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युवाशक्तिः अब अजूबा नहीं महिलाओं का पसीना बहाना और कमाना

आम हिंदुस्तानी घरों में सौंदर्य के मुकाबले महिलाओं के स्वास्थ्य को दोयम दरजे का ही रखा जाता है। कपड़े और मेकअप के लिए शारीरिक फिटनेस के नाम पर नींबू पानी, कम खाना और दूसरी तरह की सलाह दी जाती है।

Author July 5, 2018 5:52 AM
फिटनेस ट्रेनर मोना राजपूत कहती हैं ‘जिम, एरोबिक्स, जुम्बा जैसी चीजों की भारतीय महिलाओं को कोई जरूरत नहीं समझी जाती थी। लेकिन हाल के दिनों में इस सोच में काफी बदलाव आया है’।

सुमन केशव सिंह

आम हिंदुस्तानी घरों में सौंदर्य के मुकाबले महिलाओं के स्वास्थ्य को दोयम दरजे का ही रखा जाता है। कपड़े और मेकअप के लिए शारीरिक फिटनेस के नाम पर नींबू पानी, कम खाना और दूसरी तरह की सलाह दी जाती है। अमूमन शारीरिक सौष्ठव और सुंदर शरीर के लिए जिम और योग जैसी चीजों पर अब तक पुरुषों का ही दबदबा देखा जाता रहा है। दूसरी ओर, महिलाओं के लिए घर का काम करो, कम खाओ और स्वस्थ रहो वाली मानसिकता हुआ करती थी। फिटनेस ट्रेनर मोना राजपूत कहती हैं ‘जिम, एरोबिक्स, जुम्बा जैसी चीजों की भारतीय महिलाओं को कोई जरूरत नहीं समझी जाती थी। लेकिन हाल के दिनों में इस सोच में काफी बदलाव आया है’।

मोना कहती हैं कि बीच में एक चलन ये भी था कि लड़कियां शादी से कुछ महीने पहले पतली होने के लिए जिम और योग कक्षाएं शुरू करती थीं। लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब लड़कियां स्वावलंबी हुई हैं। तो अब खुद को सेहतमंद रखने के लिए संवेदनशील भी। अब उनके जिम में 30 फीसद वो लड़कियां हैं जो शादी-ब्याह के लिए नहीं केवल खुद को फिट रखने के लिए जिम आती हैं। मोना कहती हैं कि फिटनेस का क्षेत्र भी महिलाओं के लिए अपार संभावनाओं वाला है। इस क्षेत्र में आकर वो न केवल खुद और दूसरी महिलाओं को फिट कर उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं बल्कि अच्छे-खासे पैसे भी कमा सकती हैं। मोना की मानें तो हाल के दिनों में महिलाएं अपनी फिटनेस को लेकर काफी सजग और संवेदनशील हुई हैं। अब जिम में वर्कआउट करने वालों में 30 फीसद संख्या महिलाओं की दिखाई देने लगी है।

वहीं पीतमपुरा में टीना फिटनेस के नाम से फिटनेस क्लासेज चलाने वाली टीना कहती हैं कि यह क्षेत्र वाकई पुरुष प्रधानता वाला था। लेकिन अब इस क्षेत्र में तेजी से महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। इतना ही नहीं फिटनेस को लेकर गंभीर हुई महिलाओं के लिए उन्हें फिट करने के लिए प्रशिक्षकों की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है। टीना का मानना है कि इस क्षेत्र में व्यावसायिक दृष्टि से भी महिलाओं की कमी है। जिस कमी को पूरा कर वो बेहतर आय भी कर सकती हैं। टीना ने बताया कि उन्होंने पति की मौत के बाद करीब तीन साल पहले टीना फिटनेस के नाम से अपना स्टूडियो खोला है, जिससे वह अपने दो बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं। उन्होंने इस बात की ओर भी इशारा किया कि इस क्षेत्र में कम शैक्षिक योग्यता के साथ बेहतर आय की जा सकती है। उन्होंने बताया कि कई बार महिलाएं और लड़कियां पुरुष प्रशिक्षकों के साथ सहज महसूस नहीं करतीं। लेकिन वो अपनी काया और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर हैं ऐसे में महिला प्रशिक्षकों की जरूरत पड़ती है।

