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खतरनाक है नार्सिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर, जानिए कैसे होते हैं शिकार और इससे बचाव के तरीके

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर पर हजारों लाइक्स मिल जाते हैं। व्यक्ति उसी में खुश रहता है कि उसे इतने लोग पसंद करते हैं। लेकिन ऐसे में वह अपने अंदर की खूबसूरती को नजरअंदाज कर भौतिक सुंदरता की ओर बढ़ता है। और जब यह तारीफ नहीं मिलती तब वह डिप्रेशन में चला जाता है।

प्रतिकात्मक तस्वीर

नार्सिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर (एनपीडी) जिसे आत्ममुग्धता भी कहा जाता है। मनोविज्ञान के अनुसार एनपीडी एक स्तर के बाद भयंकर रोग बन जाता है। आपकी आत्ममुग्धता कब बीमारी बन जाती है। आपको खुद ही मालूम नहीं होता। अगर आपको हमेशा अपनी तारीफ सुनने की आदत है, दूसरों का मजाक उड़ाने में मजा आता है, दूसरों की पर्सनल लाइफ में अधिक दिलचस्पी लेते हैं और अपनी आलोचना सुनकर गुस्सा आता है तो सावधान हो जाएं। क्योंकि यह आत्ममुग्धता यानी नार्सिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर के लक्षण हो सकते हैं।

क्या है नार्सिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर: जैसे कोई पागल खुद को पागल या चोर खुद को चोर नहीं कहता वैसे ही कोई आत्ममुग्ध व्यक्ति अपनी आत्ममुग्धता समझ ही नहीं पाता। वह इसी मुगालते में रहता है कि वह सबसे श्रेष्ठ है। दरअसल, आत्ममुग्धता कोई अचानक आई बीमारी नहीं है। इसका पालन-पोषण बचपन से होता है। आत्ममुग्धता दो प्रकार की होती है, जिसमें एक अच्छी होती है तो दूसरी खराब। अच्छी और सेहतमंद आत्ममुग्धता में व्यक्ति अपनी कमियों को दूर करने के लिए खुद में आत्मविश्वास जगाता और खुद को दुलारता यानी पैंपर करता है। आत्ममुग्धता समस्या तब बन जाती है, जब व्यक्ति आत्मकेंद्रित हो जाता है। दूसरों की भावनाओं की कद्र नहीं करता। अपनी सिर्फ तारीफ सुनना पसंद करता है।

ये हो सकते हैं नार्सिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर के कारण: हाल ही में हुए कुछ शोध बताते हैं कि फेसबुक की लत आत्मविश्वास में कमी और आत्ममुग्धता से संबंध को दर्शाती है। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर पर हजारों लाइक्स मिल जाते हैं। व्यक्ति उसी में खुश रहता है कि उसे इतने लोग पसंद करते हैं। लेकिन ऐसे में वह अपने अंदर की खूबसूरती को नजरअंदाज कर भौतिक सुंदरता की ओर बढ़ता है। और जब यह तारीफ नहीं मिलती तब वह डिप्रेशन में चला जाता है।

ऐसे बनते हैं आप शिकार : अक्सर लोग खुद से प्रेम में इतने लीन हो जाते हैं कि दुनिया के बाकी सारे इंसान उन्हें अपने आगे अदना लगने लगते हैं। जो लोग आत्ममुग्धता के शिकार होते हैं वे थोड़ी-सी आलोचना से बिखर जाते हैं। उनका आत्मविश्वास खत्म होने लगता है। वे खुद को कमतर आंकने लगते हैं। दरअसल, यह स्थिति उन लोगों में अधिक पैदा होती
है, जिन्होंने बचपन से अपनी सिर्फ तारीफ सुनी होती है। आलोचना के शिकार कम ही हुए हों। जिन लोगों को अपनी तारीफ सुनने की आदत हो जाती है उनके बहुत से गुण उनके चापलूस ही मार देते हैं। और एक वक्त ऐसा आता है जब वे खुद को सबसे कमजोर मानने लगते हैं। क्योंकि प्रतिस्पर्धा में जीत नहीं पाते। और खुद की कमियां एक साथ आगे आती हैं। इसलिए ज्यादा तारीफ भी अच्छी नहीं होती। आत्मविश्वास और अति आत्मविश्वास, स्वाभिमान और अभिमान, गर्व और घमंड में फर्क होता है। इस फर्क को पहचान कर ही आप आत्ममुग्धता को समझ पाएंगे।

बचाव के उपाय: जो लोग इस रोग से पीड़ित होते हैं और जब उन्हें उनके मुताबिक तारीफ, मान-सम्मान नहीं मिलता तब वे कोफ्त में जीने लगते हैं। अवसाद और तनाव उन्हें घेर लेता है। इससे बचने का सबसे बेहतर उपाय है ध्यान यानी मेडिटेशन करना। ध्यान करने से आप खुद के बारे में जान पाते हैं। अपना मूल्यांकन कर इस बीमारी से बचा जा सकता है। हमें मालूम है कि हमारी कमियां क्या हैं और अच्छाइयां क्या हैं। इसलिए समय रहते खुद का मूल्यांकन करें। खुद को रचनात्मक कामों में लगाएं। अपनी तुलना किसी से न करें। आप जैसा दुनिया में एक ही है। अपनी सफलता का जश्न मनाएं, बस उसे सिर पर न चढ़ाएं। इन उपायों को अपना कर आप खुद को आत्ममुग्धता से बचा सकते हैं।

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