धरती पर पाए जाने वाले हर जीव की अपनी कोई न कोई खासियत होती है। कोई अपने शिकार, तो कोई अपने खूबसूरत रंग के लिए जाना जाता है। कई ऐसे पक्षी हैं जो तेज और लगातार कई दिनों तक उड़ने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन एक ऐसा छोटा सा जीव है जो सूरज की सतह के बराबर या उससे भी अधिक गर्म बुलबुला बनाने के लिए जाना जाता है। यह छोटा सा जीव झींगा होता है।

एक छोटा सा झींगा आपकी हथेली में आसानी से समा सकता है। लेकिन कुछ ही पल में ये ऐसा सूक्ष्म (माइक्रोस्कोपिक) बुलबुला बना सकता है, जिसका तापमान सूरज की सतह के बराबर या उससे भी अधिक हो सकता है। यह सुनने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन यह अद्भुत क्षमता पिस्टल श्रिम्प (जिसे स्रैपिंग श्रिम्प भी कहते हैं) में पाई जाती है। इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह छोटा समुद्री जीव दुनिया के गर्म समुद्री इलाकों में पाया जाता है। इसके पास एक खास तरह का पंजा होता है, जो इतनी तेज गति से बंद होता है कि उससे कैविटेशन बुलबुला बन जाता है। जब यह बुलबुला फटता या सिकुड़ता है, तो उसके भीतर कुछ देर के लिए तापमान हजारों डिग्री तक पहुंच सकता है।

साथ ही इससे एक बेहद शक्तिशाली शॉकवेव भी पैदा होती है, जो आसपास मौजूद छोटे शिकार को बेहोश या मार सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पिस्टल श्रिम्प का शरीर सूरज से ज्यादा गर्म होता है। उसके पंजे से बनने वाला यह सूक्ष्म कैविटेशन बुलबुला ही सिकुड़ने के दौरान एक सेकंड के बेहद छोटे हिस्से के लिए इतना अधिक तापमान हासिल करता है।

इतना छोटा झींगा इतनी ज्यादा गर्मी कैसे पैदा करता है

पिस्टल श्रिम्प का एक पंजा सामान्य पंजों से काफी बड़ा होता है। यह किसी साधारण पंजे की तरह नहीं, बल्कि स्प्रिंग वाली पिस्तौल की तरह काम करता है। जब यह झींगा अपने इस बड़े पंजे को बेहद तेज गति से बंद करता है, तो उससे पानी की एक तेज धार निकलती है। इससे पानी में कम दबाव वाला एक छोटी सी खाली जगह (कैविटी) बनाती है, जिसे कैविटेशन कहा जाता है। यह बुलबुला तेजी से फैलता है और फिर पलभर में सिकुड़कर फट जाता है। इस दौरान इसके अंदर का दबाव इतना बढ़ जाता है कि वैज्ञानिकों के अनुसार कुछ क्षणों के लिए इसका तापमान 4,000 से 8,000 केल्विन (करीब 3,700 से 7,700 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच सकता है। यह तापमान सूरज की सतह करीब (5,500 डिग्री सेल्सियस) के बराबर या कुछ अनुमान के अनुसार उससे भी अधिक हो सकता है। हालांकि यह अत्यधिक गर्मी केवल एक सेकंड के बेहद छोटे हिस्से तक ही रहती है और सिर्फ उस सूक्ष्म बुलबुले के अंदर ही सीमित रहती है।

बुलबुले के साथ शक्तिशाली शॉकवेव पैदा होती है

जब यह बुलबुला सिकुड़कर फटता है, तो इससे एक बेहद शक्तिशाली शॉकवेव भी निकलती है। यह पानी में इतनी ताकत से फैलती है कि आसपास मौजूद छोटी मछलियों, कीड़ों और अन्य छोटे समुद्री जीवों को बेहोश या मार सकती है। पिस्टल श्रिम्प के पंजे की आवाज भी उसके आकार के मुकाबले समुद्री जीवों से सबसे तेज आवाजों में गिनी जाती है। हालांकि, इसकी तीव्रता अलग-अलग प्रजातियों और पानी में मापने के तरीके के अनुसार बदल सकती है। जब बुलबुला फटता है तो उस समय उससे हल्की सी चमक भी निकलती है, जिसे सोनोल्यूमिनेसेंस कहा जाता है। इसमें सिकुड़ते हुए बुलबुले प्रकाश के रूप में ऊर्जा छोड़ते हैं।

पिस्टल श्रिम्प में ऐसा क्यों होता है

पिस्टल श्रिम्प यह ताकतवर स्नैप कई कामों के लिए इस्तेमाल करता है, जैसे…

शिकार को खाने से पहले बेहोश करना या मार देना।
खुद को शिकारी जीवों से बचाना।
अपने क्षेत्र में घुसने वाले दूसरे झींगों या प्रतिद्वंदियों को डराकर भगाना।

पिस्टल श्रिम्प का बड़ा पंजा शिकार करने के साथ ही खुद की रक्षा करने का भी एक प्रभावी हथियार है।

इसकी क्षमता से वैज्ञानिक क्यों हैं हैरान

पिस्टल श्रिम्प पर वैज्ञानिक कई दशकों से शोध कर रहे हैं। इसकी वजह है कैविटेशन की वह अनोखी प्रक्रिया, जो बेहद छोटे स्तर पर भी अत्यधिक तापमान और दबाव पैदा कर सकती है। इस प्रक्रिया को समझने से वैज्ञानिक सिर्फ यह नहीं जान पाते कि पिस्टल श्रिम्प शिकार कैसे करता है, बल्कि इसका इस्तेमाल इंजीनियरिंग और चिकित्सा में भी किया जाता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि जहाजों के प्रोपेलर और पंप कैविटेशन से कैसे खराब होते हैं।

इसके अलावा अल्ट्रासाउंड तकनीक और कुछ आधुनिक चिकित्सा प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में भी इसका उपयोग किया जाता है। पिस्टल श्रिम्प यह साबित करता है कि प्रकृति के सबसे अद्भुत चमत्कार हमेशा बड़े जीवों में ही नहीं होते। कई बार वे सिर्फ कुछ सेंटीमीटर लंबे एक छोटे से जीव के भीतर छिपे होते हैं, जिसके पास दुनिया के सबसे अनोखे प्राकृतिक हथियारों में से एक होता है।

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