टीना कहतीं हैं कि लोगों की बदली मानसिकता की वजह से अब महिलाएं गर्भावस्था के दौरान भी जिम फिटनेस की कक्षाओं में आती हैं। उन्हें कई तरह की परेशानी होती है जो वो पुरुष प्रशिक्षक से नहीं साझा कर पातीं। ऐसे में महिला प्रशिक्षकों की मांग में इजाफा हुआ है। लुधियाना की योग प्रशिक्षक संदीप कौर की मानें तो उनके अनुसार यह क्षेत्र खास कर लड़कियों के लिए अपार संभावनाओं वाला है। इस क्षेत्र के लिए खास बात ये भी है कि आजकल के शैक्षिक प्रतियोगिता वाले माहौल में 12वीं पास कर भी इसे क्षेत्र में आसानी से करियर बनाया जा सकता है। संदीप कौर कहती हैं कि शारीरिक सुंदरता और उसे निरोग बनाए रखने की सोच में हाल के दिनों में इजाफा हुआ है। जिसका असर महिलाओं पर भी पड़ा। इसका एक फायदा यह सामने आया कि योग और फिटनेस ट्रेनरों की मांग बढ़ गई। संदीप बताती हैं कि वो ज्यादातर निजी प्रशिक्षक का काम करतीं है। जिससे उन्हें एक ग्राहक से 15-20 हजार रुपए एक घंटे के मिल जाते हैं। संदीप की मानें तो यदि किसी प्रशिक्षक का काम और अनुभव लोगों को फायदा पहुंचाता है तो उसकी मांग बढ़ जाती है। वो महीने के एक लाख रुपए तक आसानी से कमा सकती हैं।

मेरा मानना है आज जिस प्रकार से लोग और खास कर महिलाएं फिटनेस और योग को लेकर जागरुक हुई हैं उसमें सरकार का प्रयास भी शामिल है। आज मैं अपने स्कूल के बच्चों को भी योग आदि सिखाती हूं। उसने साथ इस उम्र में भी उछल-कूद लेती हूं। स्कूल में बच्चों से घिरे रहने और काम के दबाव के बाद भी सकारात्मक ऊर्जा की वजह से अब मैं बच्चों पर गुस्सा नहीं करती हूं। -गीता ग्रोवर, 49 साल, शिक्षिका

मुझे लगता है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को तो ज्यादा जरूरत होती है शारीरिक फिटनेस की क्योंकि उनके अंदर समय-समय पर काफी बदलाव आते रहते हैं। केवल घर का काम करने से शरीर के सभी अंगों का वर्कआउट नहीं हो पाता है। यह जागरुकता कहा ही असर है कि अब महिलाएं भी जिम वगैरह जा रही है मैं पिछले एक साल से जिम जा रही हूं। –पारुल सेठी, 45 साल, गृहिणी

कभी हमारा समाज महिलाओं को जिम के कपड़ों में देखने को तैयार नहीं था, उन्हें लगता था कि मर्दों के इस क्षेत्र में वो क्या करेंगी। वो मर्दों को भी प्रशिक्षत करेंगी यह जान कर लोगों की भौंहें चढ़ जाती थीं। पहले ज्यादातर महिलाएं सिर्फ सुंदरता के लिहाज से जाती थीं। लेकिन अच्छी बात यह है कि अब परिवारों में महिलाओं की सेहत की कद्र हो रही है। लोग अपनी पत्नियों को जिम भेज रहे हैं। बहुत मामलों में यह महिलाओें की अपनी पसंद होती है। -मोना राजपूत, नोएडा, ट्रेनर, फिटनेस मिंत्रा

योग को लेकर लोग बहुत जागरूक हुए हैं जिसका नतीजा यह है कि इसने महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए रास्ते खोले हैं। यह क्षेत्र महिलाओं के लिए करियर के हिसाब से भी अच्छा है। ज्यादातर महिलाएं, महिला प्रशिक्षक ही चाहती हैं। योग में कई ऐसे अभ्यास होते हैं जिन्हें करवाने के लिए किसी की जरूरत होती है। ऐसे में किसी पुरुष के लिए वो अभ्यास करवाना भी असहज महसूस करवाता है। -संदीप कौर, लुधियाना, योगा ट्रेनर

लोग फिटनेट को लेकर गंभीर हुए हैं, अब केवल शादी-ब्याह के वक्त ही लोग नहीं आते अब पूरे साल लोग सेशन लेते हैं। महिलाएं भी अब पुरुषों के बराबर मेहनत करती हैं, ऑफिस और घर दोनों संभालती हैं ऐसे में मानसिक और शारीरिक रूप से तंदुरुस्त होना उनकी भी जरूरत है। हाल के दिनों में राजनीतिक रूप से भी योग और फिट इंडिया को जो आगे बढ़ाया जा रहा है उसका भी फायदा लोगों को मिल रहा है। -टीना, पीतमपुरा, ट्रेनर व फाउंडर, टीना फिटनेस

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