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World Heart Day 2018 Quotes: अपने दिल को ऐसे रखें स्‍वस्‍थ, जानिए क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर्स

World Heart Day 2018 Quotes, Messages, SMS, Slogan, Theme: आज (29 सितम्बर) विश्व हृदय दिवस मनाया जा रहा है। दुनियाभर में और भारत में दिल की बीमारियों (कार्डियोवैस्कुलर रोगों) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

Author September 29, 2018 9:30 AM
World Heart Day 2018 : चित्र का इस्‍तेमाल केवल प्रस्‍तुतिकरण के लिए किया गया है।

World Heart Day 2018 Quotes, Messages, SMS, Slogan, Theme: आज (29 सितम्बर) विश्व हृदय दिवस मनाया जा रहा है। दुनियाभर में और भारत में दिल की बीमारियों (कार्डियोवैस्कुलर रोगों) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देश के गांवों में रहने वाले लोग भी हाइपरलिपिडेमिया, हाइपरटेंशन, मधुमेह अैर तनाव के कारण दिल की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। आधुनिक जीवनशैली और अनियमित आहार के कारण 30 से 40 साल की उम्र के लोगों को दिल संबंधी रोगों की बीमारियों होने लगी हैं। समस्या इतनी आम हो चुकी है कि छोटी उम्र के बच्चे भी इस बीमारी का शिकार होते जा रहे हैं। हृदय रोग, दुनिया में मृत्यु और विकलांगता का प्रमुख कारण है और ह्रदय रोगों के कारण हर साल किसी और रोग की तुलना में अधिक मौतें होती हैं। इसलिए विशेषज्ञों ने दिल को स्वस्थ रखने के कुछ उपाय सुझाए हैं।

बीएलके सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक और डायरेक्टर डॉ. नीरज भल्ला का कहना है, “हृदय रोग की वजह हृदय को या उसके किसी हिस्से को पहुंची क्षति, कोरोनरी आर्टरी को पहुंची क्षति या उस तक पोषक तत्वों और ऑक्सीजन की कमजोर आपूर्ति होती है।” उन्होंने कहा, “कार्डियोवस्क्यूलर सिस्टम ऑक्सीजन-युक्त रक्त को हृदय से धमनियों के जरिये शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचाता है, वहीं शिराओं के जरिये ऑक्सीजन रहित रक्त को फिर हृदय तक लाता है। भारतीय महिलाओं में हृदय रोग खतरनाक तरीके से बढ़ रहा है और इसके पीछे उनकी सुस्त जीवनशैली, तनाव, प्रदूषण और गर्भनिरोधक दवाओं व अन्य हारमोनल दवाइयों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।”

एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स के सलाहकार डॉ.बी.आर. दास ने कहा, “पिछले कुछ दशकों में भारत में दिल की बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं। स्टैंडर्ड लिपिड प्रोफाइल में सीरम, प्लाज्मा टोटल कॉलेस्ट्रॉल, हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन- एसोसिएटेड कॉलेस्ट्रॉल, लो- डेंसिटी लिपोप्रोटीन एसोसिएटेड कॉलेस्ट्रॉल और टोटल ट्राइग्लीसराइड की जांच की जाती है। इस तरह की जांचों से दिल की बीमारियों का पता लगाया जा सकता है।”

मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (नई दिल्ली) के सीनियर कंसल्टेंट (इंटर्वेन्शनल कॉर्डियोलॉजी) डॉ. विवेक कुमार ने कहा, “भारत में हृदय रोगों खासतौर से हार्ट फेल्योर को लेकर लोगों में जागरूकता काफी कम है। लोगों में हार्ट फेल्योर के बारे में बुनियादी समझ का आभाव है। यह एक बढ़ता रोग है, जोकि हार्ट की मांसपेशियों को कमजोर कर देता है और पूरे शरीर में रक्त पम्प करने की इसकी क्षमता को प्रभावित करता है। इसे अक्सर गलती से हार्ट अटैक समझ लिया जाता है, जोकि एक अचानक होने वाली कार्डिएक घटना है।”

पीएसआरआई हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ. टी.एस. क्लेर का कहना है कि स्वस्थ शरीर के लिए स्वस्थ दिल का होना बहुत जरूरी है, इसलिए दिल के प्रति बिलकुल भी लापरवाही नहीं बरतना चाहिए। एक बार हार्ट अटैक झेल चुके हृदय के मरीजों को अत्यन्त सावधानी के साथ अपनी जीवन शैली में बदलाव अपनाने चाहिए।

धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के कार्डियो थोरेसिक एवं वैस्कुलर डायरेक्टर और सर्जन डॉ. मितेश बी. शर्मा का कहना है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति तनाव से घिरा हुआ है और इस बात में कोई दोहराए नहीं है की तनाव हृदय घात होने का एक मुख्य कारण है। दोष हमारी दिनचर्या और खान पान का भी है, अधिक मीठा या मसालेदार भोजन, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधियों का अभाव हृदय को कमजोर बना रहे हैं। दिल को नुकसान पहुंचाने में तनाव, अनियमित जीवनशैली और प्रदूषण भी पूर्ण रूप से जिम्मेदार है।

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