फिटनेस के लिए लोग आजकल अपनी लाइफस्टाइल और डाइट को हेल्दी बनाने की कोशिश में लगे रहते हैं। ऐसे में प्रोटीन पाउडर और प्रोटीन बार का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। जिम जाने वाले लोगों से लेकर बिजी प्रोफेशनल्स तक, कई लोग इन्हें वर्कआउट के बाद या जल्दी भूख लगने पर स्नैक के तौर पर लेते हैं। लेकिन क्या आपको पता है बाजार में मिलने वाले सभी प्रोटीन पाउडर और बार कितने सुरक्षित होते हैं?

इन्हें खरीदते समय आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। क्या आपको ‘थर्ड पार्टी टेस्टेड’ के बारे में पता है, अगर नहीं तो इसकी जानकारी भी आपको होनी चाहिए। न्यूट्रिशनिस्ट लैला अल-नईफ ने प्रोटीन सप्लीमेंट्स की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई है। आइए जानें इसके बारे में।

न्यूट्रिशनिस्ट ने एक पॉडकास्ट में कहा कि कई प्रोटीन पाउडर और उनसे बने प्रोटीन बार में हानिकारक धातुएं, जहरीले तत्व या कीटनाशकों के अवशेष हो सकते हैं। इसके बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या प्रोटीन बार और पाउडर वास्तव में असुरक्षित हैं? और पैकेट पर लिखा ‘Third-Party Tested’ आखिर क्या बताता है?

प्रोटीन पाउडर और बार में कंटैमिनेशन का खतरा क्यों हो सकता है?

जब इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस की टीम ने आर्टेमिस हॉस्पिटल के क्लिनिकल न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स विभाग के टीम लीड अंशुल सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि इस चिंता को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रोटीन पाउडर और बार बनाने में व्हे (whey), सोया, मटर और चावल जैसे स्रोतों से प्रोटीन लिया जाता है।

पौधों से मिलने वाले इन प्रोटीन स्रोतों में खेती के दौरान मिट्टी से कुछ मात्रा में भारी धातुएं या कीटनाशकों के अवशेष पहुंच सकते हैं। प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग के दौरान भी क्वालिटी पर असर पड़ सकता है।

‘Third-Party Tested’ का आखिर मतलब क्या होता है?

आजकल कई सप्लीमेंट ब्रांड अपने प्रोडक्ट पर ‘Third-Party Tested’ लिखते हैं। इसका मतलब है कि प्रोडक्ट की जांच निर्माता कंपनी से अलग किसी स्वतंत्र लैब या संस्था ने की है।

ऐसी जांच में यह देखा जा सकता है कि प्रोडक्ट में मौजूद सामग्री और लेबल पर दी गई जानकारी में समानता है या नहीं। साथ ही भारी धातुओं, हानिकारक माइक्रोब्स और अन्य संभावित कंटैमिनेंट्स की भी जांच की जा सकती है।

यह ग्राहकों के लिए क्वालिटी और ट्रांसपेरेंसी का एक अतिरिक्त स्तर माना जा सकता है। हालांकि, अंशुल सिंह के मुताबिक, अगर किसी प्रोडक्ट पर थर्ड पार्टी टेस्टिंग या सर्टिफिकेशन का उल्लेख नहीं है, तो इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि वह प्रोडक्ट असुरक्षित या खराब गुणवत्ता वाला है।

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क्या प्रोटीन बार को रोज खाना सही है?

प्रोटीन बार यात्रा के दौरान या वर्कआउट के बाद एक सुविधाजनक स्नैक हो सकता है। लेकिन इसे रोजाना खाने की आदत बनाकर घर के सामान्य और पौष्टिक खाने को पूरी तरह रिप्लेस करना सही नहीं है।

अंडे, दूध, दही, दालें, बीन्स, टोफू, नट्स, मछली और चिकन जैसे फूड्स प्रोटीन के साथ विटामिन, मिनरल्स, हेल्दी फैट और फाइबर भी देते हैं। यही वजह है कि पोषण के लिहाज से होल फूड्स को प्रायोरिटी देना बेहतर माना जाता है।

वहीं, बाजार में मिलने वाले कई प्रोटीन बार में अतिरिक्त चीनी, आर्टिफिशियल स्वीटनर और ज्यादा प्रोसेस्ड इंग्रीडिएंट्स हो सकते हैं। इसलिए इन्हें खरीदते समय सिर्फ पैकेट पर लिखे ‘हाई प्रोटीन’ दावे को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए।

प्रोटीन पाउडर या प्रोटीन बार खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

भरोसेमंद और अच्छी प्रतिष्ठा वाले ब्रांड का प्रोडक्ट चुनें। इंग्रीडिएंट लिस्ट जरूर पढ़ें और ऐसे प्रोडक्ट को प्राथमिकता दें, जिसमें सामग्री की जानकारी साफ हो। जहां उपलब्ध हो, वहां NSF Certified for Sport, Informed Choice, Informed Sport या USP Verified जैसे स्वतंत्र सर्टिफिकेशन देखे जा सकते हैं। ज्यादा एडेड शुगर, आर्टिफिशियल कलर और जरूरत से ज्यादा एडिटिव्स वाले प्रोडक्ट से बचें। मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें। पैकेजिंग सील्ड है या नहीं, इस पर ध्यान दें।

डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञ की राय पर आधारित है। किसी भी सप्लीमेंट को अपनी डाइट का नियमित हिस्सा बनाने से पहले डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह लेना उचित है।