रजनीगंधा अपनी भीनी-भीनी खुशबू और खूबसूरत सफेद फूलों के लिए बेहद पसंद किया जाता है। अगर आप भी इसे गमले में लगाने की सोच रहे हैं और चाहते हैं कि पौधे में नर्सरी जैसे लंबे, स्वस्थ और ज्यादा फूल खिलें, तो शुरुआत से ही कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा। सही बल्ब चुनने से लेकर मिट्टी, धूप, पानी और खाद तक, हर छोटी बात पौधे की बढ़त और फूलों की क्वालिटी पर असर डालती है। आइए जानते हैं कि रजनीगंधा लगाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

सबसे पहले सही बल्ब चुनें

रजनीगंधा में फूलों की क्वालिटी काफी हद तक बल्ब पर निर्भर करती है। इसलिए हमेशा बड़े, सख्त और स्वस्थ बल्ब चुनें। सड़े, कटे-फटे या बहुत छोटे बल्ब लगाने से पौधे कमजोर रह सकते हैं और फूल कम आते हैं। रजनीगंधा का पौधा बीज की बजाय बल्ब (Bulb) से उगाया जाता है। बल्ब मिट्टी के अंदर बनने वाला वह हिस्सा है, जो छोटे प्याज जैसा दिखता है। इसे गमले या जमीन में लगाने पर इसी से नया पौधा और फूल निकलते हैं।

सही आकार का गमला लें

रजनीगंधा को लगाने के लिए कम से कम 10–12 इंच का गमला चुनें। गमले में पानी निकासी (Drainage Hole) जरूर हो। 10–12 इंच के गमले में 3–5 बल्ब लगाए जा सकते हैं।

मिट्टी ऐसी होनी चाहिए

रजनीगंधा को हल्की, भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी पसंद होती है। इसके लिए आप 40% गार्डन सॉयल, 30% कंपोस्ट या अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद, 30% रेत या कोकोपीट मिला सकते हैं। इससे जड़ों में पानी नहीं ठहरता और बल्ब सड़ने का खतरा कम रहता है।

रोज 5–6 घंटे धूप जरूरी

रजनीगंधा धूप पसंद करने वाला पौधा है। रोज कम से कम 5–6 घंटे सीधी धूप मिलने पर पौधा अच्छी तरह बढ़ता है। कम धूप मिलने पर पत्तियां तो निकल सकती हैं, लेकिन फूल कम या छोटे आ सकते हैं।

पानी जरूरत के अनुसार दें

मिट्टी की ऊपरी परत सूखने लगे, तभी पानी दें। लगातार गीली मिट्टी रखने से बल्ब सड़ सकते हैं।

खाद कब दें?

रोपाई के 30–40 दिन बाद हल्की मात्रा में जैविक खाद या वर्मी कम्पोस्ट डाल सकते हैं। जब पौधे में फूल की डंडी बनने लगे, तब केले के छिलके की खाद देने से फूलों की क्वालिटी बेहतर हो सकती है।

फूल खिलने के बाद क्या करें?

फूल सूखने पर केवल फ्लावर स्टिक काटें। पत्तियों को तुरंत न हटाएं। हरी पत्तियां प्रकाश संश्लेषण करके बल्ब में ऊर्जा जमा करती हैं। यही ऊर्जा अगले सीजन में बेहतर फूल आने में मदद करती है।

एक गलती जो लोग सबसे ज्यादा करते हैं

कई लोग पौधा लगाने के कुछ ही दिनों बाद बार-बार गमले की जगह बदल देते हैं या जरूरत से ज्यादा खाद और पानी देने लगते हैं। इससे पौधे की ग्रोथ पर असर पड़ता है।