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दाना-पानीः साग के साथ देसी स्वाद

पुरानी मान्यता है कि भोजन में एक शाक अवश्य होना चाहिए। शाक यानी साग शरीर की सफाई करता, रक्त संचार को सुचारु बनाता और आदमी को तंदरुस्त रखता है।

Author September 30, 2018 5:12 AM
शहरों में पालक शाक का पर्याय बन गया है, जबकि शाक की अनेक प्रजातियां हैं और सभी के अपने-अपने स्वाद और गुण हैं।

मानस मनोहर

पुरानी मान्यता है कि भोजन में एक शाक अवश्य होना चाहिए। शाक यानी साग शरीर की सफाई करता, रक्त संचार को सुचारु बनाता और आदमी को तंदरुस्त रखता है। आधुनिक भोजन विशेषज्ञ भी इस बात को मानते हैं। हर इलाके में अलग-अलग तरह का शाक उगते हैं, कुछ उगाए जाते हैं, पर शहरी जीवन में प्राय: वही शाक खाए जाते हैं, जो देखने में साफ-सुथरे-सुंदर नजर आते हैं। शहरों में पालक शाक का पर्याय बन गया है, जबकि शाक की अनेक प्रजातियां हैं और सभी के अपने-अपने स्वाद और गुण हैं। इस बार बनाते हैं, ऐसे ही कुछ शाक यानी साग।

पुई साग

पुई आमतौर पर अपने आप जंगलों में उग आने वाला शाक है। इसे उगाने के लिए किसी तरह की रासायनिक खाद का उपयोग नहीं होता। इस तरह यह दूसरी सब्जियों की अपेक्षा वैसे भी सेहत के लिए उपयुक्त है। यह हर जगह उपलब्ध नहीं होता, खासकर शहरी इलाकों के मॉल वाली सब्जियों की दुकानों पर। इसलिए लोगों को इसके बारे में जानकारी बहुत कम है। प्राय: लोग इसे मजदूर किस्म के लोगों का भोजन समझ कर नहीं खरीदते-खाते। पर पुई में गुण बहुत हैं। इसे खून बनाने की मशीन कहा जाता है। इसलिए खासकर महिलाओं के लिए यह शाक उत्तम होता है। इसका स्वाद भी लाजवाब होता है।

पुई का साग लोग अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग तरीके से बनाते हैं। इसे बनाने का एक तरीका तो पारंपरिक साग बनाने वाला ही है कि इसे ठीक से धोकर साफ कर लें। पत्तियों को डंठल से अलग करें और छोटा-छोटा काट कर सरसों तेल में जीरे और लाल मिर्च का तड़का देकर छौंक लें। जब तक इसका पानी सूख न जाए, पकाएं। इसे चावल-दाल या रोटी-परांठे के साथ सूखी सब्जी की तरह खाएं। इसे बनाने का दूसरा तरीका मसालेदार सब्जी के रूप में तैयार करने का है। इसके लिए कुछ दालों की जरूरत पड़ती है। इसमें डालने के लिए बिना छिलके वाली मसूर की दाल उत्तम मानी जाती है। वैसे चाहें तो बिना छिलके की मूंग दाल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इनमें से जो भी दाल आपको पसंद हो, उसे धोकर कम से कम तीन घंटे के लिए भिगो दें। फिर पुई की पत्तियों को धोकर छोटा-छोटा काटें और अलग रख लें। इसके साथ एक या दो मध्यम आकार के आलू भी छील कर काट लें।

