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पारण और भंडारे के व्यंजन

शारदीय नवरात्रि समाप्त होने को है। कुछ लोग अष्टमी को पारण करते हैं, कुछ नवमी को।

पारण और भंडारे के व्यंजन
सांकेतिक फोटो।

पारण यानी उपवास के बाद अन्नाहार। आठ या नौ दिन उपवास के बाद शरीर का चक्र कुछ बदल-सा जाता है। ऐसे में पारण के समय कुछ ऐसा आहार लेने की परंपरा रही है, जो हल्का और सुपाच्य हो। पारण के साथ ही कुछ लोग भंडारा भी करते हैं। कन्या जिमाते, मंदिरों में लोगों को भोजन कराते हैं। इसलिए पारण और भंडारे के लिए कुछ व्यंजन बनते हैं। कुछ ऐसे ही व्यंजनों की चर्चा।

तरीदार गट्टे

गट्टा यों तो राजस्थान का लोकप्रिय व्यंजन है, पर इसे आजकल देश के बहुत सारे हिस्सों में बनाया और खाया जाता है। राजस्थान में सवामणी यानी मंदिरों में किए जाने वाले भंडारे में भी इसे परोसा जाता है। गट्टे बेसन से बनते हैं। इसे कढ़ी का ही एक रूप कह सकते हैं, पर इसे चूंकि सब्जी की तरह पकाया और परोसा जाता है, इसलिए इसका स्वाद और इसके बनाने का तरीका थोड़ा भिन्न होता है। इसमें चूंकि लहसुन-प्याज का इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए यह सात्विक भोजन की श्रेणी में आता है और इसे पारण में भी शामिल कर लिया जाता है। यों तो गट्टे दही में बनाए जाते हैं, पर आप चाहें, तो थोड़े टमाटर की ग्रेवी के साथ भी पका सकते हैं।

गट्टे बनाने के दो हिस्से हैं। पहला, गट्टे तैयार करना और दूसरा, इसकी तरी यानी ग्रेवी तैयार करना। गट्टे बनाने में थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत होती है, नहीं तो गट्टे नरम नहीं बनते और फिर खाने का मजा खराब हो जाता है। गट्टे बनाने के लिए पहले एक कटोरी बेसन को छान लें। छानने से गुठलियां रहने की आशंका दूर हो जाती है और अगर इसमें कोई तिनका वगैरह है, तो वह भी निकल जाता है।

अब बेसन में आधा छोटी चम्मच कुटी लाल मिर्च, आधा चम्मच धनिया पाउडर, चुटकी भर हींग, चुटकी भर हल्दी पाउडर और साबुत सौंफ, जरूरत भर का नमक डालें और चार-पांच चम्मच घी डाल कर अच्छी तरह हथलियों पर रगड़ते हुए मिला लें। अब इसमें चौथाई कटोरी दही डालें और अच्छी तरह गूंथें। अगर बेसन अच्छी तरह नहीं गुंथ पाया है, तो उसमें पानी का छींटा मारें और गूंथें। कड़ा गुंथना चाहिए, क्योंकि इसे हमें पानी में उबालना है। गूंथने के बाद मिश्रण को पंद्रह से बीस मिनट के लिए ढंक कर आराम करने दें।

अब एक भगोने या गहरी पेंदी के बर्तन में भरपूर पानी उबालने रख दें। गुंथे हुए बेसन में से रोटी बनाने भर का पेड़ा लें और चकले या किसी चपटी सतह पर रख कर बेलनाकार लंबी बत्ती बनाएं। इसी तरह सारे बेसन की बत्तियां बना लें और सबको उबलते हुए पानी में डाल दें। आंच मध्यम रखें और बर्तन पर ढक्कन लगा कर पंद्रह से बीस मिनट तक पकने दें। पंद्रह मिनट बाद ढक्कन हटा कर देखें, अगर गट्टे पानी की सतह पर तैरने लगे हैं और उनके बाहरी हिस्से में सफेद दानेदार बुलबुले उभर आए हैं, तो समझिए कि ये पक कर तैयार हैं। आंच बंद कर दें। गट्टों को बाहर निकाल कर ठंडा होने दें। पानी को फेंकें नहीं, तरी में काम आएगा। ठंडा होने के बाद उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।

