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Happy Friendship Day 2018: जानें क्‍यों दुनियाभर में मनाया जाता है फ्रेंडशिप डे

Happy Friendship Day 2018: साल 1935 में अमेरिकी सरकार ने एक निर्दोष की हत्या कर दी थी, जिससे दुखी होकर मृतक के दोस्त ने भी आत्महत्या कर ली थी। तभी इस दिन को इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे के रूप में मनाने की मांग उठी थी। लेकिन...

Happy Friendship Day 2018: साल 1935 में अमेरिका की एक घटना की वजह से आज भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में फ्रेंडशिप डे सेलिब्रेट किया जाता है। यह दिन हर साल अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाता है। पिछले साल 6 अगस्त को फ्रेंडशिप डे सेलिब्रेट किया गया था लेकिन इस बार 5 अगस्त को यह दिन मनाया जा रहा है। आज इस दिन को दोस्ती के त्योहार के रूप में देखा जाता है लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि इस दिन एक दोस्त ने अपने दोस्त के लिए खुद की जान भी कुर्बान कर दी थी। उन दोस्तों की याद में ही इस दिन की शुरुआत मानी जाती है। दरअसल, ऐसा माना जाता है कि साल 1935 में अमेरिकी सरकार ने एक निर्दोष की हत्या कर दी थी, जिससे दुखी होकर मृतक के दोस्त ने भी आत्महत्या कर ली थी। तभी इस दिन को इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे के रूप में मनाने की मांग उठी थी।

इसके बाद दक्षिणी अमेरिका के लोगों ने उन निर्दोष दोस्तों की मौत पर बहुत गुस्सा दिखाया था, जिसके बाद अमेरिकी सरकार को उनकी बात माननी पड़ी लेकिन इसमें भी 21 साल लगे थे। साल 1958 में सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूर किया और पूरी दुनिया में अगस्त के पहले रविवार को इंटरनेशनल डे घोषित किया गया था। हालांकि भारत में फ्रेंडशिप डे का महत्व आज से नहीं है। इतिहास के पन्नोंं में ऐसी बहुत सी मिसालें मौजूद हैं जो आज भी जीवंत नजर आती हैं। वैसे तो भारत में फ्रेंडशिप डे इंटरनेशनल के रूप में कुछ ही सालों से मनाया जाता है लेकिन भारत में ‘महाभारत’ और ‘रामायण’ के समय से ही दोस्ती का बड़ा महत्व रहा है।

हनुमान – सुग्रीव: दोस्ती की बात हो बजरंगबली हनुमान का जिक्र ना हो तो सब अधूरा है। इनकी दोस्ती सुग्रीव से थी, जिन्होंने पूरी तरह हर परिस्थिति में हनुमान जी का साथ दिया था और सीता जी को रावण की कैद से छुड़ाने में भी मदद की थी।

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कृष्ण – सुदामा: कृष्ण-सुदामा की दोस्ती के बिना सबकुछ अधूरा है। दोस्त वो है, जो बिना कहे अपने दोस्त की हर मुश्किल आसान कर दें। कुछ ऐसा ही भगवान कृष्ण ने किया था। उन्होंने अपने गरीब मित्र की मित्रता का भी मान रखा और उनकी गरीबी को भी हर लिया था।

कृष्ण- अर्जुन: कृष्ण – अर्जुन के एक अच्छे मित्र और मार्गदर्शक रहे हैं। उन्होंने अर्जुन को उस वक्त संभाला जब वो परिस्थितियों के भंवर में फंसकर युद्ध छोड़कर जा रहे थे। तब कृष्ण ने अर्जुन को मार्ग दिखाया और अर्जुन ने भी मित्र की बातों का मान रखा। इतिहास और धर्मशास्त्र गवाह है कि भारत मित्रता के क्षेत्र में सबसे आगे रहा है। यहां की मित्रता जन्म-जनमांतर की होती है।

वहीं आज के समय में फ्रेंडशिप डे रविवार को होने की वजह से सेलिब्रेट का मजा दोगुना हो गया। इस दिन को और भी खास बनाने के लिए दोस्तों की भीड़ से दिन गुलजार रहता है। कई दोस्त सिनेमा हॉल में मूवी देखकर फ्रेंडशिप डे सेलिब्रेट करते हैं। इस दिन को यादगार बनाने के लिए युवा पीढ़ी एक-दूसरे को फ्रेंडशिप बैंड बांधती है तो वहीं बड़े आपस में शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।

 

 

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