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दाना-पानी: त्योहारों पर विशेष

कई लोग मानते हैं कि व्रत का अर्थ है अन्न का त्याग करना। इसलिए वे व्रत वाले दिनों में फलाहार करते हैं, आलू, कुट््टु के आटे, सिंघाड़े के आटे, साबूदाने वगैरह से बनी तली हुई चीजें खाकर खूब पेट भर लेते हैं।

Author Updated: August 25, 2019 3:38 AM

मानस मनोहर

जन्माष्टमी का त्योहार आमतौर पर कम से कम छह दिन तक चलता है। इसके बाद व्रत और त्योहारों का मौसम शुरू हो जाता है। जन्माष्टमी के अवसर पर प्रसाद रूप में पंजीरी अवश्य बनती है। जो लोग व्रत रखते हैं, वे इस बात को लेकर अक्सर परेशान देखे जाते हैं कि क्या खाएं जिससे उनकी ऊर्जा भी बनी रहे और स्वास्थ्य भी ठीक रहे। इस बार त्योहारों को ध्यान में रखते हुए कुछ व्यंजन।

पंजीरी
जन्माष्टमी पर पंजीरी दो तरह से बनती है। एक, आटे से और दूसरी धनिया से। दोनों को बनाना बहुत आसान है। कई लोग जन्माष्टमी पर घर में कृष्ण का झूला डालते हैं और छह दिन तक पूजा-पाठ चलता रहता है। फिर छठे दिन भंडारा करते हैं। इस बीच रोज प्रसाद रूप में लोगों को पंजीरी बांटी जाती है। ऐसे में धनिया की पंजीरी लंबे समय तक टिकाऊ होती है। यों आटे की पंजीरी भी जल्दी खराब नहीं होती।
धनिया की पंजीरी की खास बात यह है कि यह सेहत के लिए बहुत गुणकारी है। आयुर्वेद में कहा गया है कि भादों के महीने में धनिया का सेवन पेट के लिए बहुत फायदेमंद है। इसलिए अगर धनिया की पंजीरी प्रसाद रूप में बांटते हैं, तो यह लोगों के पेट के लिए भी फायदेमंद होगी।

धनिया की पंजीरी बनाना बहुत आसान है। इसके लिए आधा किलो साबुत धनिया लें। इसे धूप में सुखा लें, ताकि नमी निकल जाए। अगर धूप में रखना संभव नहीं हो पा रहा, तो गरम तवे पर थोड़ी देर चलाते हुए रखें और फिर उसे उतार लें। ध्यान रखें कि बस नमी निकालनी है, भूनना नहीं है। फिर जब धनिया ठंडा हो जाए, तो उसे मिक्सर में पीस लें, जैसे मसाला पीसते हैं। इसमें तीन सौ ग्राम बूरा या फिर पिसी हुई चीनी डाल कर मिला लें। करीब सौ ग्राम देसी घी डालें और दोनों हाथों से मसलते हुए ठीक से मिला लें। धनिया की पंजीरी तैयार है।

इसी तरह आटे की पंजीरी बनाना भी बहुत आसान है। इसमें डालने के लिए पहले कुछ मखाने के दानों को कूट कर या काट कर दो-तीन टुकड़े कर लें। अधा कप घिसी हुई नारियल की गरी यानी या गोला लें। कुछ चिरौंजी के दाने भी ले लें। एक कड़ाही में दो चम्मच देसी घी गरम करें और उसमें पहले मखाने के दाने डाल कर हल्का भूनें, फिर कद्दूकस किया हुआ नारियल डाल कर भूनें और सबसे बाद में चिरौंजी के दाने डालें और थोड़ी देर चलाते हुए भूनने के बाद उन्हें कड़ाही से बाहर निकाल कर अलग रख दें।

अब पंजीरी बनाने के लिए आधा किलो गेहूं का आटा लें। उसी कड़ाही में करीब सौ ग्राम देसी घी डालें और उसे गरम करें। आंच मध्यम रखें। फिर उसमें आटा डाल कर चलाते हुए भूनें। इसे तब तक भूनते रहें, जब तक कि आटे का रंग सुनहरा न हो जाए। ध्यान रखें कि आटा कहीं भी चिपक कर जले नहीं, नहीं तो पंजीरी का स्वाद खराब कर देगा। अगर घी कम लग रहा है, तो बीच में थोड़ा घी और डाल कर चलाएं और जब सोंधी खुशबू आने लगे और रंग हल्का बादामी हो जाए तो आंच बंद कर दें। आटे को कड़ाही से बाहर निकाल कर एक परात में ठंडा होने के लिए रख दें।

इसमें डालने के लिए भी तीन सौ ग्राम बूरा या पिसी चीनी पर्याप्त रहती है। जब आटा ठंडा हो जाए, तभी चीनी या बूरा डालें और मिला लें। ऊपर से तले हुए मेवे डालें और दोनों हाथों से मसलते हुए मिला लें। आटे की पंजीरी तैयार है। अगर अधिक लोगों के लिए प्रसाद तैयार करना है, तो आटे का कड़ा हलवा बना कर उसके लड्डू के आकार के गोले तैयार किए जा सकते हैं और फिर उन लड्डुओं को पंजीरी में लपेट कर प्रसाद रूप में बांटा जा सकता है।

व्रत के लिए
कई लोग मानते हैं कि व्रत का अर्थ है अन्न का त्याग करना। इसलिए वे व्रत वाले दिनों में फलाहार करते हैं, आलू, कुट््टु के आटे, सिंघाड़े के आटे, साबूदाने वगैरह से बनी तली हुई चीजें खाकर खूब पेट भर लेते हैं। जबकि व्रत और उपवास का विधान इसलिए किया गया था कि इस तरह पाचनतंत्र को ठीक रखने में मदद मिलती है। इसलिए अगर व्रत रख रहे हैं, तो कुछ भी न खाएं तो बेहतर। अगर आप श्रम करते हैं, दफ्तर में काम करते हैं, तो काम के लिए ऊर्जा संबंधी जरूरत पूरी करने के लिए कुछ हल्का-फुल्का खा सकते हैं। कुट््टू या सिंघाड़े के आटे की पूड़ी, टिक्की वगैरह खाने का मतलब है कि आपने रोज की तरह भेजन ही कर लिया। फिर व्रत का कोई मतलब नहीं।

अगर व्रत में जरूरी लगता है कि कुछ खाना ही है, तो उसके लिए दो चीजें आसानी से बन जाती हैं, जो ऊर्जा भी देंगी और पाचनतंत्र पर अधिक दबाव नहीं डालेंगी। मखाना, नारियल की कुछ कटी हुई कतलियां, कुछ कच्ची मूंगफली के दाने लें। एक कड़ाही में एक चम्मच घी गरम करें। उसमें पहले मखाने और मूंगफली एक साथ डाल कर तल लें, फिर नारियल की कतलियां डालें और सेंक लें। ठंडा होने पर इसमें कुछ काला नमक और हल्की पिसी चीनी डाल कर मिला लें। एक डिब्बे में रख लें और कभी-कभार इसमें से एक-दो दाने चबा लें।

अगर भूख बर्दात नहीं हो रही है, तो उसके लिए उबली हुई लौकी ले सकते हैं। सब्जी बनाने के लिए जिस तरह लौकी काटते हैं, वैसे काट लें। एक कुकर में आधा चम्मच देसी घी गरम करें। उसमें जीरे का तड़का लगाएं और लौकी को छौंक दें। मध्यम अंच पर दो-तीन सीटी लगा कर बंद कर दें। ऊपर से काला नमक डालें और खा लें।

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