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Hindi Diwas 2018: जानें कब मनाया गया था पहला हिंदी दिवस? हिंदी कैसे बनीं भारत की राजभाषा

Hindi Diwas 2018: सैकड़ों भाषाओं तथा हजारों बोलियों वाले भारत देश में एक भाषा को संपर्क भाषा के रूप में स्थापित कर पाना आसान नहीं था। हालांकि, आजादी की लड़ाई के दौरान ही देश के लिए एक साझा भाषा की मांग उठती रही थी।

Hindi Diwas 2018: देश के शीर्ष नेताओं के काफी विचार-विमर्श के बाद हिंदी और अंग्रेजी को भारत के आधिकारिक राजभाषा के रूप चुना गया।

Hindi Diwas 2018: आजाद भारत का संविधान तैयार करने के लिए 6 दिसंबर 1946 को संविधान सभा का गठन किया गया था जिसके अंतरिम अध्यक्ष सच्चिदानंद सिन्हा बनाए गए थे। बाद में सभा के स्थायी अध्यक्ष के तौर पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद को चुना गया। संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर बनाए गए। 26 नवंबर 1949 को डॉ. अंबेडकर की अध्यक्षता में बने संविधान के मसौदे को भारत के संविधान के रूप में स्वीकृति दी गई और 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हो गया। आजाद और गणतंत्र भारत में राजकीय भाषा एक बड़ा और पेंचीदा सवाल था। चूंकि भारत में सैकड़ों भाषाएं बोली जाती थीं ऐसे में किसी एक भाषा को राजभाषा का दर्जा दे पाना एक मुश्किल काम था।

देश के शीर्ष नेताओं के काफी विचार-विमर्श के बाद हिंदी और अंग्रेजी को भारत के आधिकारिक राजभाषा के रूप चुना गया। संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को भारत की राजभाषा के तौर पर प्रतिष्ठित कर दिया। मतलब यह कि भारत के सरकारी कामकाज की भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली हिंदी होगी। 14 सितंबर की ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। इसी के साथ साल 1953 में देश भर में पहली बार आधिकारिक रूप से हिंदी दिवस मनाया गया। तब से आज तक हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

सैकड़ों भाषाओं तथा हजारों बोलियों वाले भारत देश में एक भाषा को संपर्क भाषा के रूप में स्थापित कर पाना आसान नहीं था। हालांकि, आजादी की लड़ाई के दौरान ही देश के लिए एक साझा भाषा की मांग उठती रही थी। अलग-अलग प्रांत के नेताओं ने हिंदी को देश की संपर्क भाषा बनने के काबिल माना था। समूचे उत्तर भारत में तथा पश्चिमी भारत के ज्यादार क्षेत्रों में हिंदी बोली व समझी जाती थी। लेकिन पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के लोगों के लिए हिंदी परायी भाषा की तरह थी। इसीलिए, हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के रास्ते में तमान अड़चनें थीं। संविधान के अनुच्छेद 351 में सरकार को अभिव्यक्ति के सभी माध्यमों में हिंदी के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस अनुच्छेद उद्देश्य है कि प्रचार-प्रसार के बाद जब हिंदी सारे देश में आम सहमति से स्वीकृत हो जाएगी तब इसे राष्ट्रभाषा घोषित किया जा सकता है। 1965 में सरकारी कामकाज की भाषा से अंग्रेजी को हटाने तथा हिंदी की स्थापना के विरोध में दक्षिण भारत में काफी उग्र प्रदर्शन हुए। इस वजह से सरकार राजभाषा के तौर पर हिंदी के साथ अंग्रेजी को बरकरार रखने को मजबूर हो गई।

 

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