अब कड़ाही में चार-पांच चम्मच घी डालें और गरम होने दें। इसी में गट्टे के टुकड़ों को हल्का सुनहरा होने तक सेंक लें। फिर गट्टों को ठंडा हेने के लिए अलग रख दें। इसी कड़ाही में तरी की तैयारी करें। तरी के लिए दो कटोरी दही लें और अच्छी तरह फेंट लें, ताकि कोई गुठली न रहने पाए। इसी दही में दो छोटा चम्मच धनिया पाउडर, एक चम्मच गरम मसाला, चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर, दो चुटकी हींग, आधा छोटी चम्मच लाल मिर्च पाउडर, जरूरत भर का नमक डालें और अच्छी तरह मिला कर अलग रख दें। अगर तरी गाढ़ी बनाना चाहते हैं तो इसमें टमाटर डालना अच्छा रहेगा। इसके लिए दो मध्यम आकार के टमाटर पीस लें।

अब कड़ाही के बचे हुए घी को गरम करें और उसमें चुटकी भर की मात्रा में जीरा, अजवाइन, सौंफ और दो तेजपत्ता डाल कर तड़काएं। फिर इसमें पिसा हुआ टमाटर डाल कर घी छोड़ने तक चलाते हुए पकाएं। टमाटर पक जाए तो आंच बंद कर दें और दही का घोल डालें। अच्छी तरह चलाकर सारी सामग्री को मिलाएं और फिर गैस जला कर मध्यम आंच पर कर दें। चलाते हुए उबाल आने तक पकाएं। जब उबाल आने लगे तो तले हुए गट्टों में से दो-तीन गट्टे तोड़ कर चूरा बनाएं और ग्रेवी में डाल दें। साथ ही सारे गट्टे इसमें डाल दें और एक बार चला कर ढक्कन लगा दें। पांच से सात मिनट तक पकने दें। अगर तरी गाढ़ी लग रही है, तो इसमें थोड़ा पानी डाल सकते हैं।

पांच-सात मिनट बाद आंच बंद कर दें। पारण के लिए गट्टे तैयार हैं। अब इसके ऊपर घी गरम करके उसमें हींग और चौथाई चम्मच कश्मीरी मिर्च पाउडर डालें और गट्टे के ऊपर तड़का लगा दें। इससे रंग अच्छा आता है।

आटे का हलवा

जकल आमतौर पर लोग सूजी का हलवा बनाते हैं। मगर आटे के हलवे का आनंद ही अलग होता है। पूजा में प्रसाद या पारण के लिए आटे के हलवे का ही चलन है। इसलिए पारण, प्रसाद और भंडारे के लिए आप भी आटे का ही हलवा बनाएं।आटे का हलवा बनाने में थोड़ी मेहनत जरूर करनी पड़ती है, मगर इसे बनाना कोई मुश्किल काम नहीं। कड़ाही में चार-पांच खाने के चम्मच बराबर घी गरम करें। उसमें दो कटोरी आटा छान कर डालें और चलाते हुए बादामी रंग आने तक सेंकें। आटे को चलाते रहना जरूरी है, नहीं तो जलने की आशंका रहती है। अगर घी कम लग रहा हो, तो और डाल सकते हैं। भूनने के बाद आटे को ठंडा होने के लिए छोड़ दें। फिर छन्नी से छान लें, ताकि गुठली न रहने पाए।

एक तरफ भगोने में पांच-छह कटोरी पानी और एक कटोरी चीनी डाल कर उबलने के लिए रख दें। चीनी अच्छी तरह घुल जाए, तो उसमें दो हरी इलाइची कूट कर डालें और आंच बंद कर दें। अगर हलवे में मेवे डाले चाहते हैं तो उन्हें भी काट कर पहले ही रख लें। अब कड़ाही में आटा डालें और चीनी वाला पान धीरे-धीरे डालते हुए चलाएं। थोड़ी-थोड़ी देर में दो-दो चम्मच घी और डालें और चलाते हुए अच्छी तरह मिलाएं, ताकि आटा सारा पानी सोख ले और सूखने लगे। जब आटा पानी सोख ले, तो आंच बंद कर दें और उसमें कटे मेवे और दो चम्मच घी और डाल कर चलाते हुए तीन से चार मिनट तक पकाएं। आटे का हलवा तैयार है। ल्ल

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First published on: 03-10-2022 at 04:03:18 am
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