मोमोज हों, पकौड़े, पराठे, चाउमीन या पैटीज… तीखी लाल चटनी के बिना कुछ लोग स्ट्रीट फूड खाना बिल्कुल भी पसंद नहीं करते हैं। कई लोग तो चटनी के लिए एक्स्ट्रा भी मांगते हैं। लेकिन गुजरात में हाल ही में लाल चटनी की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि कहीं हम अनजाने में मिलावटी चटनी तो नहीं खा रहे?
गुजरात के बनासकांठा जिले के पालनपुर की सब्जी मंडी में एक किराने की दुकान से करीब 700 किलो लाल चटनी जब्त की गई है। इसमें 5-5 किलो की 140 ऐसी जार थीं, जिन पर कोई लेबल नहीं लगा था। इनकी कीमत करीब 20,940 रुपये बताई गई है। अधिकारियों ने चटनी के सैंपल लैब में जांच के लिए भेजे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
FSSAI ने भी इस कार्रवाई की जानकारी दी है। एक विशेष जांच अभियान के दौरान 700 किलो कथित मिलावटी लाल चिली सॉस पकड़ने की जानकारी दी गई है। फिलहाल इसकी लैब जांच चल रही है।
चटनी का बहुत ज्यादा लाल रंग देखकर सावधान हो जाएं?
इंडियन एक्सप्रेस की बातचीत में मुंबई के ग्लेनीगल्स अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शंकर जंवर ने बताया कि लाल मिर्च की चटनी में मिलावट के लिए आर्टिफिशियल कलर, खाने के लिए सही नहीं माने जाने वाले रंग, स्टार्च या दूसरे सस्ते पाउडर मिलाए जा सकते हैं।
चटनी को ज्यादा सुर्ख लाल दिखाने या उसकी मात्रा बढ़ाने और लागत कम करने के लिए यह मिलावट की जा सकती है। ऐसे में अगर चटनी का रंग बहुत ज्यादा चमकीला और एकदम गहरा लाल है तो थोड़ा सावधान रहना चाहिए। खासकर तब, जब उसका रंग सामान्य लाल चटनी से बिल्कुल अलग नजर आए।
चटनी खाने से पहले बरतें ये सावधानी
चटनी से केमिकल जैसी गंध आने से उसे बिल्कुल भी ना खाएं, यह मिलावटी हो सकती है। खाते समय ज्यादा किरकिरापन महसूस होने, जरूरत से ज्यादा तेल ऊपर आना या स्वाद में अजीब कड़वापन पर भी इसमें मिलावट हो सकती है। लेकिन यह भी समझिए की सिर्फ रंग, गंध या स्वाद देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि चटनी में मिलावट है।
सिर्फ देखकर मिलावट का पता नहीं लगाया जा सकता
चटनी का रंग देखकर शक हो सकता है, लेकिन इससे मिलावट की पुष्टि नहीं होती। इसकी सही जानकारी सिर्फ लैब टेस्ट से मिल सकती है।
गुजरात में पकड़ी गई चटनी के सैंपल भी अभी जांच में हैं। इसलिए रिपोर्ट आने से पहले यह कहना सही नहीं होगा कि उसमें कौन सी चीज मिलाई गई थी।
मिलावटी चटनी खाने से क्या हो सकता है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि चटनी में क्या मिलाया गया है, उसकी कितनी मात्रा है और कोई व्यक्ति उसे कितनी बार खा रहा है।
अगर चटनी में ऐसे रंग या दूसरी चीजें मिली हैं, जिन्हें खाने की इजाजत नहीं है, तो इसे बार-बार खाने से पेट में जलन, जी मिचलाना, उल्टी या पेट खराब होने जैसी दिक्कत हो सकती है। लिवर और शरीर के दूसरे अंगों पर भी पड़ सकता है।
लाल चटनी खरीदते समय इन चीजों का रखें ध्यान
पालनपुर में पकड़ी गई चटनी का बिना लेबल वाले जार में होना भी ध्यान देने वाली बात है। अगर आपको ऐसी चटनी मिल रही है, जिसके बारे में यह पता ही नहीं कि इसे किसने बनाया है, इसमें क्या डाला गया है या यह कब तक ठीक है, तो उसे खरीदने से बचना बेहतर है।
पैक्ड चटनी लेते समय पैकेट या बोतल पर ये चीजें जरूर देख लें—
किस कंपनी ने इसे बनाया है
इसमें क्या-क्या डाला गया है
FSSAI नंबर या रजिस्ट्रेशन की जानकारी
बैच नंबर
बनाने और एक्सपायरी की तारीख
पैकेट या बोतल ठीक से सील है या नहीं
खुली चटनी खरीदते समय यह पता लगाना मुश्किल होता है कि इसे कैसे बनाया गया है, इसमें क्या-क्या डाला गया है और इसे कितनी साफ-सफाई से रखा गया है।
इसलिए कोशिश करें कि ठीक से पैक और लेबल वाली चटनी ही खरीदें। घर की बनी ताजी चटनी भी अच्छा विकल्प है, क्योंकि उसमें इस्तेमाल होने वाली चीजों के बारे में आपको पता होता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञ की राय के आधार पर तैयार किया गया है।
