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प्रशांत किशोर को कैसे मिला था नरेंद्र मोदी की स्पीच लिखने का काम? दिलचस्प है किस्सा

प्रशांत किशोर ने एक इंटरव्यू के दौरान पूरा किस्सा सुनाते हुए बताया कि किस तरह उनकी मोदी जी से मुलाकात हुई और उन्हें उनकी स्पीच लिखने का मौका मिला।

प्रशांत किशोर को इस तरह मिला था पीएम मोदी के लिए स्पीच लिखने का काम (फोटो क्रेडिट- एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की जीत के बाद राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर चर्चा में है। चुनाव में उन्होंने ही टीएमसी के लिए रणनीति बनाई थी। बता दें कि साल 2014 में हुए आम चुनाव में प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी के लिए काम किया था। इन चुनावों में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी, जिसके बाद नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने थे। एक इंटरव्यू के दौरान प्रशांत किशोर ने इस बात का खुलासा किया था कि आखिर उन्हें नरेंद्र मोदी की स्पीच लिखने का काम किस तरह से मिला।

‘द लल्लनटॉप’ के साथ बातचीत में प्रशांत किशोर ने पूरा किस्सा सुनाते हुए बताया कि किस तरह उनकी मोदी जी से मुलाकात हुई। प्रशांत किशोर ने बताया कि जब वह यूएन में नौकरी कर रहे थे, उस दौरान उन्होंने कुपोषण पर एक पेपर लिखा था, जिसके बाद उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय से फोन आ गया।

इस तरह मिला था नरेंद्र मोदी की स्पीच लिखने का काम: वीडियो में प्रशांत किशोर बता रहे हैं, “तुगलक एक पेपर है साउथ में। काफी प्रसिद्ध पेपर रहा है। उसके एडिटर मोदी जी के बहुत प्रिय थे। चो रामास्वामी के निमंत्रण पर मोदी जी अप्रैल 2011 में जा रहे थे बोलने। उनकी एक टीम थी बहुत ही क्वालिफाइड लोगों की टीम जो मोदी जी के लिए स्पीच लिखती थी। तो मोदी जी के मन में कुछ आया होगा कि उन्होंने बोला कि क्योंकि यह स्पीच पूरी अंग्रेजी में लिखी जानी है तो प्रशांत किशोर को भी इसमें बैठाइये। तो मैं भी बैठा, मैंने भी कुछ लिखा होगा उनको अच्छा लगा होगा। जिसके लिए उन्हें प्रशंसा मिली होगी। तो मैं उनकी स्पीच लिखने वाली टीम का हिस्सा बन गया।”  प्रशांत किशोर ने ऐसा क्या लिखा कि आ गया नरेंद्र मोदी के ऑफिस से फोन?

 

इस तरह हुई थी नरेंद्र मोदी से प्रशांत किशोर की मुलाकात: वीडियो में प्रशांत किशोर बता रहे हैं, “यूएन में नौकरी के दौरान मैंने कुपोषण पर एक पेपर लिखा था। जिसको लेकर मुझे गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय से फोन आया। नरेंद्र मोदी ने मुझे विकल्प दिया कि यहां आइये और काम कीजिए, शिकायत क्यों कर रहे हैं। एक-डेढ़ साल तक बात करते रहे। मैंने मोदी जी से कहा कि ठीक है मैं नौकरी छोड़ देता हूं लेकिन बदले में आप मुझे हायरार्की का हिस्सा नहीं बनाएंगे। मैं आपके साथ सीधे तौर पर काम करूंगा।”

 

 

 

जब पत्रकार ने प्रशांत किशोर से सवाल पूछा कि केवल आपको ही साथ ही मोदी जी सीधे तौर पर काम करने के लिए क्यों राजी हुए? क्या आपने कोई मंत्र फूंका था? इस पर प्रशांत किशोर ने कहा, “मैं गुजरात का हूं नहीं, उनकी जाति का हूं नहीं और संघ से आता नहीं। ज्यादातर आपको बैकग्राउंड चाहिए होता है ताकि लोग आप पर विश्वास कर सकें और आपको सुन सकें। मोदी जी ने देखा होगा कि इस लड़के में कोई क्षमता होगी, जिसकी वजह से उन्होंने मुझे चुना।”

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