रमजान आत्मशुद्धि, दान-पुण्य, नमाज और कुरान की तिलावत का महीना होता है। इस दौरान शाम को खजूर से रोजा खोलना सुन्नत माना गया है। इसका हदीसों में भी उल्लेख किया गया है कि वे इफ्तार के समय ताजा या सूखे खजूर से रोजा खोलते थे। आज भी दुनिया भर के मुसलमान इस परंपरा का पालन करते हैं। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि दिन भर भूखे-प्यासे रहने के बाद शरीर को पानी की जरूरत अधिक होती है और यह कमी खजूर पूरी करने में मदद करता है।
दरअसल, खजूर में पोटेशियम और प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा अधिक होती है जो शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं। यही वजह है कि लोग खजूर से रोजा खोलते हैं। लेकिन बाजार में मिलावटी और नकली खजूर भी खूब बिकते हैं, जो सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। हालांकि, कुछ तरीके हैं जिनकी मदद से असली खजूर की पहचान कर सकते हैं।
जब खजूर की डिमांड बढ़ती है तो मार्केट में मिलावट तेज हो जाती है। कई बार जंगली कच्चे खजूर को गुड़ के पानी में उबाल दिया जाता है। इसके बाद ये असली खजूर की तरह दिखने लगता है और फिर इसे अच्छी तरह सुखाकर बेच दिया जाता है।
अलग होती है मिठास
असली खजूर में हल्की और प्राकृतिक मिठास की खुशबू आती हैं। वहीं, मिलावटी खजूर में केमिकल जैसी गंध आ सकती है। ऐसे में इसे सूंघ कर पता कर सकते हैं।
पानी से करें जांच
असली खजूर की पहचान करने का सबसे आसान तरीका है इसे पानी में डाल दें। अगर पानी में यह रंग छोड़ता है तो फिर मिलावटी हो सकता है। वहीं, असली खजूर रंग नहीं छोड़ता है।
स्वाद से करें पहचान
मिलावटी खजूर थोड़ा सख्त होता है और चबाने में मुश्किल लगता है। मिठास से स्वाद बिगड़ सकता है। वहीं, असली खजूर मुलायम होता है और मुंह में डालते ही आसानी से घुलने लगता है और स्वाद में प्राकृतिक मिठास होती है।
मोटा होता है
अगर खजूर हल्का, सूखा या फिर ज्यादा मोटा है तो उसे नहीं लेना चाहिए। असली खजूर, छुहारे की तुलना में थोड़ा सा अधिक मोटा और गूदेदार होता है।
डिस्क्लेमर
आर्टिकल में लिखी गई सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य जानकारी है। किसी भी प्रकार की समस्या या सवाल के लिए एक्सपर्ट से जरूर परामर्श करें।
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