद लेना और गलती करने पर डांटने के बजाय व्यावहारिक रूप से उन्हें समझाना- ये ऐसे कदम हैं, जिनके जरिए उनके भीतर जिम्मेदारी का भाव विकसित किया जा सकता है।
बातचीत से समझाएं
बच्चों के संतुलित मानिसक विकास के लिए परिवार में सर्वप्रथम संवाद का खुला माहौल होना जरूरी है, ताकि वे बेझिझक दूसरों के सामने अपनी बात रख सकें। माता-पिता को बच्चों पर अपने निर्णय थोपने के बजाय उनकी राय और भावनाओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए। उनके विचारों को धैर्य से सुना जाना चाहिए, ताकि वे यह समझ सकें कि उनके फैसलों का परिवार पर क्या असर पड़ता है। जब उनकी कोई बात गलत लगे, तो उन्हें तर्क के साथ यह समझाने की जरूरत होती है कि इससे क्या नुकसान हो सकते हैं। अगर उनके कार्यों के परिणाम अच्छे हों, तो सराहना के जरिए उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, इससे उनके भीतर आत्मविश्वास का निर्माण होता है।
कॉन्फिडेंट बनाएं
यह बात सच है कि माता-पिता अपने बच्चों का बिना किसी अपेक्षा के पालन-पोषण करते हैं, लेकिन परिवार में छोटी-छोटी जिम्मेदारियां बच्चे के लिए भी निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि बच्चा उसे अपना जरूरी काम समझ कर पूरा करे। जैसे अपना कमरा साफ रखना, स्कूल बैग खुद तैयार करना और अपने कपड़ों और किताबों को व्यवस्थित करना इत्यादि। इससे वे आत्मनिर्भर बनना सीखते हैं और उन्हें परिवार के प्रति अपने योगदान का एहसास होता है। जब बच्चे अपना काम खुद करने लगते हैं, तो वे अधिक जिम्मेदार बनते हैं।
फैसले लेने में करें शामिल
बच्चों को घर के कार्यों और छोटे-बड़े निर्णय में शामिल करना जरूरी है। उनकी ओर से दिए गए विकल्पों और सुझावों पर भी विचार करना चाहिए। जैसे- घर में कोई नया उपकरण खरीदना हो या छुट्टी पर कहीं बाहर घूमने जाना हो, तो बच्चों की राय लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। इससे उन्हें इस बात का एहसास होता है कि परिवार में उनका भी महत्त्व है और इन सब बातों से बच्चों में जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती है। बच्चे को सही या गलत फैसले का एहसास कराने के लिए उस पर भरोसा जताना भी जरूरी है। मगर इस दौरान उसके कार्यों पर नजर रखने की आवश्यकता होती है, ताकि अगर वह कोई गलती करता है, तो तत्काल उसका सही मार्गदर्शन किया जा सके।
