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दाना-पानी: राजस्थान के रंग – मेथी के गट्टे और दाल वाफले

राजस्थानी व्यंजन के दीवाने देश भर में मिल जाएंगे। राजस्थान के भोजन में तीखापन है, तो मिठास भी खूब है। वहां जितनी तीखी सब्जियां और दालें खाई जाती हैं, उतनी ही पसंद वहां पर मिठाइयां भी की जाती हैं। दाल-बाटी-चूरमा तो राजस्थान की पहचान ही बन चुके हैं। पर वहां बेसन के बनने वाली सब्जियों की भी एक लंबी शृंखला है। गट्टे की सब्जी उन्हीं में एक है। इस बार राजस्थान के कुछ व्यंजन।

राजस्थान के व्यंजन।

मानस मनोहर
मेथी के गट्टे
गट्टे राजस्थान में कई तरह से बनते हैं। सादा बेसन के गट्टे तो हर जगह खाए जाते हैं, पर राजस्थान में भरवां गट्टे, रंग-बिरंगे, तले हुए गट्टे भी बनते हैं। मेथी के गट्टे इस मौसम में बड़े स्वादिस्ट होते हैं। यह मेथी का मौसम है और मेथी के गट्टे न खाए, तो फिर मौसम का मजा ही क्या लिया। मेथी के गुणों से तो आप परिचित ही हैं। खासकर मधुमेह रोगियों के
लिए यह बहुत फायदेमंद सब्जी है।

मेथी के गट्टे बनाने की विधि भी वही है, जो सामान्य गट्टे बनाने के लिए अपनाई जाती है। इसे बनाना बहुत आसान है। इसके लिए पहले मेथे के हरे पत्ते साफ कर लें। ध्यान रखें कि गट्टे बनाने के लिए मेथी के पत्ते ही लें, कड़े डंठल इसका मजा किरकिरा कर देते हैं। मेथी के दो कटोरी पत्ते साफ करके ले लें। पत्तों को दो-तीन बार धोकर पानी अच्छी तरह निथार लें। एक कटोरी मेथी अलग रख कर बाकी बचे पत्तों को महीन-महीन काट लें।

अब एक बड़े कटोरे या परात में एक कप बेसन लें। उसमें एक चम्मच हल्दी पाउडर, एक से डेढ़ चम्मच लाल मिर्च पाउडर, एक चम्मच धनिया पाउडर और आधा चम्मच जीरा पाउडर और जरूरत भर का नमक डालें। इसके साथ ही चुटकी भर हींग भी डालें। जब भी बेसन का कोई व्यंजन बनाएं, तो उसमें हींग और अजवाइन का उपयोग जरूर करें। इससे स्वाद भी अच्छा आता है और गैस बनने की समस्या दूर हो जाती है। अब इसी में दो चम्मच देसी घी का मोयन डालें। मुलायम गट्टे बनाने के लिए यह मोयन बहुत जरूरी है। अब सारी चीजों को घी से रगड़ते हुए मिला लें। जब बेसन मुट्ठी में बंधने लगे, तो उसमें कटा हुआ मेथी डालें और गुनगुने पानी का छींटा लगाते हुए बेसन को कड़ा गूंथ लें। ध्यान रखें कि बेसन को गूंथने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए सावधानी से पानी डालें। गुंथे हुए बेसन को थोड़ी देर ढंक कर रख दें।

अब एक भगोने में करीब एक लीटर पानी गरम करने रख दें। पानी की मात्रा का ध्यान रखें कि उसमें गट्टे अच्छी तरह डूब जाएं। जब तक पानी उबलता है, तब तक गट्टे बना लें। गूंथे हुए बेसन में से थोड़े-थोड़े टुकड़े लेकर उसके बेलनाकार गट्टे बनाएं। गट्टे बहुत मोटे न बनाएं, नहीं, तो पकने में वक्त लगेगा और उनके अंदर से कच्चे रहने का भी भय रहेगा। अब इन्हें उबलते पानी में एक-एक कर डालें। इन गट्टों को थोड़ी देर पकने के लिए छोड़ दें। इन्हें पकने में करीब पंद्रह मिनट लगेंगे।

तब तक गट्टे की तरी की तैयारी कर लें। तरी तैयार करने के लिए एक से डेढ़ कटोरी दही लें। उसमें एक चम्मच हल्दी पाउडर, एक से डेढ़ चम्मच लाल मिर्च पाउडर, डेढ़ चम्मच धनिया पाउडर और एक चम्मच जीरा पाउडर डालें। इसके साथ ही चौथाई चम्मच हींग और जरूरत भर का नमक भी डाल दें। इन सारी चीजों को अच्छी तरह फेंट कर थोड़ी देर के लिए रख दें।

