Hindi Diwas 2021: 14 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है ‘हिंदी दिवस’, जानें इतिहास और महत्व

World Hindi Day 2021: हिंदी दिवस के दिन देश के नागरिकों को यह समझाने की कोशिश की जाती है कि जब तक वह हिंदी को पूरी तरह से नहीं अपनाएंगे, तब तक इसका विकास हो पाना संभव नहीं है।

Hindi Diwas 2021: History, Significance and Key Facts
Hindi Diwas 2021: हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य हिंदी भाषा को बढ़ावा देना और उसका विकास करना है।

Hindi Diwas 2021: Hindi Diwas is celebrated every year on 14 September: हिंदी दुनिया में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में से एक है। यह दुनियाभर में तीसरी स्थान पर सबसे ज्यादा बोली जाती है। वर्ल्ड लैंग्वेज डेटाबेस के 22वें संस्करण इथोनोलॉज में यह बताया गया है कि पूरी दुनिया में करीब 61.5 करोड़ लोग हिंदी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। भारतीय संस्कृति की संवाहक हिंदी भारत की आधिकारिक भाषा है। हिंदी के प्रसार को बढ़ावा देने के लिए हर साल 14 सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ मनाया जाता है।

इस तरह हुई थी ‘हिंदी दिवस’ मनाने की शुरुआत: साल 1949 में 14 सितंबर के दिन संविधान सभा ने हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार कर लिया था। हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में पहचान दिलाने के लिए उस समय प्रमुख हिंदी लेखक और कई बड़े नेताओं जैसे हजारी प्रसाद द्विवेदी, काका कालेलकर, मैथिली शरण गुप्त और सेठ गोविंद दास ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इसके बाद 26 जनवरी 1950 को यह संविधान का हिस्सा बन गई थी। बाद में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 14 सितंबर के दिन ‘हिंदी दिवस’ मनाने का फैसला लिया था। बता दें कि देश में पहला हिंदी दिवस साल 1953 में मनाया गया था।

कैसे मनाते हैं हिंदी दिवस: छात्रों को हिंदी का महत्व समझाने और इस भाषा का विकास करने के लिए स्कूलों में इस दिन कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। छात्रों के बीच कविता, लेख और अन्य प्रतियोगिताएं करवाई जाती हैं। इसके साथ ही देश और दुनिया में हिंदी के विकास के लिए काम करने वाले लोगों को राष्ट्रभाषा कीर्ति पुरस्कार और संस्थाओं को राष्ट्रभाषा गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।

14 सितंबर के दिन सरकारी दफ्तरों में हिंदी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य: आजादी से पहले भारत में सभी सरकारी कामकाज अंग्रेजी भाषा में हुआ करते थे। हालांकि देश की आजादी के बाद लोगों के बीच हिंदी भाषा को बढ़ावा दिया गया। 14 सितंबर के दिन देश के नागरिकों को यह समझाने का प्रयास किया जाता है कि जब तक वह हिंदी को पूरी तरह से नहीं अपनाएंगे, तब तक इसका विकास होना संभव नहीं है।

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