अब एक कड़ाही में तेल गरम करें। उसमें भरपूर सरसों तेल डालें और जीरा, राई और साबुत लाल मिर्च का तड़का लगाएं। तड़का तैयार हो जाए, तो उसमें आलुओं को पहले छौंक दें। कड़ाही को ढंक कर थोड़ी देर पकने दें। जब आलू आधे पक जाएं तो उसमें पुई साग और भिगोई हुई दाल डाल दें। ध्यान रखें कि जब भी कोई पत्तेदार सब्जी बनाएं तो प्याज-टमाटर का इस्तेमाल न करें, स्वाद बिगड़ जाता है। पुई साग को छौंकते समय चाहें तो लहसुन का उपयोग कर सकते हैं। साग और दाल डालने के साथ ही उसमें नमक और गरम मसाला या सब्जी मसाला डाल दें और कड़ाही को ढंक कर सब्जियों को पकने दें। इसमें पानी डालने की बहुत जरूरत नहीं होती, क्योंकि पुई के पत्ते पर्याप्त पानी छोड़ते हैं। पर चूंकि इसमें आलू और दाल डाली गई है, इसलिए पत्तों से निकला पानी उन्हें पकाने के लिए पर्याप्त नहीं होता, इसलिए आधा गिलास पानी डाल दें और जब तक सब्जी लबाबदार न हो जाए पकाएं। इस सब्जी को चावल, रोटी, परांठा किसी के भी साथ खा सकते हैं।

इसे बनाने का तीसरा तरीका यह है कि चने की दाल को रात भर के लिए भिगो दें। इसमें आपको यह अंदाजा होना जरूरी है कि चने की मात्रा पुई साग के छठवें हिस्से से अधिक न हो, नहीं तो दाल अधिक हो जाएगी और पुई साग नजर नहीं आएगा। अब साफ किए हुए कटे पुई के पत्तों के साथ चना दाल को मिला दें। उसमें हरी कटी हुई मिर्च, थोड़ा सब्जी मसाला, कुछ साबुत सौंफ, अजवाइन के कुछ दाने और कुटी लाल मिर्च डाल कर दो चम्मच बेसन डालें और ऊपर से जरूरत भर का नमक डाल कर सारी चीजों को गूंथ लें। अब तवा या फ्राइंग पैन गरम करें, उस पर तेल चुपड़ें और पुई साग मिश्रण को कटलेट के आकार में रखते जाएं। इसे ऊपर से ढंक कर धीमी आंच पर पकाएं। इसे ज्यादा पकाने की जरूरत नहीं होती। जैसे ही नीचे का हिस्सा कुछ सख्त होने लगे उसे पलट कर दूसरी तरफ से पका लें। इस सब्जी को चावल-दाल के साथ खाना अच्छा लगता है।

करमू साग

रमू या करमी या कड़म का साग भी स्वाभाविक रूप से धान के खेतों या पानी वाली जगहों पर उग आता है। झारखंड के आदिवासी इलाकों में करमा पर्व पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर दही-अक्षत के साथ इसके पत्ते का तिलक लगाती हैं। यह शाक पेट को साफ रखता, कब्ज का नाश करता और खून में वृद्धि करता है। इसमें भी रासायनिक खादों का उपयोग नहीं होता, इसलिए सेहत के लिए मुफीद है।

इसका साग बनाना बहुत आसान है। इसके पत्तों को भी डंठल से अलग कर तीन-चार बार ठीक से धो लें। छोटा-छोटा काटें और पारंपरिक शाक बनाने के तरीके से जीरा-साबुत लाल मिर्च के तड़के में छौंक कर पानी सूखने तक पका लें। दूसरा तरीका इसे चना दाल, मसूर या मूंग दाल के साथ पकाने का है। इसके लिए भी वही तरीके अपनाएं जो पुई साग बनाने के लिए अपनाए थे। इसे बिना आलू के भी बना सकते हैं, दालों के साथ इसका मेल बहुत अच्छा बैठता है। पुई की तरह इसके पत्तों में कसैलापन नहीं होता, इसलिए यह खाने में बहुत लाजवाब होता है। जैसे दाल के साथ बथुए का साग बनाते हैं, उसी तरह इसे भी रसेदार बना कर चावल के साथ खाएं, बहुत आनंद आएगा।

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