गट्टों को देखें। वे पक कर पानी पर तैरने लगेंगे। अगर सारे गट्टे पानी पर तैरने लगे हैं, तो समझना चाहिए कि वे पक गए हैं। इसके अलावा इनके अच्छी तरह पक जाने की पहचान एक और है कि गट्टों की बाहरी सतह पर दाने उभर आते हैं। जब ऐसा हो तो आंच बंद कर दें और गट्टों को ठंडा होने दें। गट्टों को पानी में रखे हुए ही चाकू से मनचाहे आकार में काट लें। अब एक कड़ाही में दो चम्मच देसी घी गरम करें। उसमें जीरा, अजवाइन और चुटकी भर सौंफ का तड़का लगाएं। अगर पसंद हो तो इसमें लहसुन की तीन-चार कलियां काट कर भी डाल डाल सकते हैं। जब तड़का तैयार हो जाए तो उसमें अलग से रखे हुए मेथी के पत्ते डालें और चलाते हुए पकाएं। जब पत्ते पक कर सिकुड़ जाएं, तो उसमें फेंटा हुआ दही मिलाएं और चलाते हुए मद्धिम आंच पर पकाएं। दही को चलाते रहना जरूरी है, नहीं तो वह फट जाता है। जब दही घी छोड़ने लगे, तो उसमें उबले और कटे हुए गट्टे पानी समेत डाल दें। अब आंच थोड़ी तेज कर दें और गट्टों को एक बार चला कर कड़ाही पर ढकक्न लगा दें। करीब पंद्रह मिनट तक पकने दें। तरी गाढ़ी होने लगे, तो उसमें ऊपर से एक चम्मच गरम मसाला डाल कर अच्छी तरह मिलाएं। मेथी के गट्टे तैयार हैं।

दाल वाफले
जस्थान का बहुत लोकप्रिय व्यंजन है। वाफले एक प्रकार की बाटी ही है, जो पहले उबाल कर घी में तली जाती है। वाफले बनाने के लिए दो कप गेहूं का आटा लें। उसमें चार चम्मच देसी घी का मोयन डालें। चुटकी भर खाने का सोडा डालें और सारी चीजों को अच्छी तरह मसल कर मिला लें। अब गुनगुने पानी का छींटा देते हुए कड़ा आटा गूंथ लें। ध्यान रहे कि आटा पतला नहीं होना चाहिए, नहीं तो वाफले नरम नहीं बनेंगे। इस गुंथे हुए आटे को पंद्रह मिनट के लिए ढंक कर आराम करने के लिए छोड़ दें।

इसे साथ खाई जाने वाली दाल मुख्य रूप से चना और मूंग की बनती है। इसके लिए आधी मात्रा चना दाल और एक मात्रा छिलके वाली मूंग दाल को धोकर दो-तीन घंटे के लिए भिगो कर रख दें। फिर एक कड़ाही में हल्दी, नमक और हींग डाल कर पकने के लिए रख दें। करीब आधे घंटे में पक कर दाल तैयार हो जाती है। इसे कलछी या फिर मथानी से अच्छी तरह मसल लें। फिर एक कड़ाही में दो-तीन चम्मच देसी घी में जीरा, अजवाइन, हींग, लहसुन और एक बारीक कटे टमाटर का तड़का लगा कर दाल को छौंक दें। उसमें एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, और एक चम्मच गरम मसाला डाल कर थोड़ी देर पकाएं।

अब वाफले बनाने के लिए गुंथे हुए आंटे की छोटी-छोटी लोइयां लेकर बाटी के आकार में थोड़ा चपटा आकार दें। एक भगोने में पानी उबलने रख दें। पानी उबलने लगे, तो उसमें आटे की लोइयों को डाल दें। जब ये वाफले पक कर पानी की सतह पर तैरने लगें, उनमें कहीं-कहीं दरार और ऊपरी सतह पर बुलबुले जैसे दाने उभरे दिखें तो समझें कि वाफले पक कर तैयार हैं। आंच बंद कर दें और वाफलों को निकाल कर ठंडा होने दें। अब एक कड़ाही में भरपूर देसी घी गरम करें। उसमें वाफलों को डाल कर सुनहरा होने तक तल लें। दाल के साथ गरमा-गरम वाफले परोसें।

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